12 साल बाद रक्षाबंधन के साथ रहेगा चंद्रग्रहण का साया, जानिए कब से कब तक रहेगा शुभ मुहूर्त

Published Date 2017/08/03 03:57, Written by- Pandit Mukesh Shastri

श्रावण मास की पूर्णिमा को रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाता है। इस बार ये पर्व  दिनांक 7 अगस्त, सोमवार  को मनाया जायेगा| लेकिन इस बार इस त्योहार पर भद्रा के साथ ही चंद्रग्रहण का साया भी रहेगा। करीब 12 साल बाद ऐसा संयोग बना है जब राखी के दिन ग्रहण लग रहा है। इसलिए इस बार राखी के दिन सूतक भी लगेगा। सूतक लगने से पहले भद्रा का असर रहेगा तो आज जानेंगे की इस बार चंद्रग्रहण के सांये में मनाई जानी वाली राखी के त्यौहार पर रक्षाबंधन का शुभ समय के बारे में और साथ ही जानेंगे की कैसे राखी का पर्व भाई-बहन के रिश्ते को और मजबूत बनाता है?

खुशियों का पर्व राखी जीवन में नई सौगात लेकर आता है। इस पर्व को लेकर ज्योतिष शास्त्र का भी एक विशेष दृष्टिकोण है। वेद शास्त्रों के अनुसार रक्षिका को आज के आधुनिक समय में राखी के नाम से जाना जाता है| रक्षा सूत्र को सामान्य बोलचाल की भाषा में राखी कहा जाता है| इसका अर्थ रक्षा करना, रक्षा को तत्पर रहना या रक्षा करने का वचन देने से है| श्रावण मास की पूर्णिमा का महत्व इस बात से और बढ़ जाता है कि इस दिन पाप पर पुण्य, कुकर्म पर सत्कर्म और कष्टों के उपर सज्जनों का विजय हासिल करने के प्रयासों का आरंभ हो जाता है। जो व्यक्ति अपने शत्रुओं या प्रतियोगियों को परास्त करना चाहता है उसे इस दिन वरूण देव की पूजा करनी चाहिए|

रक्षाबंधन के त्यौहार पर इस बार एक विशेष प्रकार का शुभ संयोग बन रहा रहा है। इस बार रक्षाबंधन पर सावन अंतिम सोमवार का होना, श्रवण नक्षत्र का होना, आयुष्मा योग का होना शुभ संयोग बना रहा है। इस बार का राखी का त्यौहार जहाँ भाइयों के कैरियर में शुभता लायेगा वही बहनों के जीवन में खुशहाली लेकर आयेगा और सोमवार के दिन राखी का त्यौहार आने से भगवान भोलेनाथ और माँ गौरी का पूर्ण शुभ आशीर्वाद प्राप्त होगा। अविवाहित बहनो और अविवाहित भाइयो के विवाह में आ रही रुकावटे दूर होगी।
 
हिन्दू धर्म में प्रत्येक पूजा कार्य में हाथ में कलावा ( धागा ) बांधने का विधान है| यह धागा व्यक्ति के उपनयन संस्कार से लेकर उसके अन्तिम संस्कार तक सभी संस्करों में बांधा जाता है| राखी का धागा भावनात्मक एकता का प्रतीक है| स्नेह व विश्वास की डोर है| धागे से संपादित होने वाले संस्कारों में उपनयन संस्कार, विवाह और रक्षा बंधन प्रमुख है। पुरातन काल से वृक्षों को रक्षा सूत्र बांधने की परंपरा है। बरगद के वृक्ष को स्त्रियां धागा लपेटकर रोली, अक्षत, चंदन, धूप और दीप दिखाकर पूजा कर अपने पति के दीर्घायु  की कामना करती है। आंवले के पेड़ पर धागा लपेटने के पीछे मान्यता है कि इससे उनका परिवार धन धान्य से परिपूर्ण होगा।वह भाइयों को इतनी शक्ति देता है कि वह अपनी बहन की रक्षा करने में समर्थ हो सके। राखी बांधने के लिए शुभ मुहूर्त की प्रतीक्षा की जाती है। अगर उनके अनुसार राखी बांधी जाए तो यह शुभ फल देती है।


आइये जानते है कि सबसे पहले रक्षाबंधन का शुभ मुहूर्त:
जब भी कोई कार्य शुभ समय में किया जाता है, तो उस कार्य की शुभता में वृ्द्धि होती है| भाई- बहन के रिश्ते को अटूट बनाने के लिये इस राखी बांधने का कार्य शुभ मुहूर्त समय में करना चाहिए|

रक्षाबंधन पर राखी बांधने का शुभ समय:
श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि दिनांक 7 अगस्त 2017 ,सोमवार को रक्षाबंधन का त्यौहार मनाया जायेगा | इस दिन पूर्णिमा तिथि रात्रि 11.41 मिनट रहेगी ,किन्तु इसी दिन पूर्वाह्न  11 बजकर 5 मिनट तक भद्रा और रात्रि में चंद्रग्रहण होने से सूतक दोपहर बाद 1 बजकर 53 मिनट से प्रारम्भ होगा | परम्परा अनुसार भद्रा सूतक  में कोई शुभ कार्य नहीं किया जा सकता है अतः रक्षाबंधन के दिन राखी बांधने का सर्वश्रेष्ठ समय दोपहर 11 बजकर 5 मिनट से दोहर 1 बजकर 52 मिनट तक रहेगा |  

रक्षाबंधन की विधि:
रक्षाबंधन पर महिलाएं एवं पुरोहित सुबह स्नान करके सूर्य को तांबे के बर्तन से अर्ध्य अर्पित करें। दोपहर बाद सूती, रेशमी या पीले कपड़े में चावल, केशर, चंदन, सरसों व दूर्वा रखकर एक पोटली (रक्षा पोटलिका) बनाएं और उसे एक तांबे के लोटे में रखकर भगवान श्रीकृष्ण को अर्पित कर दें। फिर लाल कलावा (पूजा में उपयोग आने वाला पवित्र धागा) लेकर गंगाजल, हल्दी व केशर से पवित्र करें तथा अपने इष्ट देव का ध्यान करते हुए घर के मुख्य द्वार पर बांध दें। इसके बाद बहनें भाइयों को कुल परंपरानुसार आरती कर तिलक निकालें तथा मिठाई खिलाकर दाहिने हाथ में रक्षा सूत्र (राखी) बांधें तथा शगुन स्वरूप रूमाल इत्यादि भेंट करें। भाई भी अपनी शक्ति के अनुसार बहनों को उपहार दें। इस प्रकार रक्षा बंधन का पर्व मनाने से घर में खुशहाली आती है।

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