वहीं हिमाचल में चुनाव जीतने वाले नेताओं ने भी अपनी दावेदारी पेश करना शुरू कर दिया है। वरिष्ठ नेता जयराम ठाकुर ने कहा कि पार्टी जो जिम्मेदारी देगी, वह उसे पूरा करने को तैयार हैं। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा की दावेदारी भी स्वाभाविक है, लेकिन चर्चा यह भी है कि हरियाणा की तर्ज पर बीजेपी यहां बैकडोर से अजय जम्वाल पर दांव खेल सकती है। जम्वाल संघ से जुड़े रहे हैं और फिलहाल पूर्वोत्तर में पार्टी संगठन का काम संभाल रहे हैं।

बताया जा रहा कि हिमाचल में अगले दो दिन में बीजेपी की विधायक दल की बैठक होने वाली है। पार्टी आलाकमान ने तीन वरिष्ठ नेताओं जयराम ठाकुर, डॉ. राजीब बिंदल और विपिन परमार को दिल्ली बुलाया है। सोमवार देर शाम संसदीय बोर्ड की बैठक के बाद बीजेपी ने घोषणा की है कि रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण और केंद्रीय मंत्री नरेंद्र तोमर हिमाचल का दौरा करेंगे और वहां नेताओं की राय जानने की कोशिश करेंगे। उसके बाद सीएम के नाम की घोषणा होगी। 

वहीं दूसरी ओर, गुजरात में मुख्यमंत्री पद को लेकर अटकलों का दौर तभी से शुरू हो चुका है, जब नतीजे आने से पहले उपमुख्यमंत्री नितिन पटेल ने कहा कि मुख्यमंत्री का फैसला विधायक दल की बैठक में होगा। उनके इस बयान को उनकी मुख्यमंत्री पद पर दावेदारी के रूप में देखा गया। हालांकि नेता चुनने की औपचारिकता विधायक दल की बैठक में ही पूरी की जाती है, लेकिन चूंकि चुनाव रुपाणी के सीएम रहते लड़ा गया, ऐसे में माना जा रहा था कि जीत हासिल होने पर वही सीएम बनेंगे।

सूत्रों का कहना है कि इस बार पार्टी शुरू से कोई मजबूत और प्रभावी चेहरा मुख्यमंत्री के तौर पर पेश करना चाहती है। अटकलें यह भी हैं कि किसी बड़े नेता को केंद्र से गुजरात भेजा सकता है। हालांकि सोमवार को हुई संसदीय बोर्ड की बैठक के बाद पार्टी की ओर से ऐसा कोई संकेत नहीं मिला है।

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हिमाचल में लगभग तय हुआ सीएम का नाम, गुजरात पर अभी भी सस्पेंस बरकरार

Published Date 2017/12/19 12:38,Updated 2017/12/19 12:44, Written by- FirstIndia Correspondent

नई दिल्ली। गुजरात और हिमाचल प्रदेश चुनावों के नतीजों में भाजपा को मिली शानदार जीत के बाद अब इस बात को लेकर कवायद शुरू हो गई है कि इन दोनों राज्यों में पार्टी का मुख्यमंत्री कौन होगा। दोनों राज्यों में बनने वाले मुख्यमंत्री के चेहरों पर अब सबकी निगाहें टिकी है और राजनीतिक गलियारों से लेकर आमजन में इस बात की चर्चाएं होने लगी है। दरअसल, हिमाचल प्रदेश में भाजपा के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार प्रेम कुमार धूमल खुद चुनाव हार चुके हैं। जबकि गुजरात में विजय रुपाणी एक फिर से मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालेंगे या नहीं इस बारे में अभी कुछ स्पष्ट नहीं है। 

हालांकि अक्सर सामने आया है कि भाजपा जिस किसी भी राज्य में चुनाव जीतती हैं, वहां ऐसा चेहरा मुख्यमंत्री के रूप में सामने आता है, जिसके बारे में किसी ने शायद ही सोचा हो। सूत्रों के मुताबिक, ये भी हो सकता है कि दोनों राज्यों में भाजपा लोगों को कोई सरप्राइज भी दे सकती है। भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री अनंत कुमार का कहना है कि, पार्टी फैसला करेगी कि गुजरात और हिमाचल में कौन मुख्यमंत्री बनेंगे।

हिमाचल में मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार प्रेम कुमार धूमल खुद चुनाव हार चुके हैं। वहीं उनके साथ ही प्रदेश अध्यक्ष सतपाल सिंह सत्ती, पूर्व मंत्री रवींद्र सिंह रवि, गुलाब सिंह ठाकुर (धूमल के समधी), इंदू गोस्वामी और रणधीर शर्मा भी जीत नहीं पाए। ऐसे में पार्टी के पास विकल्प कम बचे हैं। इन सबके बीच भाजपा को यहां मुख्यमंत्री का चेहरा तय करने में काफी माथापच्ची करनी होगी। 

वहीं हिमाचल में चुनाव जीतने वाले नेताओं ने भी अपनी दावेदारी पेश करना शुरू कर दिया है। वरिष्ठ नेता जयराम ठाकुर ने कहा कि पार्टी जो जिम्मेदारी देगी, वह उसे पूरा करने को तैयार हैं। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा की दावेदारी भी स्वाभाविक है, लेकिन चर्चा यह भी है कि हरियाणा की तर्ज पर बीजेपी यहां बैकडोर से अजय जम्वाल पर दांव खेल सकती है। जम्वाल संघ से जुड़े रहे हैं और फिलहाल पूर्वोत्तर में पार्टी संगठन का काम संभाल रहे हैं।

बताया जा रहा कि हिमाचल में अगले दो दिन में बीजेपी की विधायक दल की बैठक होने वाली है। पार्टी आलाकमान ने तीन वरिष्ठ नेताओं जयराम ठाकुर, डॉ. राजीब बिंदल और विपिन परमार को दिल्ली बुलाया है। सोमवार देर शाम संसदीय बोर्ड की बैठक के बाद बीजेपी ने घोषणा की है कि रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण और केंद्रीय मंत्री नरेंद्र तोमर हिमाचल का दौरा करेंगे और वहां नेताओं की राय जानने की कोशिश करेंगे। उसके बाद सीएम के नाम की घोषणा होगी। 

वहीं दूसरी ओर, गुजरात में मुख्यमंत्री पद को लेकर अटकलों का दौर तभी से शुरू हो चुका है, जब नतीजे आने से पहले उपमुख्यमंत्री नितिन पटेल ने कहा कि मुख्यमंत्री का फैसला विधायक दल की बैठक में होगा। उनके इस बयान को उनकी मुख्यमंत्री पद पर दावेदारी के रूप में देखा गया। हालांकि नेता चुनने की औपचारिकता विधायक दल की बैठक में ही पूरी की जाती है, लेकिन चूंकि चुनाव रुपाणी के सीएम रहते लड़ा गया, ऐसे में माना जा रहा था कि जीत हासिल होने पर वही सीएम बनेंगे।

सूत्रों का कहना है कि इस बार पार्टी शुरू से कोई मजबूत और प्रभावी चेहरा मुख्यमंत्री के तौर पर पेश करना चाहती है। अटकलें यह भी हैं कि किसी बड़े नेता को केंद्र से गुजरात भेजा सकता है। हालांकि सोमवार को हुई संसदीय बोर्ड की बैठक के बाद पार्टी की ओर से ऐसा कोई संकेत नहीं मिला है।

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