दो विभागों की खींचतान में पिस रहे ग्रामीण, आजादी के 70 सालों बाद भी उजाले के लिए सिर्फ दिये का सहारा

Published Date 2018/05/17 06:12, Written by- FirstIndia Correspondent

सिरोही। राज्य सरकारें अपने प्रदेश में विकास होने के चाहे जितने भी दावे कर लें, लेकिन कई बार अव्यवस्थाओं के चलते 'विकास' की पोल खुल ही जाती है। कुछ ऐसा ही एक मामला सामने आया है, जिसमें आजादी के लगभग 70 साल बीत जाने के बावजूद कई गांवों तक बिजली नहीं पहुंची या फिर यूं कहें कि आज भी लोग बिजली से अन्जान हैं। सिरोही जिले की गोयली ग्राम पंचायत का गांव बोकी भागली भी इसका एक जीता—जागता उदाहरण है, जहां लोग आज भी बिजली से बेखबर हैं और उजाले के लिए उनके पास सिर्फ दिये का ही सहारा है।

जानकारी के अनुसार, वन विभाग अपनी भूमि बता रहा है और डिस्कॉम के अधिकारियों का कहना है कि विभाग लिखित में दें तो बिजली दी जा सकती है। दोनों विभागें के बीच चल रही खींचतान में आदिवासी पिस रहे हैं, जो अंधेरे में जीवन यापन कर रहे हैं। हालांकि यहां रोशनी नहीं होने के बावजूद कई आदिवासी युवा आईआईटी तथा डॉक्टरी कर रहे हैं। लेकिन कोई भी जनप्रतिनिधि ग्रामीणों की आवाज नहीं सुन रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि किसी नेता और प्रधान ने कभी विद्युतीकरण के प्रयास नहीं किए। वहीं बिजोला भागली का भी कुछ ऐसा ही हाल है।

गांव में है डेढ़ सौ घरों की बस्ती :
यहां पं. दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना का लाभ भी नहीं पहुंचा है। बोकी भागली में करीब डेढ़ सौ घर आज भी महज दीपक की रोशनी से ही रोशन हो रहे हैं। 30 परिवारों के लोगों ने 18 अप्रेल 2013 को डिस्कॉम में आवेदन कर 3,510 की डिमांड राशि भी भर दी, लेकिन आज तक भी बिजली नहीं पहुंची। ग्रामीणों ने बताया कि यहां कई वर्षों से आबादी बसी हुई है, लेकिन बिजली है कि अभी तक भी नहीं पहुंच पा रही है।

प्रधानमंत्री तक को भी लिख चुके पत्र :
गांव के निवासियों ने बताया कि बिजली की समस्या को लेकर जिला कलक्टर, मुख्यमंत्री तथा प्रधानमंत्री तक को भी ज्ञापन भेज दिए गए हैं। वहां से भी कई बार पत्र आ गए, लेकिन प्रशासन की ओर से ध्यान नहीं दिया जा रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि गांव के सवाराम, भूराराम, भारताराम, कसनाराम, कानाराम, नवाराम, भीमाराम एवं रूपाराम ने बिजली के लिए डिमांड राशि भी भर दी है, लेकिन उन्हें भी बिजली नसीब नहीं हो पा रही है।

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