'नाटक' से कुरूक्षेत्र बना कर्नाटक, तेज हुआ सियासी दावपेचों का खेल

FirstIndia Correspondent Published Date 2018/05/16 11:39

बेंगलुरु। कर्नाटक विधानसभा चुनाव के नतीजों ने सूबे में हालात इस कदर कर दिए हैं कि सभी राजनीतिक दलों की सांसें फूली हुई दिखाई दे रही है। चाहे बात सिंगल लार्जेस्ट पार्टी भाजपा की हो या राहुल के 'हाथ' से छिटकती कांग्रेस की अथवा फिर किंगमेकर की भूमिका में दिखाई दे रही जेडीएस की। हर कोई सूबे में अपनी सरकार बनाने के लिए साम-दाम-दंड-भेद अपनाने में जुटा हुआ नजर आ रहा है।

भाजपा और कांग्रेस दोनों ही राज्य में अपनी सरकार बनाने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं। हालांकि भाजपा सिंगल लार्जेस्ट पार्टी होने के नाते पहला हक अपना बता रही है, वहीं कांग्रेस भी जेडीएस को समर्थन देकर संख्या बल के लिहाज से अपनी सरकार बनाने की कवायद में जुटी है। ये अलग बात है कि चुनाव के नतीजे ही ऐसे आए हैं, जिससे किसी भी पार्टी को पूर्ण बहुमत हासिल नहीं हो सका है।

नतीजों से इतर, कांग्रेस-जेडीएस ने मिलकर सरकार बनाने का दवा किया है। हालांकि बीजेपी के सीएम उम्मीदवार बीएस येदियुरप्पा ने भी सरकार बनाने की बात कही है और पहला हक अपना ही जताया है। इस चुनाव में 104 सीटों के साथ बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। इन सबके बीच सभी की नजर राज्यपाल पर टिकी हैं कि सरकार बनाने के लिए वे पहले किसको बुलाते है।

वहीं इन सबके बीच सरकार बनाने को लेकर कांग्रेस-JDS और बीजेपी आज अपने-अपने विधायकों के साथ बेंगलुरु में बैठकें कर रहे हैं। कांग्रेस ने आज बुधवार को अपने विजयी 78 विधायकों की एक बैठक बुलाई है। कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमिटी (केपीसीसी) के कार्यालय में होने वाली इस बैठक में सिद्धारमैया और कांग्रेस का केंद्रीय प्रतिनिधिमंडल भी शामिल होगा।

वहीं बीजेपी के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार बी एस येदियुरप्पा की अगुवाई में पार्टी विधायक दल की बैठक में येदियुरप्पा को विधायक दल का नेता चुने जाने के साथ ही कर्नाटक में भाजपा का मुख्यमंत्री होने का दावा पेश किया जाना है। बेंगलुरु में होने वाली इस बैठक में सभी 104 विधायकों के मौजूद रहेंगे। बैठक में विशेष तौर पर दिल्ली से भेजे गए केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर, जे पी नड्डा और धर्मेंद्र प्रधान भी शामिल हो रहे हैं।

बहरहाल, इन सबके बीच सबसे अहम बात राज्यपाल के फैसले पर टिकी है कि राज्य में सरकार बनाने के लिए वे किस गुट को पहले आमंत्रित करते हैं। राज्यपाल वजूभाई बाला के पास अभी दो विकल्प हैं, पहला यह कि वो नतीजों में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी बीजेपी को पहले बुलाएं और बहुमत साबित करने के लिए कहें। वहीं दूसरा यह कि वो कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन को सरकार बनाने के लिए न्यौता दें, जो 112 का मैजिक फिगर होने का दावा कर रहे हैं।

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