कार्यकारी प्रदेशाध्यक्ष बनाने के फार्मूले पर राहुल गांधी का नया प्रयोग

Dinesh Kumar Dangi Published Date 2018/06/12 09:38

जयपुर (दिनेश डांगी)। कांग्रेस आलाकमान पार्टी की मजबूती के लिए कईं नए नए प्रयोग कर रहे हैं। इसके लिए पार्टी ने हर राज्य में कार्यकारी प्रदेशाध्यक्ष बनाने का फार्मूला अपनाया है। उड़ीसा, एमपी और छग जैसे चुनावी राज्यों से इसकी शुरुआत भी कर दी है। राजस्थान में भी जल्द दो से चार कार्यकारी प्रदेशाध्यक्ष बनाने की प्रक्रिया चल रही है। बाद में इन्हीं कार्यकारी पीसीसी चीफ में से एक को परफोर्मेंस के आधार पर प्रदेशाध्यक्ष बनाने की योजना है।

राजस्थान विधानसभा का चुनावी रण जल्द ही सजने वाला है। इससे पहले कांग्रेस संगठन को मजबूत करने औऱ सोशल इंजीनियरिंग को साधने में जुटी हुई है। चुनावी राज्यों में जीत दर्ज करने के लिए आलाकमान राहुल गांधी कार्यकारी प्रदेशाध्यक्ष बनाने का नया फार्मूला अपनाया है। उड़ीसा, एमपी और छत्तीसगढ़ सहित कईं राज्यों में कार्यकारी प्रदेशाध्यक्ष बनाए जा चुके हैं और अब बारी राजस्थान की है।

बात अगर राजस्थान की करें तो इससे पहले भी पांच कार्यकारी प्रदेशाध्य़क्ष बनाए जा चुके हैं। अबरार अहमद, परसराम मोरदिया, जुगल काबरा और गोपाल सिंह ईडवा कार्यकारी प्रदेशाध्यक्ष रह चुके हैं। लेकिन इससे पहले सिर्फ औपचारिकता के तौर पर कार्यकारी प्रदेश अध्यक्षों की भूमिका होती थी। यानि चुनाव प्रचार के दौरान पीसीसी मुख्यालय पर एक बाबू की तरह उसे लगा दिया जाता था, लेकिन अब राहुल गांधी ने इस पद को पावरफुल बनाने की तैयारी कर ली है।

यानि कार्यकारी प्रदेशाध्यक्ष को अलग अलग जोन और सीटों में काम करने की जिम्मेदारी दी जाएगी। बाद में वर्किंग परफोर्मेंस के आधारी पर उन्हीं में से एक को पीसीसी चीफ बनाने जाने की पूरी प्लानिंग है। राजस्थान में दो से चार कार्यकारी पीसीसी चीफ बनाने की प्रक्रिया जारी है। हालांकि बीच में पीसीसी नेतृत्व ने राजस्थान में यह फार्मूला नहीं लागू करने का सुझाव दिया था, लेकिन आलाकमान ने उस प्रस्ताव को नहीं माना। लिहाजा कार्यकारी प्रदेशाध्यक्षों के नामों की खोज लगभग पूरी हो चुकी है।

सूत्रों के मुताबिक, विधायक महेन्द्रजीत सिंह मालवीय, सांसद रघु शर्मा, रघुवीर मीणा, गोपाल सिंह, मास्टर भंवरलाल मेघवाल, लालचंद कटारिया, बृजेन्द्र ओला और रमेश मीणा में से चार नामों पर लगभग सहमति बन चुकी है। हालांकि इसके लिए लॉबिंग जारी है और हर गुट अपने अपने नेताओं को बनाने की जुगत में जुटा हुआ है, लेकिन आलाकमान सियासी और जातिगत समीकरणों के ध्यान में रखते ही कार्यकारी प्रदेशाध्यक्ष बनाएगा।

गौरतलब है ​कि इससे पहले कभी भी कांग्रेस में कार्यकारी प्रदेशाध्यक्ष बनने को लेकर कोई इंट्रेस्ट नहीं लेता था, लेकिन भविष्य में उन्हीं में से एक पीसीसी चीफ बनाने के आहट के साथ ही बड़े—बड़े नेता इस पद को पाने में जुट गए हैं। बहरहाल, ऐसे में अब देखना है कि इस पद पर कौनसा गुट और कौनसा नेता बाजी मारता है।

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