VIDEO : खेलों का काला कारोबार : लाखों की कमाई और बदले में फर्जी सर्टिफिकेट, साथ में नौकरी का झांसा

Naresh Sharma Published Date 2018/06/13 20:24

जयपुर (नरेश शर्मा)। देश के कई हिस्सों में खेलों का काला बाजार चल रहा है और इसकी दस्तक अब राजस्थान में भी हो चुकी है। पैसे लेकर खिलाड़ियों को नौकरी के लालच में सर्टिफिकेट देना इस कारोबार का मुख्य हिस्सा है। इस कारोबार में पूरी गैंग काम कर रही है और कुछ सरकारी अधिकारी भी इसमें मिले हुए हैं। आज एक बार फिर फर्स्ट इंडिया आज इस काले कारोबार का भंडाफोड़ कर रहा है। खेल व खिलाड़ियों के हित में फर्स्ट इंडिया स्टिंग करके खेल का कारोबार करने वालों की हकीकत आपके सामने लाया है।

खेलों से जुड़े इस काले कारोबार की तस्वीर को देखकर आप यकीनन चौंक जाएंगे। यह तस्वीर राज्य के कई खिलाड़ियों के पास पहुंच चुकी होगी। हर तस्वीर मात्र से कई खिलाड़ी फर्जी खेल आयोजन की गैंग में फंस भी गए होंगे। आप भी देखिए, जयपुर के स्पोट्स ऑथोरिटी ऑफ इंडिया सेंटर पर नेशनल रुरल गेम्स होने का प्रचार किया जा रहा है। साई सेंटर देश के नामी सेंटर होते हैं और जयपुर में यह सेंटर विद्याधर नगर स्टेडियम में मौजूद है। यहां पर 15 जून से बड़े आयोजन को ढिढोरा पीटा जा रहा है।

खेल परिषद के विद्याधर नगर स्टेडियम और केंद्रीय खेल मंत्रालय के साई सेंटर का नाम देखकर हर कोई यही सोचेगा कि वास्तव में बड़ा खेल आयोजन हो रहा है। 15 खेलों के खिलाड़ियों को बुलाया जा रहा है। 12 साल से 19 साल के युवाओं को गुमराह किया जा रहा है और आयोजन स्थल भी होगा तो सरकारी। आयोजक भारतीय ग्रामीण खेल महासंघ को बताया जा रहा है। 

अब आपकों हकीकत से रुबरु कराते हैं। दरअसल, यह महासंघ पूरी तरह फर्जी है। हरियाणा में सोसाइटी एक्ट में इस नाम से संस्था रजिस्टर्ड करा ली गई और अब खेलों के आयोजन के नाम पर बड़ी कमाई की जा रही है। चाहे भारतीय खेल मंत्रालय हो या फिर भारतीय ओलिंपिक संघ या फिर राजस्थान खेल विभाग, किसी की सूची में भी ग्रामीण खेल महासंघ का नाम नहीं है, लेकिन नाम इस तरह रखा गया है कि हर कोई झांसे में आ जाए। मिलीभगत का खेल तो यहां तक है कि खेल परिषद के अधिकारियों ने विद्याधर नगर स्टेडियम में इस आयोजन के लिए अनुमति भी दे दी। आयोजन के उद्घाटन व समापन समारोह के दिन व समय भी तय हो चुके हैं।

इस फर्जी आयोजन से कमाई किस तरह होती है, इसकी बानगी भी देख लीजिए। पूरा पर्चा छपवा रखा है आयोजकों ने। हर खिलाड़ी से 1 हजार 6 सौ रुपए एंट्री फीस के नाम से वसूले जा रहे हैं। जिनको मैडल चाहिए, उनसे अलग से बात होगी और पांच से 10 हजार रुपए लिए जाते हैं। यानों लाखों का कारोबार। खिलाड़ियों के लिए ईनामी राशि भी रखी गई है, जैसे कोई लॉटरी खुलने वाली है। लेकिन खिलाड़ियों को पकड़ाया जाता है एक फर्जी सर्टिफिकेट, जिसकी कोई वैल्यू नहीं होती। इन सर्टिफिकेट के आधार पर नौकरी मिलने का झांसा भी दिया जाता है।

अब ध्यान से देखिए और सुनिए। अब फर्स्ट इंडिया इन आयोजकों की पोल खोलेगा, उन्हीं की जुबानी। फर्स्ट इंडिया को जब आयोजन की सूचना मिली, तो संवाददाता ने एकेडमी संचालक बनकर आयोजक से बात की। सामने की तरफ से बात करने वाला शख्स अपने आपको रूरल गेम्स फैडरेशन ऑफ इंडिया को महासचिव डॉक्टर दीपेंद्र आर्य बताता है। आयोजकों ने प्रचार सामग्री पर सात मोबाइल नंबर लिख रहे हैं। इनमें से एक नंबर 9034445784 पर फोन किया, तो पूरी हकीकत ही सामने आ गई है। 

क्या हुई फोन पर बातचीत :
रिपोर्टर : मैं जयपुर से बोल रहा हूं। आपका जो विद्याधर नगर स्टेडियम में आयोजन हो रहा है, उसमें हमें भी क्लबों की एंट्री करानी है। क्या करना है इसके लिए?
दीपेंद्र आर्य : एक बार आप जो मेरा दूसरा नंबर हैं ना, उस पर व्हाट्स ऐप कर दो आप। डिटेल आपको भेज देंगे। फॉर्म वगैरह आपको भेज देंगे।
रिपोर्टर : सर उसकी कोई एंट्री फीस वगैरह? आप बता देते।
दीपेंद्र आर्य : आपको सारी डिटेल मिल जाएगी। फॉर्म वगैरह व्हाट्सऐप से भेज देते हैं।
रिपोर्टर : कब तक हम एंट्री कराए?
दीपेंद्र आर्य : आप वहीं (विद्याधर नगर स्टेडियम) करा देना 15 को।
रिपोर्टर : अच्छा सेम डे ही हो जाएगी। यानी पहले एंट्री कराने की जरूरत नहीं है।
दीपेंद्र आर्य : आप एक बार व्हाट्सऐप करो, आपको सब डिटेल मिल जाती है।
रिपोर्टर : एक चीज मैं और पूछ रहा था। हमें कोई सर्टिफिकेट मिलेगा या नहीं मिलेगा।
दीपेंद्र आर्य : सर्टिफिकेट तो सबको मिलेगा।
रिपोर्टर : सर हम तो एकेडमी चलाते हैं अलग-अलग खेलों की, तो इस सर्टिफिकेट से क्या हमें फायदा मिलेगा?
दीपेंद्र आर्य : सर देखो फायदे का तो यह है कि, इस चीज का तो क्या बताएं?
रिपोर्टर : नौकरी वगैरह में कोई फायदा मिलता हो तो...
दीपेंद्र आर्य : नौकरी में तो, अब तक तो ले रहे हैं प्लेयर, आर्मी भर्ती वगैरह में।
रिपोर्टर : सर आपका आयोजन मान्यता प्राप्त तो हैं ना? हम बच्चों को लेकर आए तो।
दीपेंद्र आर्य : यह महासंघ सोसाइटी एक्ट के अंडर रजिस्टर्ड है और कभी नेहरू युवा केंद्र से इसको मान्यता मिल जाती है। मैन मकसद बच्चों को प्रेरित करना व खिलाना है।
रिपोर्टर : यहां हम इसकी एसोसिएशन बनाएं तो बना सकते हैं क्या?
दीपेंद्र आर्य : सर वहां पर 15 को बात करेंगे। इस तरह की सारी बातें बैठकर होती है, ठीक है ना। वहां करते हैं।

तो देखा आपने खेलों का फर्जी कारोबार किस तरह होता है। खिलाड़ियों को किस तरह के सब्जबाग दिखाए जाते हैं और किस तरह मान्यता का झूठा प्रचार किया जाता है। खिलाड़ी इस दलदल में लगातार फंसते जा रहे हैं और फर्जी टूर्नामेंट पर नौकरी के नाम पर पैसे खर्च कर देते हैं। सवाल यह है कि बिना जांच के खेल परिषद ने इस आयोजन के लिए विद्याधर नगर स्टेडियम की स्वीकृति कैसे दे दी। कोई भी संघ बिना अनुमति साई सेंटर का नाम उपयोग कैसे कर सकते हैं। ऐसे में क्या साई भी इस तरफ कोई कदम उठाएगी, यह भविष्य के गर्भ में है।

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