जानिए, कैसे हो गया 11.5 हजार करोड़ का PNB_घोटाला और कौन है ये नीरव मोदी

Published Date 2018/02/16 04:26, Written by- FirstIndia Correspondent

नई दिल्ली (FIN डिजिटल)। पंजाब नेशनल बैंक (PNB) में हुए घोटाले के मामले में ताजा जानकारी के अनुसार, घोटाले के आरोपी नीरव मोदी और उसके परिवार को पकड़ने के लिये इंटरपोल ने डिफ्यूजन नोटिस जारी किया है। सीबीआई ने मोदी और उसके परिवार का पता लगाने के लिये इंटरपोल से संपर्क किया था। पीएनबी फर्जीवाड़े का पता लगने से पहले ही नीरव मोदी और उसका परिवार जनवरी महीने में देश छोड़कर भाग गया था। अधिकारियों का कहना है कि सीबीआई ने इंटरपोल से मोदी का पता लगाने के लिये डिफ्यूजन नोटिस जारी करने की अपील की है।

अधिकारियों का कहना है कि डिफ्यूज़न नोटिस किसी नोटिस से कम औपचारिक होता है, लेकिन इसका उपयोग किसी अपराधी की लोकेशन का पता लगाने के लिए किया जाता है। डिफ्यूज़न सीधे एनसीबी (इस मामले में सीबीआई) संबंधित सदस्य देश को भेजता है या फिर सभी सदस्य देशों को भेजा जाता है, जो इंटरपोल से जुड़े होते हैं। सीबीआई को उम्मीद है कि वो मोदी और उसके परिवार को पता आज यानि शुक्रवार ही लगा लेंगे।

कैसे हो गया इतना बड़ा घोटाला :
इस सवाल का जवाब तलाशने के लिए पूरे मामले की परत दर परत तक जाने की जरूरत है। मीडिया रिपोर्ट्स में अभी तक इस खेल में दो बैंककर्मियों की मुख्‍य आरोपी नीरव मोदी के साथ मिलीभगत सामने आ रही है। इनमें से एक पूर्व डिप्‍टी मैनेजर और दूसरा क्‍लर्क है। इस पूरी साठगांठ को समझने के लिए पूरे बैंकिंग सिस्‍टम को समझने की जरूरत है। सबसे पहले आपको ये बताते है कि इस घोटाले का असली खेल क्या था और किस तरह से इसे अन्जाम दिया गया। दरअसल, इस घोटाले का मुख्य सूत्रधार एक सहमति पत्र था, जो कि बैंकिंग सेक्टर में लेटर ऑफ अंडरटेकिंग (LoU) के नाम से जाना जाता है।

क्या होता है यह लेटर ऑफ अंडरटेकिंग :
लेटर ऑफ अंडरटेकिंग एक प्रकार से किसी एक बैंक की ओर से किसी दूसरे बैंक को दी जानी वाली गारंटी होती है, जिससे उन दोनों बैंको से सम्बंध रखने वाले व्यक्ति को रुपए आसानी से मिल जाते हैं। दरअसल यदि कोई व्यक्ति अपने देश के बाहर से कोई सामान आयात करता है तो निर्यातक को विदेश में उसके पैसे चुकाने होते हैं। इसके लिए कई बार आयातक कुछ समय के लिए बैंक से उधार लेता है। इसके लिए बैंक आयातकर्ता के लिए विदेश में मौजूद किसी बैंक को एलओयू देता है, जिसमें लिखा होता है कि अमुक काम के लिए आप एक निश्चित पेमेंट कर दीजिए। इसमें बैंक वादा करता है कि वह निर्धारित अवधि के भीतर ब्‍याज समेत उसकी रकम को लौटा देगा।

कैसे काम करता है लेटर ऑफ अंडरटेकिंग :
पीएनबी घोटाले में मुंबई की बैंक की एक कॉरपोरेट ब्रांच के दो कर्मचारियों ने नीरव मोदी के लिए फर्जी एलओयू जारी किए, जिसका ब्रांच बैंक का कोई सरोकार नहीं था। बैंक का सरोकार इसलिए नहीं था, क्योंकि बैंक को इसका पता भी नहीं लग पाया था। दरअसल, एलओयू के लिए एक स्विफ्ट सिस्‍टम होता है। जो कि एक अंतरराष्‍ट्रीय कम्‍युनिकेशन सिस्‍टम होता है और दुनियाभर के बैंको को आपस में जोड़ता है। इस घोटाले में शामिल कर्मचारियों के पास इसका कंट्रोल था। जब किसी विदेशी बैंक को स्विफ्ट सिस्‍टम के तहत एलओयू कोड मिलते हैं तो वह उनको आधिकारिक और सटीक मानता है और सम्बंधित बैंक की गारंटी पर व्‍यवसायी को पैसे उधार के रूप में दे देता है।

क्या हुआ है इस घोटाले में :
पीएनबी मुंबई बैंक की एक कॉरपोरेट ब्रांच में इस काम को करने वालों में एक क्‍लर्क था, जो डाटा फीड करता था। वहीं दूसरा वह अधिकारी था, जो इस जानकारी की आधिकारिक पुष्टि करता था। इस मामले में इन लोगों ने फर्जी एलओयू बनाकर भेज दिया। इस मामले में ऐसा लगता है कि स्विफ्ट सिस्‍टम, कोर बैंकिंग से जुड़ा नहीं था। चूंकि फर्जी संदेश भेजे गए और उनको भेजने के बाद डिलीट कर दिया। ऐसे में कोर बैंकिंग में कोई एंट्री नहीं हुई और इसी वजह से किसी को इस बारे में कानोंकान भनक तक नहीं लग पाई।

कैसे संभव हुआ एक साथ इतना बड़ा घोटाला :
इतनी बड़ी राशि का घोटाला एक साथ किया जाना संभव नहीं है, क्योंकि कोई भी बैंक एक साथ इतनी बड़ी राशि उधार दिए जाने की गारंटी नहीं लेता है। दरअसल, इस घोटाले की शुरूआत 2011 से ही हो गई थी और घोटाले का यह खेल तभी से चल रहा था। 2011 से लगातार एक कर्ज को खत्‍म करने के लिए दिए जाने वाला समय पूरा होने से पूर्व ही दूसरा बड़ा कर्ज लिया जाता रहा और उससे पुराने कर्ज को अदा किया जाता रहा। ऐसे में इसके बारे में किसी को पता तक नहीं लग पाया।

कैसे हुआ इस घोटाले का राजफाश :
2011 से बाद से लगातार चल रहे इस खेल के बीच पिछले साल उस बैंक अधिकारी रिटायर्टमेंट हो गया, जो इसमें मिला हुआ था। बैंक के नए अधिकारी से नीरव मोदी की कंपनी ने जब नए एलओयू के लिए संपर्क किया तो उसने इसके लिए जमानत राशि मांगी। इस पर कंपनी ने बताया कि इससे पहले तो कुछ नहीं लिया गया था। बस यहीं से बैंक को गड़बड़ी के संकेत मिले। इसके बाद एक विदेशी बैंक ने समय पूरा होने पर पीएनबी से एलओयू के आधार पर दिए गए पैसे वापस मांगे तो पीएनबी ने कहा कि उसने तो कभी ऐसे लोन के लिए कहा ही नहीं। इस पर बैंक ने जांच एजेंसियों के पास शिकायत की और जांच के बाद इस मामले की परतें खुलती जा रही है।

कौन है ये नीरव मोदी :
चलिए, इन सबसे इतर अब आपको ये बताते हैं कि आखिर ये नीरव मोदी है कौन और इसका क्या बैकग्राउंड रहा है। नीरव के परिवार के अन्य सदस्‍यों में उसकी पत्‍नी एमी मोदी, भाई निशाल मोदी और मेहुल चोकसी शामिल हैं। नीरव मोदी एक डायमंड ज्वैलरी कारोबारी है और उसका परिवार गुजरात के पालनपुर का रहने वाला है। नीरव का नाम वह देश के सबसे अमीर ज्वैलर्स की फेहरिस्त में दूसरे नम्बर पर आता है। नीरव मोदी फायरस्टार डॉयमंड के फाउंडर और चेयरमैन हैं। नीरव मोदी बॉलीवुड और हॉलीवुड में एक चर्चित नाम है, क्योंकि उसके क्लाइंट की सूची में बॉलीवुड से लेकर हॉलीवुड तक कई नाम शुमार हैं। नीरव को आखिरी बार साल 2013 में ओज फेस्ट के तहत आयोजित पिंक डायमंड कप पोलो चैम्पियनशिप के दौरान जयपुर में देखा गया था, जहां वह बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुआ था। नीरव ने अपने कारोबार की शुरूआत छोटे स्तर पर 15 कर्मचारियों के साथ की थी, जिनकी संख्या अब 1,200 से अधिक है। नीरव के बनाए डायमंड नेकलेस हांगकांग के ऑक्शन में 3.56 करोड़ डॉलर में बिका था। नीरव के आज दुबई, इंडिया और अमेरिका में तक में भी कई स्टोर्स हैं।

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