फिर से ड्यूटी पर लौट आया 'चीता', पिछले साल दुश्मनों की 9 गोलियों से हुआ था बदन छलनी

Published Date 2018/03/20 03:58, Written by- FirstIndia Correspondent

श्रीनगर। पिछले साल 14 फरवरी को बांदीपोरा में आर्मी सर्च ऑपरेशन के दौरान छिपे हुए आतंकवादियों ने गोलीबारी शुरू कर दी थी, लेकिन चेतन कुमार चीता इससे बिल्कुल भी नहीं घबराए और डटकर आतंकवादियों का सामना किया था। 45वीं बटालियन का नेतृत्व कर रहे चेतन को दुश्मनों की 9 गोलियां खाकर भी मौत से जीत हासिल करना किसी चमत्कार से कम नहीं है।

चेतन कुमार के शरीर को आतंकवादियों ने 14 फरवरी 2017 के दिन छलनी कर दिया था और वो बुरी तरह घायल भी हो गए थे। लेकिन मौत से लड़कर एक बार फिर ड्यूटी पर वापस आ गए हैं। खबरों के मुताबिक, उन्होंने कहा है कि, 'ड्यूटी पर लौटकर मुझे गर्व महसूस हो रहा है और मुझे बहुत खुशी है।' चीता के अनुसार खाकी वर्दी ही उनकी दूसरी त्वचा है।

15 अगस्त को दूसरा सबसे बड़ा गैलेंट्री अवॉर्ड कीर्ति चक्र हासिल करने वाले चेतन कुमार  ने पिछले सप्ताह दिल्ली स्थित सीआरपीएफ के मुख्यालय में ज्वॉइनिंग की है और उन्होंने कहा कि देश कि युवा पीढ़ी को भी अपने देश के लिए 100 फीसदी योगदान दें। यही मैंने भी किया। मैं चाहता तो उस वक्त वहां से भाग भी सकता था, लेकिन मैं डटा रहा और गोलियों का सामना किया।

चेतन कुमार ने अपने शब्दों में कहा कि, 'जम्मू कश्मीर में स्थिति को सामान्य होने में अभी समय लगेगा। एक जवान आदमी अपना फर्ज निभा सकता है और इच्छा शक्ति ही वहां कि स्थिति सुधार सकती है। चीता ने यह भी बताया कहा, 'मेरी फिजियोथेरेपी अभी भी चल रही है और मैं फिट होने की कोशिश कर रहा हूं। अगर मेरा देश और फोर्स चाहेगी तो एक बार फिर मैं फील्ड पर जाकर सर्च ऑपरेशन करूंगा। मुझे कोई परेशानी नहीं है।'

बता दें कि आतंकवादियों के साथ हुई मुठभेड में चेतन कुमार ने अपनी एक आंख गवां दी और उनका हाथ भी बुरी तरह जख्मी हो गया था। उस वक्त चेतन की हालत को देखते हुए उनके पूरी तरह से ठीक होने में करीब दो साल का समय लगने का अनुमान लगाया जा रहा ​था, लेकिन चेतन ने एक साल में ही खुद को पूरी तरह से मजबूत कर लिया है।  चीता ने सीआरपीएफ के निदेशालय में जॉइन किया है। फिलहाल वह पोस्टिंग का इंतजार कर रहे हैं।

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