अविश्वास प्रस्ताव को लेकर कलेक्टर की भूमिका पर संदेह

FirstIndia Correspondent Published Date 2018/06/27 05:31

सवाईमाधोपुर। सवाईमाधोपुर नगर परिषद सभापति डॉ. विमला शर्मा के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। अविश्वास प्रस्ताव को लेकर अब कलेक्टर की भूमिका पर संदेह उत्पन्न होने लगा है। चार पार्षदों द्वारा कलेक्टर को फर्जी हस्ताक्षर होने का पत्र सौंपने को लेकर पार्षदों ने अपना वीडियो जारी कर सवाल खड़े किए हैं कि पार्षद अविश्वास प्रस्ताव देने के बाद से भूमिगत है, तो फिर कैसे पत्र दे सकते हैं। वहीं पार्षदों के सवालों का जवाब कलेक्टर से देते नहीं बन रहा है। ऐसे में मामले में सभापति व कलेक्टर के बीच सांठगांठ की बू आने लगी है।

नगर परिषद सभापति के खिलाफ नाराज पार्षदों ने मोर्चा खोलते हुए 20 जून को 34 पार्षदों का हस्ताक्षरशुदा अविश्वास प्रस्ताव पत्र सौंपा था। इसके बाद 25 जून को कलेक्टर पीसी पवन ने चार पार्षदों द्वारा हस्ताक्षर फर्जी होने का पत्र देने के बाद संख्या बल कम होने के चलते अविश्वास प्रस्ताव प्रक्रिया बंद करने की बात कही थी। इसके बाद से राजनीतिक हल्कों में भूचाल आ गया। वहीं समाचार पत्र में खबर प्रकाशित होने के बाद सभापति को हटाने वाला ग्रुप भी हरकत में आ गया। उधर, नाराज पार्षदों ने कलेक्टर की कार्यप्रणाली पर सवालियां निशान लगाते हुए सभापति व कलेक्टर के बीच मिलीभगत का आरोप लगाया है।

पार्षद भूमिगत तो फिर कैसे आए अविश्वास प्रस्ताव के लेटर :
सभापति के खिलाफ मोर्चा खोले बैठे पार्षदों ने चार पार्षदों द्वारा फर्जी हस्ताक्षर होने का पत्र कलेक्टर के पास होने पर सवाल खड़े किए हैं। नाराज पार्षदों ने अपना वीडियो जारी कर बताया कि सारे के सारे पार्षद कलेक्टर को अविश्वास प्रस्ताव देने के बाद से सवाईमाधोपुर से बाहर भूमिगत हैं। ऐसे में कथित भाजपा के चार पार्षदों द्वारा अपने लेटर हेड पर फर्जी हस्ताक्षर होने की बात लिखकर देना सोच से परे है। जब अविश्वास प्रस्ताव में जिन पार्षदों के हस्ताक्षर हैं और वो भूमिगत हैं, तो उनमें से किसी पार्षद द्वारा किस प्रकार कलेक्टर को लिखित हस्ताक्षरशुदा लेटर हेड दिया जा सकता है।

20 जून को ही दे गए फर्जी हस्ताक्षर होने का लेटर हेड :
खबर के मुताबिक, कलेक्टर पीसी पवन की मानें तो पार्षद नरेश चौहला, मीना हरिजन, रविन्द्र गुर्जर व एक अन्य ने उन्हें अपने लेटर हेड पर 20 जून को ही लिखकर दे दिया कि उनके हस्ताक्षर फर्जी हैं। जबकि सारे पार्षद एक साथ अविश्वास प्रस्ताव पत्र कलेक्टर को देकर गाड़ियों में बैठकर चले गए थे। जब पार्षदों ने लिखकर नहीं दिया तो फिर हस्ताक्षरशुदा लेटर हेड किसके पास थे। किसने कलेक्टर को पार्षदों के फर्जी हस्ताक्षर होने के लेटर हेड कलेक्टर को सौंपे हैं। इससे किसको फायदा हो सकता है। यह तो जांच के बाद ही पता चलेगा।

नेता प्रतिपक्ष ने मांगे सीसीटीवी फुटेज :
सभापति विमला शर्मा के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पत्र देने वाले पार्षदों में से चार पार्षदों के फर्जी हस्ताक्षर होने का पत्र देने की बात कलेक्टर द्वारा कहने के बाद हरकत में आए नेता प्रतिपक्ष गिर्राज गुर्जर ने कलेक्टर से मुलाकात कर पार्षदों के आने के सीसीटीवी फुटेज मांगे। क्योंकि कलेक्टर कार्यालय में सीसीटीवी कैमरा लगा है। सीसीटीवी फुटेज में खुलासा हो जाएगा कि कब उक्त चार पार्षद कलेक्टर को फर्जी हस्ताक्षर होने का पत्र दे गए। इतना ही नहीं, प्रतिपक्ष के नेता ने उक्त चारों पार्षदों को कलेक्टर के सामने प्रस्तुत करने की बात भी कही है। नेता प्रतिपक्ष के सवालों का संतुष्टीपूर्ण जवाब कलेक्टर नहीं दे सके।

कलेक्टर-सभापति में गुप्त मंत्रणा :
अविश्वास प्रस्ताव के बाद कलेक्टर व सभापति के बीच गुप्त मंत्रणाओं का दौर जारी है। मंगलवार को भी सभापति व कलेक्टर के बीच कलेक्टर कार्यालय में करीब बीस मिनट तक गुप्त मंत्रणा हुई। इसके बाद सभापति वहां से चली गई। चार पार्षदों के कथित फर्जी हस्ताक्षर होने का पत्र कलेक्टर को सौंपा जाना तथा सभापति के साथ चल रही कलेक्टर की गुप्त मंत्रणा अविश्वास प्रस्ताव को ठंडे बस्ते में डाले जाने की प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर रही है। अविश्वास प्रस्ताव के सारे घटनाक्रम की उच्च स्तरीय जांच हो तभी जाकर दूध का दूध और पानी का पानी हो सकता है, लेकिन फिलहाल अविश्वास प्रस्ताव खटाई में पड़ गया है।

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