पेट्रोल पंप पर ग्राहकों को चूना लगने का डर अब जल्द होगा खत्म

Published Date 2017/07/06 13:35, Written by- FirstIndia Correspondent

नई दिल्ली| पेट्रोल पंप पर होने वाली चोरियों से जल्द ही छुटकारा मिल जाएगा| पेट्रोल पंप पर ग्राहकों को चूना लगाने वाली मशीनों से जल्द ही निजात मिल जाएगा| जी हां पेट्रोल पंप पर ग्राहकों को चूना लगने का डर जल्द खत्म हो जाएगा। गाड़ियों में फ्यूल डालने वाली मशीनों को इलेक्ट्रॉनिक तरीके से सील किया जाएगा|  इलेक्ट्रॉनिक तरीके से सील करने से मशीनों के साथ होने वाली छेड़छाड़ बंद हो जाएगी| इसकी वजह से इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम में छेड़छाड़ से रोका जा सकेगा। ऑइल मार्केटिंग कंपनियों और इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों के साथ सरकारी अफसरों की बैठक में यह फैसला लिया गया।

 

आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में कई पेट्रोल पंप पर कस्टमर्स के साथ माप में धोखाधड़ी करने का मामला सामने आने पर यह फैसला लिया गया है। कस्टमर्स को पंप पर लगे डिस्प्ले से कम फ्यूल देकर उनकी जेब काटी जा रही थी। इसमें पल्सर कार्ड के जरिए गोलमाल करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक चिप का यूज किया जा रहा था। इस कार्ड से पता चलता है कि पंप के जरिए कितना फ्यूल दिया जा रहा है।

 

कंज्यूमर अफेयर्स डिपार्टमेंट के एक अफसर ने इकनॉमिक टाइम्स को बताया, 'वजन और माप के लीगल मेट्रोलॉजी रूल्स में पल्सर कार्ड्स को इलेक्ट्रॉनिक तरीके से सील करने का प्रावधान है। उनको फिलहाल मेकैनिकल तरीके से सील किया जा रहा है। इसलिए यह काम कोई अतिरिक्त खर्च बिना तुरंत किया जा सकता है।'

 

जिन मशीन से वीइकल में फ्यूल डाला जाता है उसमें एक पल्सर कार्ड भी लगा होता है। इसको लीगल मेट्रोलॉजी डिपार्टमेंट सील करता है। अधिकारियों ने बताया कि ई-सीलिंग से पक्का हो सकेगा कि इसके साथ टेक्निशन छेड़छाड़ नहीं कर पाएंगे या इसमें पल्स फ्रिक्वेंसी एनहैंसर चिप जोड़ पाएंगे। एक सरकारी अफसर ने कहा, 'एक चिप कस्टमर को हर लीटर पर 50 से 70 मिलीलीटर फ्यूल का लॉस करा सकता है। ई-सीलिंग से इन सब पर लगाम लगाई जा सकेगी।'

 

दूसरे अफसर ने बताया कि एक पल्स एनहैंसर डिवाइस लगभग 50,000 रुपये में आती है। इसके जरिए पंप ओनर कस्टमर्स को हर महीने 12 से 15 लाख रुपये का चूना लगा सकता है। इसको देखते हुए अब फैसला किया गया है कि राज्यों के लीगल मेट्रोलॉजी डिपार्टमेंट, ऑइल कंपनियों और इक्विपमेंट मेकर्स के एग्जिक्यूटिव्स मिलकर इलेक्ट्रॉनिक सीलिंग का काम करेंगे। इसमें वाहनों में फ्यूल डालने वाली मशीनों को पासवर्ड के जरिए सिक्यॉर किया जाएगा।

 

वहीं अफसरों ने यह भी कहा कि ई-सीलिंग अडिशनल सिस्टम होगा और यह मेकैनिकल सीलिंग प्रोसेस को खत्म नहीं करेगा। सूत्रों ने बताया कि गवर्नमेंट और इंडस्ट्री की इस मीटिंग में पेट्रोलियम ऐंड नेचुरल गैस मिनिस्ट्री और कंज्यूमर अफेयर्स के अफसर के अलावा ऑइल मार्केटिंग कंपनियों और ऑरिजनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स के प्रतिनिधि शामिल हुए।

 

दरअसल कन्ज्यूमर अफेयर्स डिपार्टमेंट के सूत्र ने बताया, 'दोनों मिनिस्ट्री इस काम को टॉप प्रायॉरिटी दे रहे हैं। हम एक जगह से इसकी शुरुआत करेंगे और चरणबद्ध तरीके से देशभर में करेंगे। यह काम खपत के हिसाब से राज्य या शहरों के हिसाब से किया जाएगा।' पल्सर कार्ड का ई-सीलिंग प्रोसेस कब से शुरू किया जाना है, इस पर फैसला ऑइल मार्केटिंग कंपनियां, स्टेट के मेट्रोलॉजी डिपार्टमेंट और टेक्निकल सर्विस प्रोवाइडर लेंगे।

 

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