रोशनी के त्यौहार पर अपना ही नहीं, किसी और का भी कीजिए घर रोशन

FirstIndia Correspondent Published Date 2018/11/05 06:44

कोटा। धनतेरस के साथ ही शुरू हुई दीपोत्सव की धूम अब अगले पांच दिन रहेगी, लेकिन दीवाली पर इस उत्सव में अहम भागीदारी निभाने वाली सबसे अहम कड़ी चायनीज और इलेक्ट्रोनिक उपकरणों की भरमार से परेशान है। जी हां, हम बात कर रहे हैं उस कुम्हार की, जो मिट्टी के दीपकों को इस उम्मीद तैयार करता है कि वह दीवाली पर रोशन होंगे, लेकिन बदलते दौरे में मिट्टी के दीपकों को छोड़कर लोग इलेक्ट्रोनिक दीपकों की ओर आकर्षित हो रहे हैं।

चाक को घुमाकर मिट्टी से दीपक तैयार कर अपनी कला को उबारने में लगे कुम्हारों में आस है कि दिवाली पर उनके बनाए दिये लोगों के घरों को रोशन तो करेंगे ही, साथ ही साथ उनके भी घरों में दिवाली की रोशनी हो पाएगी। हर साल दिवाली से पूर्व मिट्टी के ढेर सारे दीये इस आस में बनाते हैं कि रोशनी के पर्व पर उनके बनाए ढेर सारे दीपक बिकेंगे और उन्हें अच्छी खासी कीमत भी मिलेगी, क्योंकि यह उत्सव दीपकों के बगैर अधूरा है। लेकिन अब इनकी कमर उस चायनीज और इलेक्ट्रोनिक दीपकों ने तोड़ दी हैं, जो बाजार में बड़ी तादाद में बिकने पहुंचे है।

बाजार में कई तरह के सजावटी एवं रोशनी के लिए इलेक्ट्रॉनिक सामान उपलब्ध होने के कारण अब इन कुम्हारों के पास कुछेक ही ग्राहक पहुंच पाते हैं। पिछले कुछ सालों में इलेक्ट्रोनिक दीपकों ने अपनी जड़ें कुछ इस तरह जमा ली है कि अब कुम्हारों के दीपक आधे भी नहीं बिक पाते हैं और ऐसे में उनकी उम्मीदों पर पानी फिर जाता है।

दूसरी ओर, कोटा के इलेक्ट्रोनिक बाजार में चायनीज दीपकों और रोशनी के लिये अन्य उपकरण खरीदने के लिये लोग उमड़ पड़े हैं। ऐसा ही नजारा कमोबेश अब देश के हर शहर में दिखाई देता है। मिट्टी के दीपकों की जगह आये यह चमचमाते आर्टिफिशियल दीपक लोगों को लुभा रहे हैं और अधिकर ग्राहक मिट्टी के दीपकों को छोड़कर इन्हें लेना पसंद कर रहे है,,,,लेकिन कुछ ग्राहकत ऐसे भी हैं, जो मिट्टी के दीपकों को अब भी बेस्ट मानते हैं। वहीं दुकानदार भी कह रहे हैं कि उन्होंने चायनीज उपकरणों को बेचने के बजाय स्वदेशी ब्रांड को ही महत्व दिया है।

दीपोत्सव पर असली खुशी उस वक्त होनी चाहिये, जब हर चेहरा खुश हो। ऐसे में फर्स्ट इंडिया भी आप गुजारिश करता है कि आप एक दिया मिट्टी का जरूर जलाएं, ताकि मिट्टी के दीपकों को भी उसी तरह से बाजार में जगह मिल सके, जैसा कि उसके लिए दिवाली का बाजार सजता है। इसके साथ ही मिट्टी से बने इन दियों को जब आप जलाएंगे तो निश्चित ही इनसे आपका घर तो रोशन होगी ही, साथ ही साथ उन दियों को बनाने वाले कुम्हारों के घरों में भी दिवाली की खुशियां दिखाई दे सकेगी।

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