जानिए, क्यों मनाया जाता है पांच दिनों का दीपोत्सव और क्या है उनके महत्व

FirstIndia Correspondent Published Date 2018/11/01 01:46

नई दिल्ली। मर्यादा पुरूषोत्तम श्रीराम, उनकी भार्या सीता और छोटे भाई लक्ष्मण के 14 साल का वनवास पूरा कर लौटने की खुशी में मनाए जाने वाले पर्व दीपावली को दीपों का पर्व कहा जाता है। इन दिन का लक्ष्मी पूजन के रूप में भी खास महत्व है। यूं तो हिंदू धर्म में सभी त्यौहार एक या दो दिन के होते हैं, लेकिन हिंदू धर्म का सबसे बड़े त्यौहार माने जाने वाला पर्व दीपावली पांच दिनों तक मनाया जाता है, जिसमें हर दिन का अपना महत्व है।

दीपावली के पर्व की शुरूआत धनतेरस के दिन से ही हो जाती है और उसके बाद खुशियों का सिलसिला लगातार पांच दिनों तक नरक चतुर्दशी, दीपावली, गोवर्धन पूजा और भाई दूज के दिन तक चलता रहता है। इन पांचों दिनों तक लोग मिट्टी के दिये जलाकर अपने घरों में रोशनी करते हैं और आपस में मेल—मिलाप का सिलसिला भी चलता रहता है। हालांकि बदलते दौर के साथ ही अब मिट्टी के दियों की जगह सजावटी एवं इलेक्ट्रिक लाइटों से बने दियों ने ले ली है, लेकिन आज भी अधिकांश लोग मिट्टी के दियों का ही इस्तेमाल कर दीपावली का त्यौहार मनाते हैं। जानते हैं इन पांचों दिनों और इनके महत्व के बारे में...

धनतेरस : इस बार धनतेरस 5 नवंबर 2018 के दिन मनाया जाएगा। इस दिन नए बर्तन, सोने के सिक्के, ज्वैलरी खरीदना शुभ माना जाता है। घरों और ऑफिसों की सफाई करने के साथ-साथ इन्हें तरह-तरह की लाइटों से रोशन किया जाता है।

नरक चतुर्दशी : धनतेरस के अगले दिन को छोटी दिवाली के रूप में भी मनाया जाता है, क्योंकि यह दीपावली के एक दिन पहले होता है। वहीं इस दिन को नरक चतुर्दशी भी कहा जाता है। छोटी दिवाली इस बार 6 नवंबर के दिन मनाई जाएगी। इस दिन खासतौर पर दोस्तों और रिश्तेदारों को मिठाई और गिफ्ट्स दिए जाते हैं। कई लोग अपने घरों में भी मिठाइयां बनाते हैं, एक दूसरे को बांटते है और प्रेमपूर्वक दिवाली का जश्न मनाते हैं।

दीपावली : लगातार पांच दिनों तक चलने वाले त्योहारों में दीपावली वाले दिन को सबसे बड़ा और अहम माना जाता है। इस दिन लक्ष्मी पूजन का विधान है। मान्यता है कि मां लक्ष्मी की पूजा से धन के साथ-साथ वैभव का वरदान भी मिलता है। लक्ष्मी पूजन का मुहूर्त इस साल 7 नवंबर के दिन शाम 5 बजकर 57 मिनट से शुरू होकर 7 बजकर 53 मिनट तक रहेगा। इस दौरान परिवार के सभी सदस्य एक साथ मां लक्ष्मी की पूजा करते हैं। पूजा करने के बाद सभी लोग अपने से बड़ों के चरण स्पर्श कर उनका आर्शीवाद लेते हैं।

गोवर्धन पूजा : दीपावली के अगले दिन को गोवर्धन पूजा के रूप में मनाया जाता है। इस साल ये पूजा 8 नवंबर के दिन की जाएगी। कई लोग इसे अन्नकूट के नाम से भी जानते हैं। अन्नकूट या गोवर्धन पूजा भगवान कृष्ण के अवतार के बाद द्वापर युग से प्रारम्भ हुई। इसमें हिन्दू धर्मावलंबी घर के आंगन में गाय के गोबर से गोवर्धनजी की अल्पना बनाकर उनका पूजन करते है। उसके बाद गिरिराज भगवान (पर्वत) को प्रसन्न करने के लिए उन्हें अन्नकूट का भोग लगाया जाता है। इस दिन किसान लोग खेतों में उनके काम आने वाले बेलों की पूजा भी करते हैं। हालांकि अब बेलों का स्थान ट्रैक्टर एवं अन्य आधुनिक चीजों ने ले लिया है और लोग इनकी भी पूजा करते हैं।

भाई दूज : लगातार पांच दिनों तक चलने वाले त्योहारों के क्रम में सबसे आखिर में भाई दूज मनाया जाता है। इस बार भाई दूज 9 नवंबर को मनाया जाएगा। भाई दूज का त्योहार बहन और भाई के प्यार का प्रतीक है। ये त्योहार रक्षाबंधन की तरह ही होता है, फर्क सिर्फ इतना है कि इस दिन राखी नहीं बांधी जाती, बल्कि बहनें सिर्फ अपने भाइयों का तिलक करती हैं और आरती उतारती हैं।

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