एसओजी के एडीजी उमेश मिश्रा ने बताया कि इस गिरोह ने बजाज इंश्योरेंस कम्पनी से 12 लाख रुपए और जीवन ज्योति बीमा योजना और प्रधानमंत्री जीवन सुरक्षा योजना के तहत 4 लाख रुपए का क्लेम उठा लिया था। इस तरह 16 लाख रुपए का क्लेम उठाने के बाद अन्य बीमा कम्पनियों से भी इंश्योरेंस का क्लेम उठाना था। क्लेम पास करने से पहले जब दूसरी कम्पनी का इन्वेस्टिगेटर घटना का सत्यापन करने के लिए थाने पहुंचा तो पता चला कि इस तरह की कोई घटना हुई ही नहीं थी।

इस फर्जीवाड़े की जांच डीआईजी संजय श्रोत्रिय के नेतृत्व में एडिशनल एसपी करण शर्मा ने शुरु की तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। जांच में पता चला कि इस पूरे षड़यंत्र में बजाज इंश्योरेंस कम्पनी के पदाधिकारी, यूनियन बैंक के कर्मचारी, सरकारी डॉक्टर, वकील और एक पुलिस अधिकारी भी शामिल है। इंश्योरेंस कम्पनी का इन्वेस्टिगेटर रघुराज सिंह और यश चौहान, बैंक मैनेजर राजेश कुमार, वकील चतुर्भुज मीणा, सरकारी डॉक्टर सतीश और थानेदार रमेश चंद ने ये षड़यंत्र रचा था। फर्जीवाड़े के सबूत जुटाने के बाद एसओजी ने इन सब को गिरफ्तार कर लिया।

डीआईजी संजय श्रोत्रिय ने बताया कि जिस जितेन्द्र सिंह को मृत बताकर फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए। उसकी बीमा क्लेम की 70 लाख रुपए हड़पने की योजना बनाई गई थी। बजाज इंश्योरेंस के साथ बिड़ला सनलाइफ, बजाज एलियांज, एगोन रेलिगेयर और आईएनजी वैश्य बैंक से भी फर्जी तरीके से क्लेम उठाने का षड़यंत्र था, लेकिन बिड़ला सन लाइफ के इन्वेस्टिगेटर द्वारा घटना का सत्यापन कराए जाने के दौरान इस प्रकरण का फर्जीवाड़ा सामने आ गया। इस प्रकरण में मृत बताया गया जितेन्द्र दिल्ली में ऑटो चलाता है। जितेन्द्र और उसकी पत्नी सुधा के साथ अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी होना बाकी है।

इस गिरोह ने जिन्दा जितेन्द्र की दुर्घटना में मौत होना बताया था। जिस दिन दुर्घटना कारित होना बताया, उसी दिन सरकारी डॉक्टर से फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार करवाई गई और एक थानेदार द्वारा रोजनामचे में रपट डलवाई गई। गौर करने वाली बात यह भी है कि जितेन्द्र का मृत्यु प्रमाण पत्र भी उसी दिन जारी करवा लिया गया था। इस प्रकरण में और भी पुलिसकर्मियों के लिप्त होने की बात सामने आई है, जिनके बारे में एसओजी के अधिकारी जांच कर रहे हैं।

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जिंदा व्यक्ति की मृत बता कर इश्योरेंस क्लेम उठाने वाले गिरोह का पर्दाफाश

Published Date 2018/02/09 08:01, Written by- Ramswaroop Lamror

जयपुर। राजस्थान पुलिस की स्पेशल शाखा एसओजी ने एक और बड़ा खुलासा किया है। जिन्दा व्यक्ति को मृत बता कर फर्जी इश्योरेंस क्लेम उठाने वाले एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है। हैरानी की बात यह है कि इस गिरोह में बैंक कर्मचारी, वकील, इन्वेस्टिगेटर, सरकारी डॉक्टर और पुलिस अधिकारी भी शामिल थे। इस मामले में छह आरोपी पुलिस के हत्थे चढ़ चुके हैं, जिनसे पूछताछ में और भी चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं।

किसी आपराधिक षड़यंत्र में अगर कई विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत होती है तो उसका पता लगाना काफी मुश्किल होता है। लेकिन लालच में वे कुछ गलतियां कर ही जाते हैं, जिसके बाद उन्हें अपनी करनी का फल भुगतना पड़ता है। ऐसा ही एक गिरोह एसओजी के शिकंजे में आया है, जिसमें बैंककर्मी, वकील, सरकारी डॉक्टर और पुलिस अधिकारी शामिल है। ये गिरोह इंश्योरेंस कम्पनियों से फर्जी बीमा क्लेम उठाते थे।

मामला दौसा के कोतवाली थाने का है, जहां जितेन्द्र नाम के एक शख्स के जिन्दा होते हुए भी उसे मृत बताकर एक इश्योरेंस कम्पनी से 12 लाख रुपए का क्लेम उठा लिया गया। दूसरी बीमा कम्पनियों से भी बीमा क्लेम उठाने वाले थे, लेकिन दूसरी कम्पनी के इन्वेस्टिगेटर द्वारा घटना का सत्यापन करवाने के दौरान इस प्रकरण का फर्जीवाड़ा सामने आ गया। इस फर्जीवाड़े की जांच एसओजी को सौंपी गई तो सारा माजरा सामने आ गया।

एसओजी के एडीजी उमेश मिश्रा ने बताया कि इस गिरोह ने बजाज इंश्योरेंस कम्पनी से 12 लाख रुपए और जीवन ज्योति बीमा योजना और प्रधानमंत्री जीवन सुरक्षा योजना के तहत 4 लाख रुपए का क्लेम उठा लिया था। इस तरह 16 लाख रुपए का क्लेम उठाने के बाद अन्य बीमा कम्पनियों से भी इंश्योरेंस का क्लेम उठाना था। क्लेम पास करने से पहले जब दूसरी कम्पनी का इन्वेस्टिगेटर घटना का सत्यापन करने के लिए थाने पहुंचा तो पता चला कि इस तरह की कोई घटना हुई ही नहीं थी।

इस फर्जीवाड़े की जांच डीआईजी संजय श्रोत्रिय के नेतृत्व में एडिशनल एसपी करण शर्मा ने शुरु की तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। जांच में पता चला कि इस पूरे षड़यंत्र में बजाज इंश्योरेंस कम्पनी के पदाधिकारी, यूनियन बैंक के कर्मचारी, सरकारी डॉक्टर, वकील और एक पुलिस अधिकारी भी शामिल है। इंश्योरेंस कम्पनी का इन्वेस्टिगेटर रघुराज सिंह और यश चौहान, बैंक मैनेजर राजेश कुमार, वकील चतुर्भुज मीणा, सरकारी डॉक्टर सतीश और थानेदार रमेश चंद ने ये षड़यंत्र रचा था। फर्जीवाड़े के सबूत जुटाने के बाद एसओजी ने इन सब को गिरफ्तार कर लिया।

डीआईजी संजय श्रोत्रिय ने बताया कि जिस जितेन्द्र सिंह को मृत बताकर फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए। उसकी बीमा क्लेम की 70 लाख रुपए हड़पने की योजना बनाई गई थी। बजाज इंश्योरेंस के साथ बिड़ला सनलाइफ, बजाज एलियांज, एगोन रेलिगेयर और आईएनजी वैश्य बैंक से भी फर्जी तरीके से क्लेम उठाने का षड़यंत्र था, लेकिन बिड़ला सन लाइफ के इन्वेस्टिगेटर द्वारा घटना का सत्यापन कराए जाने के दौरान इस प्रकरण का फर्जीवाड़ा सामने आ गया। इस प्रकरण में मृत बताया गया जितेन्द्र दिल्ली में ऑटो चलाता है। जितेन्द्र और उसकी पत्नी सुधा के साथ अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी होना बाकी है।

इस गिरोह ने जिन्दा जितेन्द्र की दुर्घटना में मौत होना बताया था। जिस दिन दुर्घटना कारित होना बताया, उसी दिन सरकारी डॉक्टर से फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार करवाई गई और एक थानेदार द्वारा रोजनामचे में रपट डलवाई गई। गौर करने वाली बात यह भी है कि जितेन्द्र का मृत्यु प्रमाण पत्र भी उसी दिन जारी करवा लिया गया था। इस प्रकरण में और भी पुलिसकर्मियों के लिप्त होने की बात सामने आई है, जिनके बारे में एसओजी के अधिकारी जांच कर रहे हैं।

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