शरद यादव ने अपने ट्वीट से आम आदमी पार्टी का समर्थन करते हुए लिखा है कि "चुनाव आयोग द्वारा 20 विधायकों की सदस्यता रद्द कर दिया जाना अलोकतांत्रिक है।" उन्होंने कहा कि, "क्योंकि उनका पक्ष सुना ही नहीं गया, इसलिए यह न्याय के खिलाफ है। देश की संवैधानिक संस्थाओं का दुरुपयोग किया जा रहा है। इसलिए लोगों को इस मुद्दे पर गंभीरता से सोचना चाहिए।"

@ArvindKejriwal Disqualification of AAP MLAs was undemocratic as they were not even heard which is against natural justice. Constitutional bodies in d country are being misused now a days.Appeal to public to deeply think about which hands d country will be secured in future.

— SHARAD YADAV (@SharadYadavMP) January 20, 2018

माकपा नेता ने भी मामले में 'आप' का साथ दिया है। वृंदा करात ने कहा है कि 20 विधायकों की सदस्यता को रद्द किया जाना आयोग की विश्वसनीयता को कम कर देगा। इस मुद्दे पर ममता ने सरकार पर सीधा निशाना लगाया है। अपने एक ट्वीट में उन्होंने कहा है कि राजनीतिक फायदों के लिए संवैधानिक पदों का दुरुपयोग्य करना गलत है। वृंदा ने यह भी कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि विधायकों कि एक भी बात आयोग ने बिना सुने ही अपना फैसला दे दिया।

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आप के समर्थन में एकजुट विपक्ष, टीएमसी—सीपीआईएम के बाद अब मिला माकपा का भी साथ

Published Date 2018/01/20 03:37, Written by- FirstIndia Correspondent

नई दिल्ली। राजनीति के खेल को समझना बहुत ही कठिन है, यहां दोस्ती और दुश्मनी सब कुछ देखने और समझने के बाद की जाती है। किस समय किसका साथ देना है और किस समय किसका साथ छोड़ देना है, यह राजनेताओं को अच्छे से मालूम है। पीएम मोदी को हराने के लिए पूरा विपक्ष केजरीवाल के समर्थन में आ गया है। लाभ के पद पर अपने 20 विधायकों पर लटक रही तलवार पर केजरीवाल अब अकेले नहीं है, उन्हें बाकी राजनीतिक पार्टियों और राजनेताओं का समर्थन प्राप्त हो रहा है।

पहले टीएमसी फिर सीपीआईएम और अब माकपा ने भी 20 विधयाकों की सदस्यता को रद्द करना गलत बताया है। शिवसेना के संजय राउत ने भी इस मामले में चुनाव आयोग को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा है कि, "आयोग का यह फैसला संदेह के घेरे में है और इसके लिए आयोग जिम्मेदार है।"

शरद यादव ने अपने ट्वीट से आम आदमी पार्टी का समर्थन करते हुए लिखा है कि "चुनाव आयोग द्वारा 20 विधायकों की सदस्यता रद्द कर दिया जाना अलोकतांत्रिक है।" उन्होंने कहा कि, "क्योंकि उनका पक्ष सुना ही नहीं गया, इसलिए यह न्याय के खिलाफ है। देश की संवैधानिक संस्थाओं का दुरुपयोग किया जा रहा है। इसलिए लोगों को इस मुद्दे पर गंभीरता से सोचना चाहिए।"

माकपा नेता ने भी मामले में 'आप' का साथ दिया है। वृंदा करात ने कहा है कि 20 विधायकों की सदस्यता को रद्द किया जाना आयोग की विश्वसनीयता को कम कर देगा। इस मुद्दे पर ममता ने सरकार पर सीधा निशाना लगाया है। अपने एक ट्वीट में उन्होंने कहा है कि राजनीतिक फायदों के लिए संवैधानिक पदों का दुरुपयोग्य करना गलत है। वृंदा ने यह भी कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि विधायकों कि एक भी बात आयोग ने बिना सुने ही अपना फैसला दे दिया।

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