वहीं गुजरात में बैंकों और एटीएम में नकदी की किल्लत के कारण लोगों की मुश्किलें थमने का नाम नहीं ले रही हैं। कुछ दिन पहले उत्तर गुजरात में पैदा हुए इस संकट ने अब लगभग पूरे राज्य में अपना पैर पसार लिये हैं। ऐसे में एटीएम में कैश की कमी के चलते लोगों को एक बार फिर से नोटबंदी जैसे हालात का सामना करना पड़ रहा है। 

वहीं किल्लत के चलते कई बैंकों ने एटीएम से नकदी निकालने की सीमा तय कर दी है, जबकि अधिकतर एटीएम में पैसा हीं नहीं है। गुजरात के महेसाणा, पाटन, साबरकांठा, बनासकांठा, मोडासा के अलावा अहमदाबाद, वडोदरा, सूरत जैसे बड़े शहरों में भी नकदी संकट बना हुआ है।

बताया जा रहा है कि बैंकों में बढ़ते एनपीए ने बैंकिंग प्रणाली को हिला कर रख दिया है और बैंकों की साख पर सवाल खड़ा हो गया है। इन्हें उबारने के लिए खातों में जमा रकम के इस्तेमाल की अटकलों ने ग्राहकों को डरा दिया है। ऐसे में पैसा निकालने की प्रवृत्ति एकाएक बढ़ गई है और एटीएम पर दबाव चार गुना तक बढ़ गया है।

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एटीएम में कैश की किल्लत से कई शहरों में बने नोटबंदी जैसे हालात

Published Date 2018/04/17 11:59,Updated 2018/04/17 12:44, Written by- FirstIndia Correspondent

नई दिल्ली। एटीएम मशीनों में कैश की किल्लत के चलते देशभर के कई शहरों में एक बार फिर से नोटबंदी के समय में उपजे हालात दिखाई दे रहे हैं। देश की राजधानी दिल्ली में भी कमोबेश ऐसी ही स्थिति बनी हुई है, जहां कुछ एटीएम में कैश निकालने के लिए पहुंचने वाले लोगों को खाली हाथ ही लौटना पड़ रहा है। वहीं कई एटीएम मशीनों में से कैश नहीं मिलने के बावजूद लोगों के मोबाइल पर पैसे निकाले जाने तक के मैसेज आ रहे हैं। कैश की किल्लत को देखते कुछ जगहों पर एटीएम में कैश निकासी की सीमा तय कर दी गई है।

गौरतलब है कि हाल ही में कुछ दिन पहले ही आरबीआई ने वित्त मंत्रालय को एटीएम में कैश की किल्लत की समस्या को दूर करने के निर्देश दिए थे। आरबीआई का कहना है कि एटीएम में कैश भरने के लिए बैंकों को पर्याप्त कैश उपलब्ध कराया जा रहा है। ऐसे में एटीएम में कैश की उपलब्धता सुनिश्चित की जानी चाहिए। माना जा रहा है कि 200 रुपए के नए नोट चलन में आने के बाद एटीएम में उसको डालने में आ रही परेशानी भी कैश किल्लत का एक कारण हो सकता है।

खबरों के मुताबिक, देश की राजधानी ​दिल्ली के साथ ही उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार, झारखंड, मध्यप्रदेश से लेकर गुजरात तक के कई शहरों में एटीएम में कैश की किल्लत नजर आ रही है। वहीं दूसरी ओर, वित्त राज्यमंत्री का कहना है कि कैश की कोई किल्लत नही हैं, ये अलग बात है कि कहीं कम है तो कहीं ज़्यादा है। इसके साथ ही उन्होंने अगले 2-3 दिनों में सब कुछ ठीक होने की बात भी कही है।

उत्तर बिहार के ज्यादातर बैंकों में कैश की किल्लत के कारण शहरों से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बिहार के मुजफ्फरपुर के बैंकों के करेंसी चेस्टों से समस्तीपुर, दरभंगा, गोपालगंज, सारण, सीवान, पूर्वी व पशिचमी चंपारण को नकदी दी जाती है। पिछले डेढ़ माह से इन जिलों में कैश की आपूर्ति नहीं हो रही है। इस कारण यहां भी कैश संकट गहरा गया है।

वहीं गुजरात में बैंकों और एटीएम में नकदी की किल्लत के कारण लोगों की मुश्किलें थमने का नाम नहीं ले रही हैं। कुछ दिन पहले उत्तर गुजरात में पैदा हुए इस संकट ने अब लगभग पूरे राज्य में अपना पैर पसार लिये हैं। ऐसे में एटीएम में कैश की कमी के चलते लोगों को एक बार फिर से नोटबंदी जैसे हालात का सामना करना पड़ रहा है। 

वहीं किल्लत के चलते कई बैंकों ने एटीएम से नकदी निकालने की सीमा तय कर दी है, जबकि अधिकतर एटीएम में पैसा हीं नहीं है। गुजरात के महेसाणा, पाटन, साबरकांठा, बनासकांठा, मोडासा के अलावा अहमदाबाद, वडोदरा, सूरत जैसे बड़े शहरों में भी नकदी संकट बना हुआ है।

बताया जा रहा है कि बैंकों में बढ़ते एनपीए ने बैंकिंग प्रणाली को हिला कर रख दिया है और बैंकों की साख पर सवाल खड़ा हो गया है। इन्हें उबारने के लिए खातों में जमा रकम के इस्तेमाल की अटकलों ने ग्राहकों को डरा दिया है। ऐसे में पैसा निकालने की प्रवृत्ति एकाएक बढ़ गई है और एटीएम पर दबाव चार गुना तक बढ़ गया है।

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