खुशखबरी : प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों की पेंशन में 1200 प्रतिशत की बढ़ोतरी

Published Date 2017/11/22 06:37, Written by- FirstIndia Correspondent

नई दिल्ली। देश के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 2016 में दिए गए एक अहम फैसले के बाद प्राइवेट नौकरी करने वाले एक शख्स की पेंशन में 10, 20 या 50 प्रतिशत नहीं, बल्कि 1200 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। जी हां, ये बात सुनकर आप भले ही चौंक गए होंगे, लेकिन ये सौ फीसदी सच है। क्योंकि कोर्ट ने ईपीएफओ (एंप्लॉयी प्रविडेंट फंड ऑर्गनाइजेशन) को एंप्लॉयी पेंशन स्कीम (EPS) के तहत 12 याचिकाकर्ताओं की पेंशन रिवाइज करने को कहा था।

कोर्ट के इस आदेश के बाद हरियाणा टूरिज्म कॉर्पोरेशन से रिटायर्ड हुए प्रवीण कोहली की पेंशन में 1200 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है और जहां पहले उनकी पेंशन 2,372 रुपये होती थी, वहीं अब ये पेंशन 10 गुना से भी ज्यादा बढ़कर 30,592 रुपये हो गई है। 37 साल की नौकरी में प्रवीण कोहली के वेतन में कभी भी इतनी बढ़ोतरी कभी नहीं हुई थी, जितनी कि रिटायरमेंट के 4 साल बाद पेंशन की रकम में हुई है।

दरअसल, कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) के तहत आने वाली पेंशन योजना के करीब 5 करोड़ सदस्य हैं। वहीं प्राइवेट सेक्टर के हर कर्मचारी को अपनी बेसिक सैलरी में से 12 पर्सेंट और महंगाई भत्ता ईपीएफ में जमा करता है। इसके बाद उतनी ही रकम एंप्लॉयर भी जमा करता है। एंप्लॉयर के फंड से 8.33 पर्सेंट ईपीएस के लिए जाता है। जब लोग नौकरी छोड़ने के बाद ईपीएफ निकालते हैं तो उन्हें ईपीएस नहीं दिया जाता है। इसका भुगतान सेवा निवृत्ति के बाद ही होता है। 

ईपीएस योगदान पर एक सीमा भी है, जो वर्तमान में वेतन (बेसिक + डीए) पर सीमा 15,000 रुपये प्रतिमाह है। इसलिए कोई भी 15 हजार रुपये का अधिकतम 8.33 पर्सेंट ही ईपीएस के लिए जमा कर सकता है, जो 1250 रुपये बैठता है। जुलाई 2001 से सितंबर 2014 के बीच, ईपीएस योगदान की सीमा 6,500 रुपये थी। ऐसे में ईपीएस के लिए अधिकतम 541.4 रुपये का ही योगदान हो सकता है। वहीं 2001 से पहले यह सीमा 5000 रुपये थी, जिसके मुताबिक योगदान 416.5 रुपये ही हो सकता था।

प्रवीण के मामले में उसे अपनी पेंशन को 2,372 रुपये से 30,592 रुपये कराने के लिए 15.37 रुपये का भुगतान करना पड़ा। यह वह रकम थी, जो कोहली अपने पूरे वेतन पर ईपीएस योगदान के लिए भुगतान करना चाहते थे, लेकिन उन्हें पेंशन की एरियर के रूप में 13.23 लाख रुपये भी मिले। ऐसे में महज 2.14 लाख रुपये भुगतान करने से कोहली को अपनी पेंशन करीब कई गुना करने का मौका मिला।

ऐसे में ईपीएफओ के सभी 5 करोड़ सदस्य अब उच्च पेंशन के लिए पात्र हैं। इसमें उन सभी लोगों को शामिल किया गया है, जो 1 सितंबर, 2014 से पहले ईपीएफओ में शामिल हुए थे। इस तारीख को ही ईपीएफओ ने ईपीएस में 15,000 रुपये की कैप लगाई थी।

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