30 हजार से ज्यादा वोटों से हारने वाले कांग्रेस नेताओं के टिकट पर संकट!

Published Date 2018/05/08 07:16,Updated 2018/05/09 12:56, Written by- Dinesh Kumar Dangi

जयपुर  (दिनेश डांगी)। विधानसभा चुनाव नजदीक आते देखकर कांग्रेस में कईं नेता और दावेदार भारी अंतर से चुनाव हारने वाले नेताओं को टिकट नहीं देने की वकालत करने लगे हैं। एंटनी कमेटी की सिफारिशों को लागू करने का हवाला देते हुए 30 हजार वोटों से ज्यादा हारने वाले को अब मौका नहीं देने की खुलकर पैरवी करना भी शुरु कर दिया है। अगर फार्मूला लागू होता है तो फिर करीब 50 नेताओं की टिकट पर संकट मंडरा जाएगा। करारी हार झेल चुके नेताओं में सालेह मोहम्मद, अमीन खान, गंगाजल मील, भगवना सहाय सैनी, अर्चना शर्मा, संजय बाफना, दुर्रु मियां, रामविलास चौधरी, बीना काक और दिलील चौधरी जैसे प्रमुख नेताओं के नाम हैं।

राजस्थान विधानसभा चुनाव में अब महज 6 माह का समय शेष बचा है। लिहाजा, हर कोई अब टिकट पाने की तिकड़म में जुट गया है। इसके लिए दावेदार जयपुर से लेकर दिल्ली तक नेताओं के धोक लगाने में जुट गए हैं। वहीं कईं नेताओं ने टिकट वितरण में नए फार्मूलों का इस्तेमाल करने की डिमांड पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से करना शुरु कर दिया, जिससे कि उनका फार्मूले की जद में आने से टिकट कट जाए और खुद का नंबर आ जाए। 

इन दिनों कांग्रेस गलियारों में एंटनी कमेटी की कईं सिफारिशों को खोद खोदकर निकाला जा रहा है। इसमें एक सिफारिश 20 हजार मतों से ज्यादा वोटों से हारे नेताओं को टिकट नहीं देने की भी थी, लेकिन यह सिफारिश लागू होना बेहद मुश्लिक है। क्योंकि पिछली बार मोदी लहर में कईं दिग्गज धराशायी हो गए थे।

ऐसे में सूत्रों की मानें तो पार्टी आलाकमान 20 हजार की जगह 30 हजार वोटों से ज्यादा हारने वाले नेताओं को टिकट नहीं देने का प्रयोग इस बार कर सकती है। राहुल गांधी इसको लेकर कईं बैठकों में गंभीरता से मंथन भी कर चुके हैं। गौरतलब है कि पिछले चुनाव में करीब 50 नेता ऐसे हैं, जो कि 30 हजार से ज्यादा वोटों से चुनाव हारे थे।

हारने वालों में ये बड़े नाम हैं शुमार :

नाम

विधानसभा क्षेत्र

अंतर

दुर्रु मियां    

तिजारा

40,000

बीना काक

सुमेरपुर

42,643

दिलीप चौधरी

जैतारण

34,874

ओम जोशी

फलौदी

34,171

गंगाजल मील

सूरतगढ़

32,593

रमेश खंडेलवाल

नीमकाथाना

34,202

भगवानसहाय सैनी

चौमूं

44,473

शालेह मोहम्मद

पोकरण

34,444

अमीन खां    

शिव

30,913

गंगाबेन गरासिया

पिंडवाड़ा, माउंटआबू

30,855

रतन देवासी

रानीवाड़ा

32,652

पंकज मेहता

कोटा साउथ

49,439

करण सिंह

छबड़ा

62 हजार

मीनाक्षी चंद्रावत

झालरापाटन

60,896

अर्चना शर्मा

मालवीय नगर

48,718

संजय बाफना

सांगानेर

62,832

विक्रम सिंह

विधाधर नगर

37,913

नसीम अख्तर

पुष्कर

41,290

इन प्रमुख नेताओं के अलावा डग से मदनलाल, खानपुर से संजय गुर्जर, अलवर शहर से नरेन्द्र शर्मा, बीकानेर पूर्व से गोपाल गहलोत और भादरा से जयदीप डूडी को भी 30 हजार से ज्यादा हार का मुंह देखना पड़ा था। ये नेता जहां से चुनाव लड़े थे, वहां से अन्य दावेदार इनके भारी अंतर से हारने को अब अपनी टिकट की दावेदारी में हथियार की तरह पेश कर रहे हैं।

हालांकि भारी मतों से हारे नेता दबी जुबान और बंद कमरों में पिछली बार मोदी लहर चलने औऱ कईं दिग्गजों के चुनाव हारने जैसी बचाव में दुहाई पेश करते हुए नेतृत्व को मनाने में जुटा हुआ है, लेकिन फार्मूला लागू करने की पैरवी कर रहे नेता कह रहे हैं कि दो से ढाई लाख मतदाता वाली सीटों पर ये 30 हजार से हार गए तो फिर दोबारा मौका देने पर कैसे तीर मार लेंगे।

हालांकि चुनावी मैदान में तत्काल क्या समीकरण और स्थितियां बनती है, यह मतदान से दस दिन पहले तक निर्भर करता है। लेकिन विरोधियों और दावेदारों की इस बात में भी दम है कि वो 30 हजार के अंतर को कैसे पाट पाएगा। क्योंकि इतनी बड़ी हार से यह साबित हो चुका है कि जनता उसे कतईं पसंद नहीं करती। बात फार्मूले को लागू करने की संभावना की करें तो राहुल गांधी ने गुजरात और कर्नाटक में टिकट वितरण में कईं प्रयोग किए हैं। ऐसे में संभावना पूरी दिख रही है कि राहुल एक-दो अपवाद को छोड़कर इस प्रयोग पर इस बार मुहर लगा सकते हैं।

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