5 साल की मासूम से फूट गया टिटहरी का अंडा, पंचायत ने कर दिया समाज से बाहर

Published Date 2018/07/11 06:51,Updated 2018/07/11 07:02, Written by- FirstIndia Correspondent

बूंदी। राजस्थान के बूंदी जिले से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने समाज के उस रूप को सामने ला दिया, जिसके बारे में शायद कोई कल्पना भी नहीं कर सकता। पंचायत के फरमानों से जुड़ी कई खबरें देशभर के हिस्सों से अक्सर आती रहती हैं। लेकिन इस बार पंचायत का ये फरमान एक 5 साल की मासूम को मिला है, जिसे समाज की पंचायत के फरमान के बाद 11 दिनों के लिए समाज से बाहर कर दिया गया। इससे भी ज्यादा हैरत तो आपको इस मासूम का कसूर जानकर होगी। क्योंकि मासूम का कसूर सिर्फ इतना था कि उसके पैरों से एक अंडा फूट गया था।

जाहिर तौर पर मामला चौकाने वाला है, इसलिए आप भी थोड़ी हैरत में जरूर होंगे। चलिए, आपको पूरे मामले से वाकिफ कराते हैं, ताकि आप भी ये भी समझ सकें कि आखिर पांच साल की एक मासूम से कैसे वो अंडा फूट गया और कैसे मामला पंचायत तक पहुंचा। इसके बाद आखिर कैसे पंचायत ने सुना दिया उस मासूम और उसके परिवार को 11 दिनों के लिए समाज से बाहर किए जाने का ये अजीबोगरीब फरमान।

पूरा मामला बूंदी जिले के हिंडोली उपखंड में आने वाले सथुर पंचायत के हीरापुर गांव का है, जहां एक मां अपनी पांच साल की मासूम बेटी को स्कूल के छोड़ने जा रही थी। इस दौरान मासूम का पैर एक अंडे से टच हो गया है और वह अंडा फूट गया। मासूम के पैर से अंडे के फूट जाने की बात कुछ लोगों को पता लग गई, जिसके बाद मामला पंचायत तक जा पहुंचा। 

पंचायत ने सबकी बात सुनने के बाद पांच साल की मासूम को 11 दिनों के लिए समाज से बहिष्कृत कर दिया। ऐसे में इस मासूम के परिजनों को भी पंचायत का फरमान मानना पड़ा। 11 दिन बीत जाने के बाद में आज मासूम को उसके फूफा ने घर आकर तोलिया औढ़ाया और उसे खाने के लिए चने और बिस्किट दिए। इसके बाद इस मासूम की फिर से समाज से वापसी हुई।

मासूम बच्ची की मां ने बताया कि 11 दिन तक उसकी बच्ची को घर के अंदर प्रवेश वर्जित था और उसको दूर से ही खाना दिया जाता था। इस दौरान उसको किसी भी बच्ची के हाथ से पानी पिलाने का भी धर्म नहीं था। 11 दिनों के बाद उसको महादेव मंदिर के स्थान पर नहलाया गया और फिर उसके फूफा द्वारा रीति—रिवाज के तहत घर में और समाज में लिया गया है।

बहरहाल, 11 दिनों के बाद आज भले ही पांच साल की इस मासूम को भले ही समाज में वापस ले लिया गया हो, लेकिन यह पूरा मामला कई सारे सवाल खड़े कर रहा है। क्योंकि जिस मासूम को यह तक समझ नहीं कि वह क्या खाना खा रही है, क्या पी रही है। उसी मासूम बालिका को लेकर समाज की पंचायत में फरमान जारी होता है और उस फरमान में उसको घर से बाहर कर दिया जाता है। यहां तक कि कमरे में सोने तक की भी इजाजत बालिका को नहीं मिलती। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या हमारे समाज से इस प्रकार की कुरीतियां कभी खत्म हो पाएगी?

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