फिलहाल, अधिकारियों का कहना है कि कठुआ के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कानून के अनुसार एक केस को सुनवाई के लिए सत्र अदालत के पास भेजेंगे जिसमें सात लोग जिम्मेदार हैं। वैसे तो नाबालिग आरोपी के खिलाफ मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सुनवाई करेंगे, क्योंकि किशोर कानून के तहत यह विशेष अदालत है और जम्मू-कश्मीर सरकार ने इस संवेदनशील मामले में सुनवाई के लिए दो विशेष वकीलों की नियुक्ति की है और ये दोनों ही सिख धर्म के हैं।

हालांकि,  सुप्रीम कोर्ट द्वारा 13 अप्रैल को जम्मू बार एसोसिएशन तथा कठुआ बार एसोसिएशन को आड़े हाथ लिए जाने के बाद अब सुनवाई सुचारू ढंग से चलने की आशंका जताई जा रही है। और साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में कुछ वकीलों द्वारा न्यायिक प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न करने पर कड़ी आपत्ति जताई है।

गौरतलब है कि कठुआ (रसाना) हत्याकांड की जांच और पूरे प्रकरण में वकीलों की भूमिका की समीक्षा करने के लिए बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) की पांच सदस्यीय टीम 20 अप्रैल को जम्मू जाएंगी और यह टीम कठुआ के रसाना गांव जाकर जमीनी हालात की समीक्षा करेगी साथ ही यह टीम अपने दौरे के दौरान पीड़िता के परिवार सदस्यों से भी मिलेगी। उसके बाद जम्मू में जे एंड के हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों से बैठक कर पूरे प्रकरण में वकीलों की भूमिका की पड़ताल करेगी।

रसाना मामले में राष्ट्रीय स्तर पर यह संदेश गया है कि बार एसोसिएशन ने आरोपितों को बचाने का प्रयास किया और इसके चलते जम्मू बंद रखा गया। ऐसे में बार काउंसिल की टीम का यह दौरा महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, रविवार को दिल्ली में बार काउंसिल ऑफ इंडिया की बैठक हुई जिसमें पूरे मामले की जांच के लिए पांच सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया।

दिल्ली हाई कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस तरुण अग्रवाल की अध्यक्षता में गठित कमेटी में बार काउंसिल ऑफ इंडिया के सह-चेयरमैन एस प्रभाकरण व रमेश चंद्रा, बार काउंसिल ऑफ उत्तराखंड की प्रमुख रजिया बेग तथा पटना हाई कोर्ट के वकील नरेश दीक्षित शामिल हैं। बीसीआइ ने फैसला किया है कि उक्त कमेटी की रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट के सामने पेश की जाएगी।

बता दें कि इस मामले में मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने पीड़ित परिवार को 90 दिनों के अंदर न्याय दिलाने की हाई कोर्ट के मुख्य न्यायधीश से वकालत की है। ऊधर पीड़िता का केस लड़ रही महिला वकील दीपिका राजावत ने मामले की जांच राज्य से बाहर करवाने की मांग की है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने की भी बात कही है।

दीपिका ने आशंका जताई है कि राज्य में मामले की सुनवाई से पीड़िता को न्याय नहीं मिल सकता। इससे पहले भी दीपिका ने जम्मू बार एसोसिएशन के प्रधान बीएस सलाथिया पर यह आरोप लगाया था कि उन्हें इस मामले की पैरवी से पीछे हटने की धमकियां मिल रही हैं, लेकिन सलाथिया ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया था। दीपिका का कहना है कि उनकी जान को खतरा है, उन्हें लगता है कि उनका भी बलात्कार या हत्या की जा सकती है।

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कठुआ रेप केस मामले में अब 28 अप्रैल को होगी अगली सुनवाई

Published Date 2018/04/16 12:26,Updated 2018/04/16 12:37, Written by- FirstIndia Correspondent

नई दिल्ली। कठुआ में 8 साल की बच्ची से सामूहिक दुष्कर्म और हत्या के मामले में अब अगली सुनवाई 28 अप्रैल को होगी। सभी आरोपियों को आज जिला अदालत के समक्ष पेश किया गया। सुनवाई के बाद अभियुक्तों के वकील अंकुर शर्मा ने कहा, 'न्यायालय ने निर्देश दिया है कि सभी आरोपियों को चार्जशीट की कॉपी दी जाएं। हम नार्को टेस्ट के लिए तैयार हैं। अगली सुनवाई 28 अप्रैल को होगी।'

इन आरोपियों पर 8 साल की बच्ची के साथ सामूहिक दुष्कर्म के बाद हत्या करने का आरोप है। इन लोगों ने इस बच्ची को जनवरी में अगवाह किया फिर एक सप्ताह तक एक मंदिर में बंधक बनाकर रखा और उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया तो वहीं दूसरी तरफ पीडिता की वकील दीपिका सिंह राजावत ने अपने साथ रेप और हत्या कराए जाने की आशंका भी जताई है।

आपकों बता दें कि आरोपियों ने इस केस को जम्मू-कश्मीर से बाहर ट्रांसफर करने की मांग की है। इसलिए इस मामले में पीड़िता का परिवार आज कोर्ट की सुनवाई में अर्जी दाखिल कर सकता है। दूसरी तरफ भाजपा के दो मंत्रियों चंद्रप्रकाश गंगा और लाल सिंह ने इस कांड की केन्द्रीय जांच ब्यूरो से जांच कराने की मांग के कथित समर्थन करने के कारण महबूबा मुफ्ती मंत्रिमंडल को इस्तीफा दे दिया है। दोनों मंत्री एक मार्च को हिन्दू एकता मंच की रैली में शामिल हुए थे।

फिलहाल, अधिकारियों का कहना है कि कठुआ के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कानून के अनुसार एक केस को सुनवाई के लिए सत्र अदालत के पास भेजेंगे जिसमें सात लोग जिम्मेदार हैं। वैसे तो नाबालिग आरोपी के खिलाफ मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सुनवाई करेंगे, क्योंकि किशोर कानून के तहत यह विशेष अदालत है और जम्मू-कश्मीर सरकार ने इस संवेदनशील मामले में सुनवाई के लिए दो विशेष वकीलों की नियुक्ति की है और ये दोनों ही सिख धर्म के हैं।

हालांकि,  सुप्रीम कोर्ट द्वारा 13 अप्रैल को जम्मू बार एसोसिएशन तथा कठुआ बार एसोसिएशन को आड़े हाथ लिए जाने के बाद अब सुनवाई सुचारू ढंग से चलने की आशंका जताई जा रही है। और साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में कुछ वकीलों द्वारा न्यायिक प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न करने पर कड़ी आपत्ति जताई है।

गौरतलब है कि कठुआ (रसाना) हत्याकांड की जांच और पूरे प्रकरण में वकीलों की भूमिका की समीक्षा करने के लिए बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) की पांच सदस्यीय टीम 20 अप्रैल को जम्मू जाएंगी और यह टीम कठुआ के रसाना गांव जाकर जमीनी हालात की समीक्षा करेगी साथ ही यह टीम अपने दौरे के दौरान पीड़िता के परिवार सदस्यों से भी मिलेगी। उसके बाद जम्मू में जे एंड के हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों से बैठक कर पूरे प्रकरण में वकीलों की भूमिका की पड़ताल करेगी।

रसाना मामले में राष्ट्रीय स्तर पर यह संदेश गया है कि बार एसोसिएशन ने आरोपितों को बचाने का प्रयास किया और इसके चलते जम्मू बंद रखा गया। ऐसे में बार काउंसिल की टीम का यह दौरा महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, रविवार को दिल्ली में बार काउंसिल ऑफ इंडिया की बैठक हुई जिसमें पूरे मामले की जांच के लिए पांच सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया।

दिल्ली हाई कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस तरुण अग्रवाल की अध्यक्षता में गठित कमेटी में बार काउंसिल ऑफ इंडिया के सह-चेयरमैन एस प्रभाकरण व रमेश चंद्रा, बार काउंसिल ऑफ उत्तराखंड की प्रमुख रजिया बेग तथा पटना हाई कोर्ट के वकील नरेश दीक्षित शामिल हैं। बीसीआइ ने फैसला किया है कि उक्त कमेटी की रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट के सामने पेश की जाएगी।

बता दें कि इस मामले में मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने पीड़ित परिवार को 90 दिनों के अंदर न्याय दिलाने की हाई कोर्ट के मुख्य न्यायधीश से वकालत की है। ऊधर पीड़िता का केस लड़ रही महिला वकील दीपिका राजावत ने मामले की जांच राज्य से बाहर करवाने की मांग की है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने की भी बात कही है।

दीपिका ने आशंका जताई है कि राज्य में मामले की सुनवाई से पीड़िता को न्याय नहीं मिल सकता। इससे पहले भी दीपिका ने जम्मू बार एसोसिएशन के प्रधान बीएस सलाथिया पर यह आरोप लगाया था कि उन्हें इस मामले की पैरवी से पीछे हटने की धमकियां मिल रही हैं, लेकिन सलाथिया ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया था। दीपिका का कहना है कि उनकी जान को खतरा है, उन्हें लगता है कि उनका भी बलात्कार या हत्या की जा सकती है।

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