खुद उपचार की बाट जोह रहा रूपवास का अस्पताल, भगवान भरोसे हैं व्यवस्थाएं

FirstIndia Correspondent Published Date 2018/07/11 04:34

रूपवास (भरतपुर)। रूपवास कहने को तो भरतपुर संभाग की सबसे बड़ी एवं पुरानी तहसीलों में से एक है, लेकिन स्वच्छता की दृष्टि से रूपवास तहसील लगभग सभी तहसीलों में पिछड़ी हुई है। होने को तो रूपवास उपखण्ड मुख्यालय है और यहां उपखण्ड अधिकारी, तहसीलदार, विकास अधिकारी, चिकित्सा अधिकारी, थानाधिकारी और कई बड़े विभागों के अधिकारीगण अपने पदों पर बैठते हैं।

रूपवास कस्बे में स्टेशन मार्ग पर उपखण्ड की सबसे बड़ी सीएचसी मौजूद है, जो अपनी ही हालत पर आंसू बहा रही है। मौजूदा समय मे इस अस्पताल को कई प्रकार की भारी कमियों का सामना करना पड़ रहा है। कस्बे का राजकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पिछले काफी लंबे समय से अपनी ही बीमारी के इलाज के लिए राज्य सरकार सहित चिकित्सा विभाग के आलाधिकारियों के भरोसे है।

कस्बे के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में आमजन की चिकित्सा सम्बन्धी सेवा करने के लिए कुल 8 पद स्वीकृत हैं, जिनमें से 7 चिकित्सकों के पद रिक्त चल रहे हैं। इस पर भी जो एक चिकित्सक अपनी सेवाएं दे रहा है, वह भी दन्त चिकित्सक है। सीएचसी में चिकित्सा सेवाओं को सुचारू रखने के लिए ग्रामीण क्षेत्र से चिकित्सक बुलाकर काम चलाया जा रहा है।

वैसे कस्बे में सीएचसी में डॉक्टरों की कमी का मुद्दा कई वर्षों से चला आ रहा है। अस्पताल में गंदगी ने भी अपना घर बना रखा है। ऐसे में इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि जब अस्पताल में ही समस्याओं का अंबार होगा तो आमजन के स्वास्थ्य का ख्याल कैसे रखा जा सकता है। अस्पताल आने वाले मरीजों को चारों ओर फेली गन्दगी ने काफी परेशान कर रखा है, जिसमें से दुर्गंध आती रहती है। निश्चित ही सीएचसी में समस्याओं ने अपना घर बना लिया है।

500 मरीजों की क्षमता का है आउटडोर :
रूपवास कस्बे के अस्पताल में रोजाना करीब 500 मरीजों का आउटडोर है लेकिन चिकित्सकों की कमी के कारण मरीज एवं उनके परिजनों को भारी समस्या का सामना करना पड़ता है। यहां व्यवस्था के लिए लगाए गए महज दो चिकित्सकों को,जिनमें से एक का स्थानांतरण हो चुका है,क्षमता से अधिक मरीजों की जांच करनी पड़ती है। 

ये पद हैं स्वीकृत :
रूपवास कस्बे को सीएचसी में क्रमोन्नत हुए बहुत समय हो गया है। इस अस्पताल में सीएचसी होने पर कई पद स्वीकृत भी हुए थे, जिनमें 1 एसएमओ, 1 जेएस मेडिसन, 2 एमओ, 1 जेएस गायनी, 1 जेएस सर्जरी, 1 जेएस पीड्रिकट व 1 डेंटिस्ट का पद है। पिछले करीब 18 माह से यहां 1 एमओ व 1 डेंटिस्ट ही पदस्थापित हैं, लेकिन हाल ही में एक एमओ का स्थानांतरण अन्य स्थान पर होने के साथ ही अब चिकित्सालय में मरीजों को देखने के लिए महज 1 ही चिकित्सक रह गया है वह भी डेंटिस्ट।

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