टॉप-5 स्किल्स में बनाएं करियर की योजना, आपके कदम चूमेंगी संभावनाएं

Pawan Tailor Published Date 2018/02/19 12:23

स्विट्जरलैंड में एक 16 वर्षीय छात्र लोअर सेकेंडरी स्कूल में तीन वर्ष बिताने के तुरंत बाद अपने कॅरियर की राह तलाश लेता है। बाद में अपर सेकेंडरी स्कूल में उसके पास व्यावसायिक शिक्षा और प्रशिक्षण (वीईटी) या पूर्व-विश्वविद्यालयी पाठ्यक्रमों की तरफ जाने का विकल्प है। उनमें से दो-तिहाई अपनी पसंद के कौशल में व्यावसायिक प्रशिक्षण की राह पकड़ते हैं और इस प्रशिक्षण के आधार पर औद्योगिक नौकरियों में शामिल हो जाते हैं। अपनी इस वोकेशनल एजुकेशन एंड ट्रेनिंग की पृष्ठभूमि के बूते उद्योग में शीर्ष नौकरियां हासिल कर सकते हैं।

दूसरी ओर, भारत में औसतन विद्यार्थी औपचारिक शिक्षा वाली डिग्री हासिल करने के लिए विश्वविद्यालयों में जाना पसंद करते हैं। यूनिवर्सिटी से बाहर निकलते समय उनके हाथ में डिग्री तो होती है, लेकिन यह डिग्री उन्हें विषय की सैद्धांतिक जानकारी देती है और किसी खास कौशल में उनका प्रशिक्षण या तो नहीं होता या न के बराबर होता है। ऐसे में वे उद्योगों में काम करने के लिए तैयार नहीं माने जाते हैं। उनके रेज्यूमे में मास्टर डिग्री का उल्लेख बेशक हो जाता है, लेकिन 'कौशल अंतराल' के कारण वे बेरोजगार रह जाते हैं। भारतीय युवाओं का एक बड़ा हिस्सा स्नातक और स्नातकोत्तर में उत्तीर्ण होने के बावजूद बेरोजगार रह जाता है, क्योंकि वह नौकरी के लिए तैयार नहीं होता। दूसरी तरफ, तथ्य यह भी है कि भारतीय अर्थव्यवस्था की मांग को पूरा करने के लिए 2022 तक भारत को लगभग 70 करोड़ कुशल कामगारों की जरूरत होगी।

भारतीय स्किल डेवलपममेंट यूनिवर्सिटी (बीएसडीयू) के अध्यक्ष डाॅ. एसएस पाब्ला कहते हैं कि 'वाणिज्य, कला और विज्ञान की धाराओं से ग्रेजुशन करने के बावजूद विद्यार्थियों का बड़ा तबका उच्च शिक्षा या स्नातकोत्तर शिक्षा पाने के लिए संघर्ष कर रहा है, जबकि वहां भी उनके 100 फीसदी प्लेसमेंट वाला आश्वासन नहीं है। इस परिदृश्य में हम उन विद्यार्थियों के मानस की कल्पना कर सकते हैं, जिन्होंने अभी 10+2 पास ही की है और एक बेहतरीन कॅरियर का सपना देख रहे हैं। हालांकि, भारत सरकार रोजगार सृजन के लिए कड़ी मेहनत कर रही है, लेकिन यह भी उतना ही महत्व रखता है कि विद्यार्थी देश के 'कौशल अंतराल' को भरने के लिए आगे आएं।

यदि आप शुरुआती उम्र में अपना कॅरियर बनाने के इच्छुक हैं, तो प्रशिक्षुता या नौकरी प्रशिक्षण के माध्यम से कौशल की शिक्षा प्राप्त करने पर जोर दें, क्योंकि कौशल हासिल करने का कोई शॉर्टकट नहीं होता। बीएसडीयू विभिन्न क्षेत्रों में कौशल प्रमाणपत्र से लेकर स्नातक, परास्नातक और पीएचडी तक के कार्यक्रम प्रदान करता है। 10+2 छात्रों के लिए शीर्ष 5 बैचलर ऑफ वोकेशनल (बी. वोक.) पाठ्यक्रम निम्नानुसार हैं, जो आपके कॅरियर की दिशा तय कर सकते हैं- 

1. इलेक्ट्रिकल स्किल्स :
सीखा जाने वाला कौशल : बी. वोक. कार्यक्रम का उद्देश्य आम तौर पर छात्रों को साउंड टैक्नीकल नाॅलेज और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के व्यावहारिक कौशल के साथ लैस करना है। व्यावसायिक मॉड्यूल में इंजीनियरिंग विज्ञान, विद्युत सिद्धांत, विद्युत स्थापना, इलेक्ट्रॉनिक सिद्धांत, मोटर और ट्रांसफार्मर, सिंगल फेस और 3 फेस सर्किट, विद्युत नियंत्रण सर्किट, प्रोग्रामेबल लॉजिक कंट्रोलर प्रोगामिंग आदि।

अवसर : बी. वोक. करने के बाद विद्यार्थी ऑफिस मैंटनेस इलेक्ट्रिशियन, इलेक्ट्रिक्ल इंस्टालेशन इलेक्ट्रिशियन, इलेक्ट्रिकल सर्विस फिटर और सुपरवाइजर जैसे जॉब्स कर सकता है या फिर एम. वोक. कार्यक्रमों में शामिल होकर उच्च कुशल नौकरियों के लिए विकल्प चुन सकते हैं।

2. पॉलीमैकेनिक स्किल्स :
सीखा जाने वाला कौशल : मशीनिंग, टर्निंग, मिलिंग, ग्राइंडिंग, हैंड स्किल्स, एसेम्बली, पेनामेटिक्स, न्यूमेटिक्स, प्रोग्रामिंग और ऑपरेशन आदि। पॉलीमैकेनिक में कुशल लोग प्रोडक्शन मशीनरी और उपकरणों के लिए पाटर््स इंस्टाॅल कर सकते हैं। इस पेशे में लाॅजिक और आॅटोमेशन कंट्रोल की जरूरत होती है, साथ ही, संबंधित बुनियादी विद्युत और सर्किट वाले काम में कौशल की आवश्यकता होती है।

अवसर : पॉलीमैकेनिक डिग्री में बी. वोक. डिग्रीधारी कई तरह के विनिर्माण कौशल में प्रशिक्षित होते हुए संबंधित उद्योग में आसानी से काम करने में सक्षम है। औद्योगिक और विनिर्माण सयंत्रों की एक बड़ी शृंखला में उन्हें पिने काम के अनुभव और संबंधित उद्योग की जरूरतों के आधार पर टैक्नीशियन, प्रैक्टिशनर और सुपरवाइजर के रूप में नियुक्त किया जा सकता है। 

3. कारपेंटरी स्किल्स :
सीखा जाने वाला कौशल : कारपेंटरी में बी.वोक डिग्री के तहत कैबिनेट बनाने, इंटीरियर वुडवर्क और फर्नीचर के निर्माण आदि कामों के लिए तैयार करता है। छात्र जर्मनी और अन्य यूरोपीय देशों से प्राप्त नवीनतम मशीनों पर काम करते हैं और नवीनतम लकड़ी के उपकरण और सामग्री का उपयोग करना सीखते हैं। वे विश्व स्तर के फर्नीचर और फिक्स्चर बनाने में सक्षम हो जाते हैं। वे हैच लाइनिंग, आर्कट्रेव्स (खिडकी दरवाजों का ढांचा), स्कर्टिंग (झालर या लकड़ी की पट्टी) ताले और चिटकनी आदि को बनाने और लगाने, लकड़ी से छत की डिजाइन करने, दरवाजे और खिड़कियों पर नक्काशी करने और उन्हें फिट करने, डोर लाइनिंग बनाने और स्थापित करने जैसे तमाम कामों में सिद्धहस्त हो जाते हैं।

अवसर : जीवनशैली में परिवर्तन के साथ-साथ आधुनिक फर्निशिंग की मांग राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर बढ़ रही है। इतना ही नहीं डिग्रीधारकों के लिए सुपरवाइजर और लकड़ी उद्योग में प्रबंधक के रूप में पर्याप्त अवसर हैं। ई-कॉमर्स की दुनिया में भी इनोवेटिव फर्नीचर के लिए एक बड़ा बाजार बनाया है, ऐसे में छात्र खुद अपना स्टार्टअप भी शुरू कर सकते हैं। इसके अलावा एक और विकल्प फर्निशिंग ब्रांड के साथ मैन्युफैक्चरिंग का भी हो सकता है जो लकड़ी के फर्नीचर का बड़े पैमाने पर उत्पाद करते हैं।

4. आॅटोमोटिव स्किल्स :
सीखा जाने वाला कौशल : आॅटोमोटिव यानी मोटर वाहन कौशल में बी. वोक. के अंतर्गत छात्रों को ऑटोमोबाइल के सभी प्रमुख तत्व सिखाए जाते हैं जैसे मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, इलेक्ट्रॉनिक, सॉफ्टवेयर और सेफ्टी इंजीनियरिंग ताकि इनका इस्तेमाल मोटरसाइकिलों का निर्माण व परिचालन, मोटर वाहन और ट्रक और उनकी सबंधित उपप्रणालियों के निर्माण व डिजाइन में किया जा सके। पाठ्यक्रम के उन्नत संस्करण में इंजन के बारे में सिखाने से लेकर वाहनों को संशोधित करना बताया जाता है। सभी प्रकार के ऑटोमोबाइल की मरम्मत और रखरखाव विस्तार से बताया जाता है।

अवसर : किसी ऑटोमोटिव वर्कशॉप में काम करें या अपना खुद का ऑटो वर्कशॉप खोलना मोटर वाहन में बी.वोक. डिग्री लेने वालों के लिए दो सबसे आकर्षक विकल्प हैं। विभिन्न ऑटोमोटिव कंपनियों के विनिर्माण संयंत्रों में मशीन ऑपरेटर, पर्यवेक्षकों और प्रबंधकों के रूप में कई अवसर भी हैं। बी. वोक. डिग्रीधारकों को ऑटो विनिर्माण क्षेत्र, ऑटो सहायक क्षेत्र, अंतरराष्ट्रीय मानकों के डिजाइन और इंजीनियरिंग से जुड़े उत्पाद और ऑटो निर्माताओं के लिए समाधान, कनेक्टेड कार प्रणाली, ऑडियो एंड वीडियो प्रोडक्ट, उद्यम स्वचालन समाधान और इससे जुड़ी सेवाओं में कई अवसर मौजूद हैं।

5. आईटी और नेटवर्किंग हार्डवेयर स्किल्स :
सीखा जाने वाला कौशल : छात्रों को सूचना भंडारण, प्रसंस्करण और संचार के क्षेत्र में प्रशिक्षण मिलता है, आईटी और नेटवर्किंग कौशल में बी. वोक. के तहत कंप्यूटर का इस्तेमाल कर सकते हैं। नेटवर्किंग कंस्ट्रक्शन, नेटवर्क का उपयोग और प्रबंधन, जिसमें हार्डवेयर (केबल बिछाने, हब, पुल, स्विच, रूटर आदि) भी शामिल है, टेलिकम्युनिकेशन प्रोटोकॉल और सॉफ्टवेयर का चुनाव और इस्तेमाल, नेटवर्क का उपयोग और इस्तेमाल और आपरेशन नीतियों की स्थापना आदि। एक नेटवर्क आर्किटेक्ट में सभी कर्मचारियों के इस्तेमाल के लिए नेटवर्क सिस्टम बनाने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी का उपयोग करने जैसे कौशल का होना जरूरी है। इन नेटवर्कों में लोकल एरिया नेटवर्क (लेन), वाइड एरिया नेटवर्क (वेन), इंट्रानेट्स और एक्स्ट्रानेट्स शामिल हो सकते हैं।

अवसर : डिजिटलीकरण, सूचना प्रौद्योगिकी, स्मार्ट शहरों और औद्योगिक स्वचालन में वृद्धि की ओर देखते हुए आज इन क्षेत्रों में कौशल बहुत महत्वपूर्ण हैं। छात्र नेटवर्क विशेषज्ञ या नेटवर्क सेवा तकनीशियन, नेटवर्क व्यवस्थापक, नेटवर्क इंजीनियर, नेटवर्क विश्लेषक/प्रोग्रामर, नेटवर्क प्रबंधक और नेटवर्क सोल्यूशन आर्किटेक्ट बन कर प्रबंधन या संगठनात्मक आवश्यकता के अनुसार नेटवर्क समाधान बनाने के लिए काम करने जैसे अवसरों को हासिल कर सकता है।

पाठ्यक्रमों की पेशकश करने वाले विश्वविद्यालय—संस्थान :
1. भारतीय स्किल डेवलपमेंट यूनिवर्सिटी, जयपुर स्विस ड्यूल सिस्टम ऑफ स्किल्स एजुकेशन पर काम करता है, जिसका कंसेप्ट 'एक मशीन पर एक विद्यार्थी' है। यहां विभिन्न कौशल क्षेत्रों में सर्टिफिकेट, डिप्लोमा, एडवांस डिप्लोमा, बैचलर ऑफ वोकेशन, मास्टर ऑफ वोकेशन और पीएचडी जैसे विशुद्ध कौशल आधारित कार्यक्रम प्रदान करती है।
2. राजस्थान आईएलडी स्किल यूनिवर्सिटी, जयपुर भी एक ऐसा विश्वविद्यालय है जो मात्र कौशल आधारित प्रोग्राम पेश करता है। 
3. देश में छह और कौशल विश्वविद्यालय हैं, जो बीटेक, बीबीए, बीसीए, आदि जैसे औपचारिक पाठ्यक्रमों के साथ कौशल कार्यक्रम पेश करते हैं। ये हैं :

  • टीम लीज स्किल्स यूनिवर्सिटी अहमदाबाद
  • सिंबियोसिस स्किल एंड ओपन यूनिवर्सिटी पुणे
  • हरियाणा विश्वकर्मा स्किल यूनिवर्सिटी गुडगांव
  • सेकोम स्किल यूनिवर्सिटी कलकत्ता
  • सेंचुरियन यूनिवर्सिटी भुवनेश्वर

यूजीसी ने सभी सार्वजनिक विश्वविद्यालयों को बी.वो. और एम. वोक कार्यक्रम प्रदान करने की अनुमति दी है। कुछ विश्वविद्यालयों ने थीसिस की पेशकश शुरू कर दी है। एआईसीटीई भी इस प्रकार के कौशल कार्यक्रमों को बढ़ावा देता है।

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