सरकार की 4 फ्लैगशिप योजनाओं का मुंह चिढ़ा रही है सिर्फ ये 1 तस्वीर

Published Date 2018/02/27 03:37,Updated 2018/02/27 03:54, Written by- FirstIndia Correspondent

सिरोही। सरकार की ओर से गरीबों एवं आमजन को समर्पिम सरकार होने के दावे के साथ कई योजनाएं अमल में लाई गई है। कई योजनाओं को आमजन के जीवन को बेहतर बनाए जाने के लिए धरातल पर भी उतारा गया है, लेकिन कई बार इन योजनाओं की जमीनी हकीकत देखकर असल में कुछ और ही होना सामने आता है, जबकि उन योजनाओं की घोषणाओं के समय बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं। ऐसा ही कुछ सिरोही में देखने को मिलता है, जहां महज 1 तस्वीर सरकार की 4 बड़ी फ्लैगशिप योजनाओं का मुंह चिढ़ाते नजर आती है।

जी हां, यह तस्वीर है शहर में वन विभाग की नर्सरी के सामने की। बिल्कुल हाईवे पर और शहर से एकदम सटी हुई। इसमें कुछ भी कहने की जरूरत नहीं। आप खुद देखिए, कैसे सरकार की तमाम योजनाएं, अभियान और कानून इस एक ही तस्वीर में कैसे टूट रहे हैं। वह भी तब जबकि यहां से रोजाना कई अफसर और जनप्रतिनिधि गुजरते हैं।

सवाल सिर्फ इतना सा है कि स्वच्छ भारत अभियान, गायों के सरंक्षण और शिक्षा का अधिकार समेत पॉलिथीन पर प्रतिबंध लगाने के कानून बनाने के बावजूद भी यदि हमें ऐसी ही तस्वीरें देखनी है तो फिर सरकार यह योजनाएं और कानून बनाती ही क्यों हैं। वहीं प्रशासन इनके नाम पर वाहवाही क्यों लूटता है। 

जानिए, इस तस्वीर में कैसे टूट रहे चार बड़े नियम और कानून 

  • स्वच्छता अभियान :

शहर से एकत्रित बचरा नर्सरी के पास खुले में डाला जा रहा है। जबकि केंद्र से लेकर राज्य सरकार तक इस अभियान पर करोड़ों रुपए खर्च कर रही है। 

  • गायों को अनुदान :

पांच हजार बीघा की सरकारी गौशाला, छह माह के सरकारी अनुदान और स्थानीय विधायक के ही गोपालन राज्य मंत्री होने के बावजूद गायें कचरा खाने को मजबूर हैं। 

  • पॉलीथिन पर प्रतिबंध :

प्रदेशभर में पॉलीथिन पर प्रतिबंध है और कोई उसका उपयोग नहीं कर सकता, लेकिन इस कचरे में सबसे अधिक पॉलीथिन ही है। हालांकि प्रशासन की ओर से त्यौहारी सीजन के दौरान कार्रवाई भी की जाती है। 

  • शिक्षा का अधिकार :

देश के बच्चों को शिक्षा का अधिकार मिला हुआ है, जिसको लेकर एक कानून भी अस्तित्व में है। तस्वीर में देखिए, वे ही बच्चे कचरा बीनते नजर आ रहे हैं। शिक्षा से इनका दूर दूर तक कोई वास्ता नजर नहीं आता है।

यह तस्वीर आपको दिखाना जरूरी है, क्योंकि इसमें प्रशासन जितनी ही लापरवाही हमारी भी है, फिर भी यह सब देखकर हम चुप रहते हैं?

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