शहीद के अंतिम दर्शन के लिए उमड़ा जन सैलाब, नहीं पहुंचा कोई मंत्री

Published Date 2018/02/14 04:47,Updated 2018/02/14 05:17, Written by- FirstIndia Correspondent

आरा। चुनावों के दौरान हर बार देखने को मिलता है कि सेना के मुद्दों को उठाकर माहौल को अपने पक्ष में किया जाता है। लोगों को यह बताने की कोशिश की जाती है कि देश की सबसे ज्यादा चिंता किसी को अगर है, तो वो हमारी ही पार्टी को है। अक्सर टीवी चैनलों में बड़े बड़े नेता सेना की मुश्किलों का गुणगान करते है, लेकिन यह सबकुछ उस समय मात्र एक सियासी ड्रामा नजर आता है, जब किसी शहीद का पार्थिव शरीर उसके घर पहुँचता है।

सेना पर बडे बडे बयान देने वाले नेता कहीं गायब हो जाते हैं, और मंत्री जी को भी अक्सर किसी कारण से आने का मौका नहीं मिल पाता है। जवानो के नाम पर किए जा रहे ऐसे ही एक ड्रामे की पोल तब खुल गई, जब शहीद मोजाहिद खान का पार्थिव शरीर उनके गृह नगर आरा (बिहार) में लाया गया।  

जम्मू कश्मीर में सीआरपीएफ कैंप पर हमले में हुए शहीद मोजाहिद खान का पार्थिव शरीर जब सम्मानपूर्वक उनके घर लाया गया, तो देश की रक्षा में खुद को कुर्बान कर देने वाले शहीद के अंतिम दर्शन को पाने के लिए जन सैलाब उमड पडा। अंतिम विदाई के वक्त सबकी आँखें  नम थी, लेकिन गर्व से छाती चौडी थी।

हैरान करने वाली बात थी कि सेना और सेना से जुड़े हर मुद्दों पर राजनीति करने वाले एक भी राजनेता को उनके अंतिम यात्रा में आने का समय नहीं मिला। शहीद के अंतिम यात्रा में किसी भी मंत्री के ना पहुँचने से आरा में लोगों का गुस्सा सातवें आसमान पर चढ़ गया। लोगों ने इस बात के लिए नेताओं को आड़े हाथों लिया। जब पूछा गया कि शहीद की अंतिम यात्रा में कोई नेता क्यों नहीं आया? तो किसी ने कहा कि "मंत्री जी कैसे आएँगे, वो टीवी पर सेना के मुद्दे पर बहस करने गए होंगे"

शहीद के अंतम यात्रा के समय, आरा नगर का माहौल कुछ ऐसा था कि हर किसी का दिल रो पड़ा। नगरवासी मोजाहिद की शहीदी पर खुद को गौरवांगीत महसूस कर रहे थे। पार्थिव शरीर को जैसे ही लाया गया, लोगो की भारी भीड ने देशभक्ति के नारे लगाने शुरू कर दिए। 

कहते हैं किसी इंसान को मारना आसान है, लेकिन उसकी सोच को नहीं। शहीद की अंतिम यात्रा के दौरान यह बात सच साबित होती हुई दिखाई दी। 

मोजाहिद खान ने खुदको वतन के लिए कुर्बान करके नई नई पीढ़ी में जोश भर दिया। आरा नगर के बच्चो से जब बात की गई, तो उन्होंने कहा कि हम भी बड़े होकर उनकी ही तरह वतन की रक्षा करना चाहते हैं। बच्चे तो बच्चे, बड़ों ने भी कुछ कुछ इसी तरह की बात की। नगर की महिलाएं, अपने बच्चो को मोजाहिद खान की तरह ही सेना में भेजना चाहती हैं। 

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