सिरोही : जल्द शुरू होगा मदर मिल्क बैंक, मां के दूध से वंचित बच्चों को मिलेगी जिंदगी

Published Date 2017/11/23 04:22, Written by- FirstIndia Correspondent

सिरोही। जिला अस्पताल के जनाना परिसर में बन रहा मदर मिल्क बैंक इसी वित्तीय वर्ष में शुरू हो जाएगा। मदर मिल्क बैंक की स्थापना होने से जिले में शिशु मृत्यु दर पर नियंत्रण और कुपोषण को खत्म करने में काफी हद तक मदद मिलेगी। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की स्टेट टीम ने मदर मिल्क बैंक के निर्माण कार्य का आज निरीक्षण किया।

राज्य सलाहकार योग गुरू देवेंद्र अग्रवाल ने बताया कि मदर मिल्क बैंक का काम तेजी से किया जा रहा है और इसी वित्तीय वर्ष में इसे पूरा किया जाएगा। इसका काम अंतरराष्‍ट्रीय स्तर का होगा। मदर मिल्क बैंक में स्थानीय अस्पताल के छह नर्सिंग स्टाफ, दो चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी और प्रभारी अधिकारी लगाया जाएगा।

प्रभारी अधिकारी के रूप में शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. आरपी कोठारी का चयन किया गया है। जबकि, जिला अस्पताल में पहले से ही नर्सिंग स्टाफ की कमी होने से अन्य जगह से स्टाफ लगाया जाएगा। मदर मिल्क बैंक के स्टाफ को 7 से 12 दिसंबर तक अलवर में प्रशिक्षण दिया जाएगा।

जनाना अस्पताल परिसर में 75 लाख रुपए की लागत से मदर मिल्क बैंक तैयार हो रहा है, जिसके फाउंडेशन का काम पूरा हो चुका है। इस भवन का काम अंतरराष्ट्रीय स्तर का होगा। पूरी यूनिट तैयार करने में करीब 5 करोड़ रुपए खर्च होंगे। इसमें इलेक्ट्रॉनिक ब्रेस्ट पंप, मल्टी फंक्शनल स्टरलाइजर, होल्कर मैथड पाश्चुराइजर, हॉट एयर ओवन, लेमिनर एयर फ्लो, सीलिंग मशीन समेत कई अत्याधुनिक उपकरण लगाए जाएंगे। 

क्या है मदर मिल्क बैंक और क्यों पड़ी जरूरत :
मदर मिल्क बैंक चिकित्सा विभाग का ही एक उपक्रम है, जहां धात्री माताएं स्वेच्छा से अपना दूध दान कर सकेगी। मदर मिल्क बैंक में जमा होने वाले दूध को एनआईसीयू में मौत से जूझ रहे एवं किन्हीं चिकित्सकीय कारणों से मां का दूध नहीं मिलने वाले शिशुओं को यह दूध नि:शुल्क दिया जाएगा, ताकि उनकी जान बचाई जा सके। जिले में शिशु मृत्यु दर पर नियंत्रण और कुपोषण को खत्म करने के लिए इसकी स्थापना की जा रही है।

क्या होगा फायदा :
एनआईसीयू में विभिन्न कारणों से मरने वाले 100 बच्चों में से 16 बच्चों को यह दूध पिलाकर बचाया जा सकेगा।
कुपोषित बच्चे की रिकवरी की संभावना 6 से 8 गुणा तक बढ़ जाती है। 
बच्चे की रिकवरी 40 प्रतिशत तेजी से होती है, यानी 10 दिन भर्ती रहने वाला बच्चा 6 दिन में ठीक हो जाएगा।

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