कक्षा 1 से 8 तक के बच्चे यहां रोजाना पढ़ने आते हैं, लेकिन विद्यालय प्रशासन की लापरवाही देखिए कि उनको पढ़ाई की जगह सफाई करना सिखाया जा रहा है। विद्यालय का जब निरीक्षण किया गया तो पता चला कि छोटी कक्षाओं के बच्चे वहां खेल रहे हैं और बड़े बच्चे कमरों के अंदर हाथ में झाड़ू और बाल्टी लेकर सफाई कर रहे थे। जब बच्चों से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि विद्यालय में सफाईकर्मी नहीं होने के कारण रोजाना विद्यालय की सफाई करनी पड़ती है।

घर से नहा-धोकर पढ़ने के लिए पहुंचे बच्चों की सारी ऊर्जा सफाई के दौरान खत्म हो जाती है। धूल—मिट्टी से सने होने के बाद उसे पढ़ाई नसीब होती है। बच्चों के लिए यह एक दिन की बात नहीं, बल्कि हर रोज की स्थिति है। आज किसी का तो कल किसी और बच्चे का नम्बर आता है। जिले में प्रारंभिक स्कूलों में सफाईकर्मी नहीं मिलने की दुहाई देकर विभाग मासूमों को सफाई कार्य में झोंक रहा है।

स्कूल की प्रधानाध्यापिका आशा मीणा से जब इस बारे में बात की गई तो उन्होंने बताया कि विद्यालय में 10 अध्यापक और एक प्रधानाध्यापक सहित कुल 11 अध्यापक और अध्यापिका हैं। प्रधानाध्यापिका से जब पूछा तो उनसे जवाब देते नहीं बन रहा था और उन्होंने इधर उधर की बातें करनी शुरू कर दी। ऐसे में बच्चों को इस स्थिति को देखकर यही कहा जा सकता है कि इस विद्यालय में बच्चों के शिक्षा के अधिकार की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही है। जिले समेत प्रदेशभर के ग्रामीण क्षेत्रों के अधिकतर स्कूलों में कमोबेश यही हाल हैं। 

शौचालय कर रहे थे साफ :
दोपहर करीब डेढ़ बजे राउप्रावि रेलवे स्कूल में करीब 15 बच्चे हाथों में झाडू, जाले छुड़ाने वाला डंडा लेकर सफाई करने में जुटे थे। 15 मिनट के बाद स्कूल स्टॉफ आना शुरू हुआ। तब भी बच्चे सफाई करते रहे। तीन-चार बच्चों ने हाथों में बाल्टियां थामी और शौचालयों की सफाई में जुट गए। उनसे पूछा गया कि शौचालय की सफाई रोजाना वे ही लोग ही करते हैं, तो उन्होंने 10-12 बच्चों के नाम गिनाए और कहा हमारे दिन तय हैं, उसी आधार पर सफाई करते हैं। स्कूल में अन्य बच्चे खेलते हुए नजर आए और पारी वाले बच्चे सफाई करने में।

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इस स्कूल में नन्हें हाथों को किताबों की बजाय पकड़ाई जाती हैं झाडू

Published Date 2017/12/13 06:54,Updated 2017/12/13 07:22, Written by- FirstIndia Correspondent
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बयाना (भरतपुर)। अक्सर किसी भी स्कूल में आपने बच्चों के हाथों में स्कूल बैग या फिर किताबें ही देखी होंगी। लेकिन अगर आपको किसी स्कूल के अंदर पढ़ने वाले बच्चों के हाथों में किताबों के बजाय झाडू नजर आए तो ये जरूरी नहीं कि यहां कोई स्वच्छता अभियान चल रहा ​होगा। क्योंकि हो सकता है ये कुछ और ही हो। दरअसल, ऐसा ही ​वाकया पेश आया है, बयाना कस्बे के एक राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय में।

बयाना कस्बे में संचालित राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय रेलवे बयाना में जब फर्स्ट इंडिया न्यूज संवाददाता और उनकी टीम पहुंची, तो चौंकाने वाली स्थिति सामने आई। यहां बच्चों को पढ़ाई कराने के बजाय सरकारी स्कूलों में बच्चों से दूसरे यानि साफ—सफाई जैसे कार्य करवाए जा रहे थे। इस स्कूल की स्थापना 1945 में हुई थी। लगभग 72 वर्ष बाद भी विद्यालय की यह हालत है कि शिक्षा के नाम पर बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ किया जा रहा है।

कक्षा 1 से 8 तक के बच्चे यहां रोजाना पढ़ने आते हैं, लेकिन विद्यालय प्रशासन की लापरवाही देखिए कि उनको पढ़ाई की जगह सफाई करना सिखाया जा रहा है। विद्यालय का जब निरीक्षण किया गया तो पता चला कि छोटी कक्षाओं के बच्चे वहां खेल रहे हैं और बड़े बच्चे कमरों के अंदर हाथ में झाड़ू और बाल्टी लेकर सफाई कर रहे थे। जब बच्चों से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि विद्यालय में सफाईकर्मी नहीं होने के कारण रोजाना विद्यालय की सफाई करनी पड़ती है।

घर से नहा-धोकर पढ़ने के लिए पहुंचे बच्चों की सारी ऊर्जा सफाई के दौरान खत्म हो जाती है। धूल—मिट्टी से सने होने के बाद उसे पढ़ाई नसीब होती है। बच्चों के लिए यह एक दिन की बात नहीं, बल्कि हर रोज की स्थिति है। आज किसी का तो कल किसी और बच्चे का नम्बर आता है। जिले में प्रारंभिक स्कूलों में सफाईकर्मी नहीं मिलने की दुहाई देकर विभाग मासूमों को सफाई कार्य में झोंक रहा है।

स्कूल की प्रधानाध्यापिका आशा मीणा से जब इस बारे में बात की गई तो उन्होंने बताया कि विद्यालय में 10 अध्यापक और एक प्रधानाध्यापक सहित कुल 11 अध्यापक और अध्यापिका हैं। प्रधानाध्यापिका से जब पूछा तो उनसे जवाब देते नहीं बन रहा था और उन्होंने इधर उधर की बातें करनी शुरू कर दी। ऐसे में बच्चों को इस स्थिति को देखकर यही कहा जा सकता है कि इस विद्यालय में बच्चों के शिक्षा के अधिकार की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही है। जिले समेत प्रदेशभर के ग्रामीण क्षेत्रों के अधिकतर स्कूलों में कमोबेश यही हाल हैं। 

शौचालय कर रहे थे साफ :
दोपहर करीब डेढ़ बजे राउप्रावि रेलवे स्कूल में करीब 15 बच्चे हाथों में झाडू, जाले छुड़ाने वाला डंडा लेकर सफाई करने में जुटे थे। 15 मिनट के बाद स्कूल स्टॉफ आना शुरू हुआ। तब भी बच्चे सफाई करते रहे। तीन-चार बच्चों ने हाथों में बाल्टियां थामी और शौचालयों की सफाई में जुट गए। उनसे पूछा गया कि शौचालय की सफाई रोजाना वे ही लोग ही करते हैं, तो उन्होंने 10-12 बच्चों के नाम गिनाए और कहा हमारे दिन तय हैं, उसी आधार पर सफाई करते हैं। स्कूल में अन्य बच्चे खेलते हुए नजर आए और पारी वाले बच्चे सफाई करने में।

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