राजस्थान में सांवलिया सेठ, सालासर बालाजी, खाटू श्यामजी, गोविन्द देवजी, मेंहदीपुर बालाजी, मोती डूंगरी गणेश, करणी माता और तनोट माता सहित कईं मंदिर हैं। ऐसे में राहुल गांधी जिस दिन जिस जिले में सभाएं करेंगे, उस दिन वहां के प्रसिद्ध मंदिर में दर्शन करने जाएंगे। हालांकि मंदिरों के अलावा भी कई पर्यटन स्थलों, शिक्षण संस्थाओं, स्वतंत्रता सेनानियों, जनसंख्या, साक्षरता दर, कलकारखानों एवं उद्योग धंधों की भी जानकारी मांगी गई है।

आपको बता दें कि गुजरात में राहुल गांधी ने द्वारका मंदिर से चुनावी प्रचार का आगाज किया था। गुजरात में राहुल जिन जिन मंदिरों में गए उनके दायरे में आने वाली सीटों पर जीत का स्वाद चखने को मिला है। ऐसे में कांग्रेस को अब यह समझ आ गया है कि मंदिरों में जाने से उनकी धार्मिक मान्यता वाले लोगों का विश्वास पार्टी के प्रति बढ़ रहा है।

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गुजरात की तर्ज पर राजस्थान में भी राहुल गांधी पहले करेंगे मंदिर दर्शन और बाद में राजनीति

Published Date 2017/12/27 05:47, Written by- Dinesh Kumar Dangi

जयपुर। राजस्थान विधानसभा चुनाव के प्रचार का भी श्रीगणेश राहुल गांधी गुजरात की तरह मंदिर दर्शन करते हुए करेंगे। गुजरात में मिले अच्छे समर्थन के बाद कांग्रेस ने यह नई रणनीति अपनाने का फैसला लिया है। इसके लिए राहुल गांधी के ऑफिस से तमाम प्रदेश कांग्रेस कमेटियों से जिलेवाइज मंदिरों की सूची मांगी गई है। सूची में प्रदेश के बड़े मंदिरों और व्यापक दायरे वाले मंदिरों के नाम मांगे गए हैं।

ऐसे में अगले विधानसभा चुनाव में यह तय है कि राहुल किसी बड़े मंदिर में दर्शन करके चुनावी प्रचार की शुरुआत करेंगे। संभावना है कि मेवाड़ संभाग के किसी मंदिर में राहुल सबसे पहले जा सकते हैं। दरअसल, मंदिर दर्शन कार्यक्रम के पीछे कांग्रेस की रणनीति भाजपा के ध्रुवीकरण के मंसूबों पर पानी फेरना है। साथ ही भाजपा के अल्पसंख्यक समर्थक पार्टी के आऱोपों का जवाब देना है।

राजस्थान में सांवलिया सेठ, सालासर बालाजी, खाटू श्यामजी, गोविन्द देवजी, मेंहदीपुर बालाजी, मोती डूंगरी गणेश, करणी माता और तनोट माता सहित कईं मंदिर हैं। ऐसे में राहुल गांधी जिस दिन जिस जिले में सभाएं करेंगे, उस दिन वहां के प्रसिद्ध मंदिर में दर्शन करने जाएंगे। हालांकि मंदिरों के अलावा भी कई पर्यटन स्थलों, शिक्षण संस्थाओं, स्वतंत्रता सेनानियों, जनसंख्या, साक्षरता दर, कलकारखानों एवं उद्योग धंधों की भी जानकारी मांगी गई है।

आपको बता दें कि गुजरात में राहुल गांधी ने द्वारका मंदिर से चुनावी प्रचार का आगाज किया था। गुजरात में राहुल जिन जिन मंदिरों में गए उनके दायरे में आने वाली सीटों पर जीत का स्वाद चखने को मिला है। ऐसे में कांग्रेस को अब यह समझ आ गया है कि मंदिरों में जाने से उनकी धार्मिक मान्यता वाले लोगों का विश्वास पार्टी के प्रति बढ़ रहा है।

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