'हाथ' से फिसला कर्नाटक का किला, 2019 में कैसे होगा बेड़ा पार

Dinesh Kumar Dangi Published Date 2018/05/15 03:53

जयपुर दिनेश डांगी कर्नाटक में कांग्रेस का किला ढहने से पार्टी को बड़ा झटका लगा है, क्योंकि इस हार का असर राहुल गांधी के नेतृत्व के साथ साथ साल के अंत में होने वाले तीन राज्यों के चुनाव पर भी पड़ेगा। एमपी, छत्तीसगढ़ और राजस्थान विधानसभा के चुनाव यकीनन लोकसभा चुनाव से पहले होने के कारण सत्ता का सेमीफाइनल मुकाबला होगा। लेकिन कर्नाटक हार के बाद कांग्रेस इस चुनौती को कैसे पार करेगी यह यक्ष सवाल हो गया है।

पीएम नरेन्द्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के गृहराज्य गुजरात में कांग्रेस ने उम्मीदों से अच्छा प्रदर्शन किया। गुजरात का रण जीतने के लिए राहुल गांधी ने जमकर पसीना बहाया, मंदिरों में दर्शन किए। लिहाजा, उत्साहित कांग्रेस और राहुल ने कर्नाटक का किला बरकरार रखने के लिए कर्नाटक में गुजरात की ही रणनीति को रिपीट करते हुए एक तरह से प्रचार किया। लेकिन इस बार मोदी और शाह ने सबक लेते हुए और सतर्क रहते ऐसी खेमेबंदी और रणनीति तैयार करी की कांग्रेस चारों खाने चित्त हो गई।

कर्नाटक हार के बाद तय है कि राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश चुनाव में उसकी मुश्किलें और बढ़ गई है। जीत से उत्साहित भाजपा तीनों राज्यों में जोश के साथ अटैकिंग और अग्रेसिव तरीके से चुनाव लड़ेगी। बात राजस्थान की करें तो उपचुनाव में हारी प्रदेश भाजपा को भी इस जीत से बेहद सपोर्ट मिला है। यानि भाजपा कर्नाटक की तर्ज पर राजस्थान के रण में उतरेगी तो फिर परिणाम कुछ भी निकलकर आ सकते हैं।

कर्नाटक चुनाव परिणाम से राजस्थान कांग्रेस नेताओं के हौंसले अभी से पस्त होने लगे हैं। तीन उपचुनाव जीत से सातवें आसमान पर पहुंचे कांग्रेसियों के हार के बाद चेहरे देखने लायक हो गए हैं। अब अगर प्रदेश कांग्रेस नेताओं ने समय रहते मैदान में पसीना नहीं बहाया तो फिर सत्ता में आने का ख्वाब कहीं ख्वाब ही नहीं रह जाए। हालांकि कांग्रेसी मीडिया के सामने तो यह डर औऱ आशंका जाहिर नहीं कर पा रहे हैं। साथ ही राजस्थान में जीत का दावा भी कर रहे हैं।

राजस्थान में कह सकते हैं कि कांग्रेस थोड़ी अच्छी स्थिति मेें है, लेकिन मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की हालात अभी बेहतर नहीं है। ऐसे में तीनों राज्य में चुनाव जीतने के लिए यकीनन कांग्रेस को आत्मचिंतन करते हुए अब नए सिरे से प्लानिंग बनानी होगी। क्योंकि अगर तीनों राज्यों में जीत का खाता नहीं खोला तो फिर लोकसभा चुनाव 2109 सिर्फ लड़ने के लिए लड़ा जाएगा।

बहरहाल, कांग्रेस ने सॉफ्ट हिन्दुत्व का प्रयोग भी कर लिया। पीएम मोदी पर अग्रेसिव अटैकिंग हमला करके देख लिया, लेकिन भाजपा की किलेबंदी के आगे सब फेल हो गया है। लिहाजा, अब कांग्रेस को संगठन से लेकर स्टेट में नई सियासी जाजम औऱ रणनीति अब तैयार करनी होगी। वरना आउटडेटेड औऱ अोल्ड फार्मूलों से तो हार का सिलसिला नहीं थमने वाला।

First India News से जुड़े अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करे!
हर पल अपडेट रहने के लिए अभी डाउनलोड करें First India News Mobile Application
लेटेस्ट वीडियो के लिए हमारे YOUTUBE चैनल को विजिट करें

और पढ़ें

Most Related Stories

Stories You May be Interested in

जानिए गुलाब के पुष्पों के चमत्कारी उपायों के बारे में | Good Luck Tips

11:00 बजे की सुपर फास्ट खबरें
Big Fight Live | छिटकने लगी \'कलियां\' ! | 12 NOV, 2018
\'Face To Face\' With Divya Dutta, Film Actress and Model | Exclusive Interview
योगी के राम मंदिर बयान पर कांग्रेस का पलटवार
चुनावी नामांकन का क्या महत्व रहता है? किस अंक वाले को किस दिन नामांकन करना शुभ रहेगा?
नीमराणा के डाबड़वास गांव में फूड पॉइजनिंग, मरीजों की तादाद 800 से 1000 के बीच में
न्यायाधीश माथुर इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश नियुक्त
loading...