पीएम मोदी की झुंझुनूं यात्रा के दौरान हुआ 'फर्जी गाड़ियों का घोटाला'

Published Date 2018/06/13 02:21,Updated 2018/06/13 05:17, Written by- FirstIndia Correspondent
+1
+1

झुंझुनूं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब 8 मार्च को झुंझुनूं यात्रा पर आए थे और उन्होंने यहां से 'बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ' अभियान के विस्तार और राष्ट्रीय पोषण मिशन की शुरूआत की थी। इसी दौरान एक फर्जीवाड़ा भी सामने आया है, जिसमें लाखों रुपए का गबन किए जाने की बात सामने आई है। दरअसल, पीएम मोदी के झुंझुनूं दौरे के समय में प्रधानमंत्री के प्रोटोकॉल में लगाई गई गाड़ियों में से करीब 5 दर्जन गाड़ियां फर्जी थीं, जिनका झूठा बिल लगाकर बिल पास करवाने की कोशिश की गई। मामले के सामने आने के बाद जिला कलेक्टर दिनेश कुमार यादव ने 11 लाख 57 हजार का भुगतान रोक दिया है।

भ्रष्टाचार खत्म करने को लेकर प्रधानमंत्री चाहे जितना भी ढिंढोरा पीट लें, मगर जब सरकार के अधिकारी ही भ्रष्टाचार करने पर आमादा हो जाए तो फिर आमजन क्या कर सकता है। सरकार के अधिकारियों को इतना भी खौफ नहीं है कि भारत के प्रधानमंत्री की यात्रा के दौरान हम इतना बड़ा घोटाला करके कैसे बच सकेंगे। या यूं कहिए कि उनको अपने उच्च अधिकारियों का या फिर राज्य सरकार से किसी बात का खौफ नहीं है। ऐसा ही एक मामला झुंझुनूं में 8 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यात्रा के दौरान हुए घोटाले का सामने आया है।

दरअसल, प्रधानमंत्री के दौरे को देखते हुए उनके प्रोटोकॉल में कुल 123 गाड़ियां दिखाई गई थी, जिनका चार्ज झुंझुनूं तत्कालीन उप निदेशक आईसीडीएस रामअवतार शर्मा के पास था। उन्होंने 123 गाड़ियां प्रधानमंत्री के दौरे पर प्रोटोकॉल में दिखाई, जिनका बिल भी रामअवतार शर्मा ने 11 लाख 57 हजार रुपए का बनाकर जिला कलेक्टर को भेज दिया। लेकिन जिला कलेक्टर दिनेश कुमार यादव ने मुस्तैदी अपनाते हुए इस घोटाले को उजागर कर 11 लाख 57 हजार रुपए का बिल रोक दिया।

जिला कलेक्टर ने भी माना कि 123 गाड़ियों में से 59 गाड़ियां ऐसे अधिकारियों के लिए रामअवतार शर्मा उप निदेशक आईसीडीएस ने दिखाई है, जो प्रधानमंत्री दौरे के दौरान झुंझुनूं में आए ही नहीं। ऐसे अधिकारियों के नाम भी गाड़ियां दिखाई गई हैं, जो झुंझुनूं में अपने विभाग की गाड़ियों का ही इस्तेमाल करते हैं। इनमें झुंझुनूं भूजल विभाग में अधिकारी अमित चाहर, एसटीओ वाणिज्य कर विभाग के अधिकारी सुमित शेखावत, वन विभाग के अधिकारी बीएल नेहरा, राज्य बीमा निगम झुंझुनूं में अधिकारी सरिता सैनी, पीएचडी के एक्सईएन राजपाल, एडीपीसी सुभाष ढाका सहकारिता विभाग में रजिस्ट्रार संजीव कुमार, रजिस्ट्रार इंद्राज सैनी, टाउन प्लानर राकेश मातव, उपायुक्त जयपुर संभाग अशोक शर्मा, मलसीसर में कानूनगो रामनिवास और यहां तक कि झुंझुनूं अतिरिक्त जिला कलेक्टर मनीराम बगड़िया के नाम भी शामिल बताए जा रहे हैं।

रामअवतार शर्मा ने गाड़ियां अलॉट करके बिल पास करवाने की कोशिश की है। इससे ज्यादा क्या बता जाए कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ आई केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी के नाम पर भी रामअवतार शर्मा ने गाड़ियां अलॉट कर रखी हैं। और तो और, इन अधिकारियों को गाड़ी इस्तेमाल कर उनके सिग्नेचर भी लिए गए हैं, जो कि लगभग सभी अधिकारियों के एक जैसे सिग्नेचर कर बिल उठाने की कोशिश की गई है।

जब जिला कलेक्टर दिनेश कुमार यादव को इस बात की भनक लगी तो उन्होंने जांच करने की ठान ली और जब उन्होंने कई ऐसे अधिकारियों से बात की। इस पर उन्होंने गाड़ियां नहीं लेने की बात कही। जिला कलेक्टर ने अधिकारियों से शपथ पत्र भी भरवा कर लिए, जिन्होंने प्रधानमंत्री दौरे के दौरान गाड़ियां तत्कालीन उप निदेशक आईसीडीएस से नहीं ली और रामअवतार शर्मा तत्कालीन उप निदेशक आईसीडीएस ने गाड़ियां उनके नाम अलॉट कर रखी थी। उन सभी अधिकारियों से जिला कलेक्टर ने शपथ पत्र भरवाकर लिए हैं और इस मामले की जांच भी की जा रही है।

इस मामले में मीडिया ने वन विभाग के उप वन संरक्षक बीएल नेहरा और चिकित्सा विभाग में डीपीएम के पद पर तैनात विक्रम सिंह से बात की गई तो उन्होंने बताया कि हमें जिला कलेक्टर ने तलब करके कहा कि आपने प्रधानमंत्री दौरे के दौरान तत्कालीन उप निदेशक आईसीडीएस वेद रामअवतार शर्मा द्वारा अलॉट की गई गाड़ियों का इस्तेमाल किया है। इस पर हमने गाड़ियां लेने से मना किया, जिस पर जिला कलेक्टर ने हमसे शपथ पत्र भी भरवा कर लिए हैं। साथ ही शपथ पूर्वक बयान भी लिया कि हमने प्रधानमंत्री दौरे के दौरान कोई भी गाड़ी तत्कालीन उप निदेशक द्वारा नहीं ली, बल्कि हमने खुद अपनी गाड़ियों का इस्तेमाल किया है।

ऐसे कई और भी अधिकारियों से जिला कलेक्टर ने शपथ पत्र भरवाए हैं, जिन्होंने दौरे के दौरान सरकार द्वारा दी गई किसी भी गाड़ी का इस्तेमाल नहीं किया। वहीं खुद अपने विभाग की गाड़ियों का इस्तेमाल किया है। उन सभी से जिला कलेक्टर ने शपथ पत्र भरवाए हैं और इस मामले की जांच भी की जा रही है। गौरतलब है कि ऐसे ही कई मामले कई बार निकलते हैं और मीडिया उनको उजागर भी करता रहा है, मगर क्या राज्य सरकार ऐसे अधिकारियों पर कार्रवाई करती है या फिर ऐसे अधिकारियों को खुलेआम भ्रष्टाचार करने की छूट देकर उनके हौसले बुलंद करती है। यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा।

First India News से जुड़े अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करे!
हर पल अपडेट रहने के लिए अभी डाउनलोड करें First India News Mobile Application
लेटेस्ट वीडियो के लिए हमारे YOUTUBE चैनल को विजिट करें

और पढ़ें

Most Related Stories

Stories You May be Interested in


loading...

-------Advertisement--------



-------Advertisement--------