Exclusive : अंतरराष्ट्रीय सीमा के नजदीक धार्मिक स्थलों के निर्माण की आड में सीमा सुरक्षा को खतरा

Published Date 2018/01/03 04:09,Updated 2018/01/04 05:30, Written by- Suryaveer Singh Tanwar
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जैसलमेर। सीमावर्ती इलाके जैसलमेर में भारत-पाक सीमा के निकट सम व अन्य इलाकों में नियम विरुद्ध सुनियोजित तरीके से एक समुदाय विशेष द्वारा बड़े पैमाने पर हो रहे अवैध धार्मिक निर्माण राष्ट्र की सुरक्षा के लिये खतरा बनते जा रहे हैं। बगैर अनुमति व बेरोकटोक हो रहे इन निर्माण कार्यों के संबंध में सीमा सुरक्षा बल व सीमाजन कल्याण समिति ने चिन्ता व्यक्त करते हुए कहा है कि यह निर्माण राष्ट्र की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकते हैं। 

ऐसे में निर्माणों के बीच खासकर शाहगढ़ बल्ज क्षेत्र में भारत पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय सीमा से मात्र 3 किलोमीटर दूरी पर हुए एक वृहद धार्मिक निर्माण है। यहां पर प्रतिवर्ष हजारों की तादात में जुटने वाले लोगों में कुख्यात तस्करों व राष्ट्रविरोधी तत्वों के आने की संभावना के मुद्देनजर कुछ दिन पूर्व सीमा सुरक्षा बल ने यह मामला लीड इंटेलीजेंस की बैठक में प्रमुखता से उठाया। इसके साथ ही जिला कलेक्टर को भी इस संबंध में सूचित किया गया है। इसके अलावा सीमाजन कल्याण समिति ने मुख्यमंत्री को सीमाई इलाकों में हो रहे इस धार्मिक निर्माणों के संबंध में पत्र भी लिखा है।

जिले की सीमावर्ती हरनाउ ग्राम पंचायत के मांधला इलाके जो कि सीमा से महज 3 किलोमीटर दूर है, वहां पिछले कुछ सालों में बने एक समुदाय विशेष के धार्मिक स्थल पर पिछले दिनों नये निर्माण कार्य करवाये जाकर उसका विस्तार किया जा रहा था। जिला प्रशासन को जानकारी मिलने के बाद प्रशासन ने उपखंड़ अधिकारी व तहसीलदार के साथ पुलिस को मौके पर भेजकर मामले की जांच करवाई। इसमें प्रथम दृष्टया निर्माणकार्य अवैध पाया गया, जिस पर प्रशासन द्वारा काम को तत्काल रूकवाने का नोटिस जारी किया गया।

जिला कलेक्टर केसी मीणा ने बताया कि किसी भी धार्मिक स्थल पर निर्माण करने से पहले जिला कलक्टर से अनुमति लेनी होती है, लेकिन भारत—पाक सीमा पर हो रहे इस निर्माण कार्य के लिये किसी प्रकार की कोई अनुमति नहीं ली गई थी। लिहाजा, निर्माण कार्य को बंद करवा कर संबंधित व्यक्तियों को आगे निर्माण नहीं करने के लिये पाबंद भी किया गया है। 

जिला कलेक्टर ने यह भी बताया कि इस धार्मिक स्थल पर हो रहा निर्माण कार्य महात्मा गांधी नरेगा योजना के तहत किये जाने की बात भी सामने आई है। उन्होंने बताया कि ग्राम पंचायत द्वारा नरेगा में कब्रिस्तान की चारदीवारी के नाम से कार्य स्वीकृत करवाया गया था और उसके एवज में इस धार्मिक स्थल पर धर्मशाला जैसा परिसर बनाने का कार्य मौके पर किया जा रहा था। उपखंड़ अधिकारी और तहसीलदार को इस पूरे मामले की जांच सौंपी गई, जिसमें कार्य की स्वीकृति से लेकर मौके पर हो रहे गलत निर्माण कार्य में कौन लोग शामिल है, इसकी जांच की जायेगी और जांच रिपोर्ट आने के बाद जिम्मेदारों के खिलाफ कार्यवाही भी अमल में लाई जायेगी। 

गौरतलब है कि सीमा सुरक्षा बल ने भी सम व अन्य सीमावर्ती इलाकों में हो रहे निर्माणों का मुद्दा गत दिनों सभी सुरक्षा व खुफिया एजेंसियों की समन्वय बैठक लीड इंटेलीजेन्स एजेन्सी की बैठक में उठाया था। इस बैठक में बीएसएफ द्वारा बताया गया कि खासकर सम के सीमाई इलाकों में जान—बूझकर सरकार भूमि पर कब्जा कर वहां पर अवैध धार्मिक निर्माण करने का सुनियोजित तरीका अपनाया जा रहा है। इन क्षेत्रों में सड़क के दोनों तरफ कुछ क्षेत्र को पहले तारबंदी से घेरा जाता है, बाद में वहां से गुजरने वाले वाहनों द्वारा पत्थर फेंके जाते है। फिर धीरे धीरे विशेष प्रकार का धार्मिक निर्माण शुरू हो जाता हैं और उस पर बाकयदा बोर्ड लगा दिए जाते हैं।

उल्लेखनीय है कि इस धार्मिक संस्थान पर हर 3—4 महिनों में एक विशेष समुदाय के हजारों लोग उमड़ते हैं तथा सैकड़ों गाड़ियां वहां पर बीएसएफ के 2—2 गेट से गुजरते हुए पहुंचती है। सीमा के बिल्कुल समीप इतनी बड़ी तादात में जमावड़े पर स्थानीय खुफिया व सुरक्षा एजेंसियों ने अपनी चिन्ता व्यक्त की है तथा केन्द्र सरकार को अपनी रिपोर्ट में भी इस संबंध में जानकारी दी है। इसमे बताया गया है कि यह धार्मिक निर्माण देश की सुरक्षा के लिये खतरा उत्पन्न कर सकते हैं। और तो और, इस भव्य निर्माण पर करोड़ों रुपए की राशि खर्च की गई है। ऐसे में आखिर सवाल यह उठता है कि इतनी बड़ी राशि कहां से लाई गई।

वहीं दूसरी ओर, सीमाजन कल्याण समिति के प्रतिनिधि मंडल ने जिला कलेक्टर के माध्यम से राज्य की मुख्यमंत्री को पत्र प्रेषित कर सीमावर्ती जिलों में सुरक्षा को दृष्टिगत रखते हुए निर्धारित नियमों के हो रहे उल्लंघन से अवगत कराते हुए आतंरिक व सीमा सुरक्षा को लेकर तैयार प्रस्तावों की स्वीकृति का आग्रह किया है। समिति के जिला मंत्री शरद व्यास ने बताया कि पश्चिमी राजस्थान की 1044 किलोमीटर की पाकिस्तान से सटी अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित घुसपैठिये, जासूसी और अन्य राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में बढ़ोतरी हो रही है। गत डेढ़ साल में पाकिस्तान को हमारी सामरिक सूचनाएं भेजते हुए करीब 52 जासूस और पुराने तस्कर सीमा क्षेत्रों में पकड़े जा चुके हैं।

इस मामले में जैसलमेर पुलिस अधीक्षक गौरव यादव का कहना है कि उनके पास खुफिया एजेंसियों से रिपोर्ट आई थी कि सीमा क्षेत्र में धार्मिक स्थल के नाम पर अवैध निर्माण कार्य हो रहा है। इस पर जिला प्रशासन के निर्देशन में कार्यवाही करते हुए उस निर्माण कार्य को फिलहाल रूकवा दिया गया है और संबंधित लोगों को पाबंद भी किया गया है। उन्होंने माना कि प्रथम दृष्टया जिस तरह से निर्माण हो रहा था, वह अवैध लग रहा था। बाकी जांच रिपोर्ट आने के बाद ही इस पर आगे की कार्यवाही की जायेगी।

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