जानिए, दीपावली के दिन आखिर क्यों किया जाता है मां लक्ष्मी का पूजन

FirstIndia Correspondent Published Date 2018/11/01 02:13

नई दिल्ली। दीपों के पर्व यानि दीपावली पर हर चेहरे पर खुशियां नजर आती है और सभी लोग आपसी भेदभाव को भुलाकर एक-दूसरे को गले लगाते हैं। वहीं दीपावली पर जहां जहां लोग एक ओर अपने पूरे घर एवं प्रतिष्ठानों को सजाते हैं, वहीं इस दिन लोग मां लक्ष्मी की भी पूजा करते हैं। इसलिए दीपावली वाले दिन को लक्ष्मी पूजन के नाम से भी जाना जाता है। यूं तो धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दीपावली का त्योहार मर्यादा पुरूषोत्तम श्रीराम, उनकी पत्नी सीता और छोटे भाई लक्ष्मण के 14 साल का वनवास पूरा कर वापस लौटने की खुशी में मनाया जाता है, लेकिन फिर भी इस दिन मां लक्ष्मी पूजा कर जाती है। ऐसे में जानते हैं कि दीपावली वाले दिन मां लक्ष्मी का पूजन आखिर क्यों किया जाता है..

कहा जाता है कि इस दिन मां लक्ष्मी घर में वास करती हैं। अगर दीवाली में मां लक्ष्मी को खुश कर लिया तो घर में कभी भी धन की समस्या नहीं होती, लेकिन इसी दिन भगवान गणेश को भी पूजा जाता है। बुद्धि और विवेक के प्रतीक माने जाने वाले गणेश को इस दिन मां लक्ष्मी के साथ क्यों पूजा जाता है, इसके बारे में काफी कम लोग जानते हैं। लेकिन हमारे देश में हर त्योहार और उसे मनाने के तरीके के पीछे एक कहानी छिपी होती है। दीवाली पर गणेश और लक्ष्मी की पूजा के पीछे भी एक ऐसी कहानी है।

धार्मि​क मान्यताओं के मुताबिक, देवताओं और दैत्यों ने मिलकर जब समुद्र मंथन किया तो उसमें से 14 रत्न निकले जिसमें देवी लक्ष्मी भी थी। जैसे ही देवी लक्ष्मी समुद्र से बाहर निकली उन्हे पाने के लिए सब आतुर थे। सबसे पहले सन्तों ने देवी लक्ष्मी से आग्रह किया कि आप मेरे पास आ जाओ तो देवी लक्ष्मी ने कहा तुम्हें सात्विक अंहकार है, इसलिए मैं आपके पास नहीं आउंगी। अंहकार मुझे बिल्कुल पसन्द नहीं है। देवाताओं ने आग्रह किया आप इन्द्र देव के नेतृत्व में हमारी हो जाओ।

देवी लक्ष्मी ने कहा मैं आपके पास बिल्कुल नहीं आउंगी। क्योंकि आप देवता बनते हो पुण्य से और पुण्य से देवी लक्ष्मी को प्राप्त नहीं किया जा सकता। फिर देवी लक्ष्मी ने देखा एक ऐसा देव पुरूष है, जो मेरी तरफ ध्यान ही नहीं दे रहा है। देवी लक्ष्मी उनके पास गई तो देखा कि भगवान विष्णु आराम से लेटे हुये थे। देवी लक्ष्मी ने भगवान विष्णु के पैर पकड़ के हिलायें तो विष्णु जी बोले क्या बात है।

देवी लक्ष्मी ने कहा मैं आपको वरना चाहती हूं। विष्णु ने कहा स्वागत है। देवी लक्ष्मी जानती थी भगवान विष्णु मेरी रक्षा करेंगे। उसी समय से देवी लक्ष्मी और भगवान विष्णु एक हो गये। भगवान विष्णु सृष्टि के पालन कर्ता है, इसलिए वे परिश्रमी व पुरूषार्थी है। देवी लक्ष्मी न अंहकारी के पास जाती है न पुण्य कमाने वाले के पास, वे सिर्फ परिश्रमी व पुरूषार्थी के पास जाती है।

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