दूसरों को इंसाफ दिलाने वाले जज आज खुद कर रहे मीडिया के सामने इंसाफ की मांग

FirstIndia Correspondent Published Date 2018/01/12 03:25

नई दिल्ली। देश के सर्वोच्च न्यायालय के 4 सिटिंग जजों — जस्टिस चेलमेश्वर, जस्टिस मदन लोकुर, जस्टिस कुरियन जोसेफ और जस्टिस रंजन गोगोई — ने आज दिल्ली में एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई, जिसमें उन्होंने कहा कि न्यायपालिका में जो हालात हैं, वो लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं हैं। चारों जजों ने शीर्ष अदालत के प्रशासन में अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए इसकी कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठ जजों की इस कांफ्रेंस ने देशभर में हलचल मचा दी है।

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया दीपक मिश्रा के बाद सुप्रीम कोर्ट के दूसरे सबसे सीनियर जज जस्टिस चेलमेश्वर ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि कभी-कभी होता है कि देश के सुप्रीम कोर्ट की व्यवस्था भी बदलती है। सुप्रीम कोर्ट का प्रशासन ठीक तरीके से काम नहीं कर रहा है, अगर ऐसा चलता रहा तो लोकतांत्रिक परिस्थिति ठीक नहीं रहेगी। 

उन्होंने कहा कि हमने चीफ जस्टिस से अनियमितताओं पर बात की थी। उन्होंने बताया कि चार महीने पहले हम सभी चार जजों ने चीफ जस्टिस को एक पत्र लिखा था। उस पत्र में प्रशासन से जुड़े कुछ मुद्दे हमने उठाए थे। जस्टिस चेलमेश्वर के मुताबिक चीफ जस्टिस ने चारों जजों की बात नहीं सुनी। अब चीफ जस्टिस पर देश को फैसला करना चाहिए, हम बस देश का कर्ज अदा कर रहे हैं।

चेलमेश्वर ने कहा कि बीस साल बाद कोई यह न कहे कि हमने अपनी आत्मा बेच दी है। इसलिए हमने मीडिया से बात करने का फैसला किया। उन्होंने कहा कि भारत समेत किसी भी देश में लोकतंत्र को बरकरार रखने के लिए यह जरूरी है कि सुप्रीम कोर्ट जैसी संस्था सही ढंग से काम करे। उन्होंने कहा कि हालांकि हम चीफ जस्टिस को अपनी बात समझाने में असफल रहे। इसलिए हमने राष्ट्र के समक्ष पूरी बात रखने का फैसला किया।

बहरहाल, ऐसे में इस प्रेस कांफ्रेंस से जाहिर होता है कि मुख्य न्यायाधीश से कुछ मुद्दों पर इनके मतभेद हैं। गौरतलब है कि देश में यह पहला मौका है जब वरिष्ठ न्यायाधीश आज मीडिया से रूबरू हुए हैं। जजों ने प्रेस कांफ्रेंस के बाद मीडिया को एक स्टेटमेंट की कॉपी भी दी है। ऐसा माना जा रहा है कि इस प्रेस कांफ्रेंस का बड़ा असर हो सकता है। जजों  के पत्र से जाहिर होता है कि इसमें कहीं न कहीं सरकार के हस्तक्षेप का भी आरोप है।

उल्लेखनीय है कि न्यायाधीशों की नियुक्ति के बारे में सरकार और न्यायपालिका के बीच चल रहे युद्ध की वजह से यह प्रेस कॉन्फ्रेंस की गई। जब सरकार और चीफ जस्टिस ने बात नहीं सुनी तो चारों जजों ने मीडिया के सामने आकर अपनी बात रखी। वहीं दूसरी ओर, इन चारों जजों द्वारा न्यायपालिका की खामियों की शिकायत लेकर मीडिया के सामने आने से हड़कंप मचा हुआ है। प्रेस कॉन्फ्रेंस के फौरन बाद इस पर कानूनविदों और नेताओं की ओर से प्रतिक्रिया आनी भी शुरू हो गई है। 

भाजपा के वरिष्ठ नेता और वकील सुब्रमण्यम स्वामी ने इसे बेहद गंभीर समला बताया है। उन्होंने कहा कि हम उनकी आलोचना नहीं कर सकते, वे महान ईमानदार लोग हैं, उन्होंने अपने बहुत से कानूनी करियर का बलिदान किया है। वे चाहते तो वरिष्ठ सलाहकार के रूप में पैसे कमा सकते थे, हमें उनका सम्मान करना चाहिए। वहीं स्वामी ने इस मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से दखल देने की मांग की है।

वहीं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व कानून मंत्री सलमान खुर्शीद ने इस मसले पर कहा कि यह बेहद दुखी करने वाला और दर्दनाक है कि शीर्ष अदालत की जमीन में इतना गंभीर तनाव कि जजों को मीडिया के सामने आकर संबोधित करना पड़ रहा है।

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