नवजात की मौत ने अस्पताल प्रशासन की कार्य—व्यवस्था को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है। इसके पीछे का कारण यह है कि अस्पताल में 12 दिन पहले 4 मई को ही करोड़ों रुपए की लागत से तैयार सबसे बड़े NICU यानि नवजातों की क्रिटिकल केयर यूनिट का उद्घाटन किया गया था। 105 बैड के इस एनआईसीयू को सिर्फ इसलिए शुरू नहीं किया गया, क्योंकि वहां के स्टॉफ की ट्रेनिंग पूरी नहीं हो पाई है।

हालांकि, मीडिया में खबर आने के बाद हरकत में आए अस्पताल प्रशासन ने आनन-फानन में एनआईसीयू को बुधवार को शुरू कर दिया। लेकिन घटना ने सबसे बड़ा सवाल ये खड़ा किया है कि आखिर मौत के बाद ही धरती के भगवान क्यों जागते हैं? क्या एनआईसीयू की विधिवत शुरूआत करने से पहले अस्पताल के कर्ताकर्ताओं को यह याद नहीं आई कि बगैर दक्ष स्टॉफ के एनआईसीयू को कैसे ऑपरेट किया जाएगा।

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जेके लोन अस्पताल : ताले में पड़ा रहा वेंटिलेटर, बाहर मासूम ने तोड़ा दम

Published Date 2018/05/16 07:16, Written by- FirstIndia Correspondent

जयपुर। सरकारी ताले में वेंटिलेटर और अस्पताल में दम तोड़ते मासूम। जी हां, कुछ ऐसा ही हो रहा है, देशभर के सरकारी व निजी अस्पतालों में। सर्वाधिक एनआईसीयू बैड का तमगा हासिल करने वाले राजधानी के जेके लोन अस्पताल में, जहां प्रशासनिक अधिकारियों की बड़ी लापरवाही के चलते एक मासूम को वेंटिलेंटर नहीं मिला और उसे अपनी जान तक गंवानी पड़ गई।

दरअसल, चौमूं निवासी अनीता सागर की चौमूं के एक निजी अस्पताल में डिलीवरी हुई। बच्चे की हालत खराब होने के चलते उसे परिजन चौंमू में शिवा निकेतन के नाम से क्लिनिक चलाने वाले जेके लोन के डॉ. योगेश यादव के पास ले गए। यादव की सलाह पर सोमवार रात 9 बजे नवजात को जेके लोन अस्पताल में लाया गया, जहां उसे मंगलवार सुबह 9 बजे तक वेंटिलेटर नहीं मिल सका। नवजात को एम्बूलेंस के सहारे ऑक्सीजन दी गई, लेकिन जनरल वार्ड की अव्यवस्थाओं के बीच मासूम का दम टूट गया।

नवजात की मौत ने अस्पताल प्रशासन की कार्य—व्यवस्था को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है। इसके पीछे का कारण यह है कि अस्पताल में 12 दिन पहले 4 मई को ही करोड़ों रुपए की लागत से तैयार सबसे बड़े NICU यानि नवजातों की क्रिटिकल केयर यूनिट का उद्घाटन किया गया था। 105 बैड के इस एनआईसीयू को सिर्फ इसलिए शुरू नहीं किया गया, क्योंकि वहां के स्टॉफ की ट्रेनिंग पूरी नहीं हो पाई है।

हालांकि, मीडिया में खबर आने के बाद हरकत में आए अस्पताल प्रशासन ने आनन-फानन में एनआईसीयू को बुधवार को शुरू कर दिया। लेकिन घटना ने सबसे बड़ा सवाल ये खड़ा किया है कि आखिर मौत के बाद ही धरती के भगवान क्यों जागते हैं? क्या एनआईसीयू की विधिवत शुरूआत करने से पहले अस्पताल के कर्ताकर्ताओं को यह याद नहीं आई कि बगैर दक्ष स्टॉफ के एनआईसीयू को कैसे ऑपरेट किया जाएगा।

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