ताले में बंद राजस्थान क्रिकेट और पदाधिकारी लड़ रहे सड़क पर लड़ाई

Published Date 2018/07/05 08:54,Updated 2018/07/06 11:53, Written by- Naresh Sharma

जयपुर (नरेश शर्मा)। राजस्थान क्रिकेट संघ यानी विवादों का दूसरा नाम। संघ में दो ग्रुप है, दो समानांतर टूर्नामेंट हो रहे हैं और खिलाड़ी भी दो ग्रुप में बांट दिए गए हैं। हालत यह है कि क्रिकेट ताले में बंद है और पदाधिकारी सड़क पर लड़ाई लड़ रहे हैं। अब सरकार व कोर्ट से ही कोई इस विवाद के सुलझने की उम्मीद की जा रही है। ऐसे में यदि यह विवाद नहीं सुलझता है, तो नुकसान तो क्रिकेट को ही होगा।

जी हां, यही है राजस्थान क्रिकेट संघ के मौजूदा हालात। पिछले साल जब आरसीए के चुनाव हुए थे, तब से ही यह स्थिति है। आरसीए अध्यक्ष सीपी जोशी व सचिव राजेंद्र नांदु में आपसी विवाद है और आपस में तलवारें खींच चुकी है। दोनों एक—दूसरे के खिलाफ आरसीए को खराब करने का आरोप लगाते हैं। दोनों ग्रुप में विवाद इस कदर बढ़ गया है कि सरकार को आरसीए ऑफिस पर ताले जड़ने पड़े, लेकिन लड़ाई खत्म नहीं हुई।

सीपी जोशी ने अंडर-19 टूर्नामेंट शुरू कराया तो सचिव राजेंद्र नांदु ने भी अलग से टूर्नामेंट करा दिया। सीपी गुट के टूर्नामेंट में नांदु गुट की टीमें नहीं खेल रही, तो नांदु गुट के टूर्नामेंट में सीपी गुट की टीमें नदारद है। यानी जिले, टीमें, खिलाड़ी, अंपायर, मैदान सब बंट गए हैं। जिला संघों के पदाधिकारियों के दबाव के कारण खिलाड़ी परेशान में है कि आखिर जाएं तो जाएं कहां। भविष्य भी अंधकार में नजर आ रहा है, क्योंकि इन दोनों ही टूर्नामेंट का कोई वजूद नहीं है। चयनकर्ता भी तो अब ग्रुप में बंट चुके हैं, आखिर प्रदर्शन कहां आंका जाएगा। सब कुछ चाहत के आधार पर तय होगा। इधर, पदाधिकारियों में आरोप—प्रत्यारोप के सिलसिले जारी है।

आरसीए विवाद सरकार के पास पहुंच गया है। मामला कोर्ट में पहले से ही चल रहा है और छह जुलाई को हाईकोर्ट में सुनवाई होनी है। ऐसे में अब इन दोनों से ही क्रिकेटर्स को उम्मीद है। फैसला तो सरकार या कोर्ट को ही करना है। कुछ विकल्प हैं, जिनको लेकर क्रिकेटर्स उम्मीद कर रहे हैं और कई विकल्पों पर विचार किया जा रहा है।

विकल्प नंबर एक :
— आरसीए की कार्यकारिणी भंग करके नए सिरे से चुनाव हो।
— रजिस्ट्रार यह फैसला कर सकता है।
— खेल कानून में इसका स्पष्ट प्रावधान है।
— विवाद की स्थिति में पहले भी एडहॉक कमेटी बन चुकी है।

विकल्प नंबर दो :
— कार्यकारिणी भंग करके प्रशासक नियुक्त कर दिया जाए।
— राजस्थान हाईकोर्ट यह फैसला कर सकता है।
— कोर्ट विशेष संचालन कमेटी बना सकता है।
— इस कमेटी में विशेषज्ञों को शामिल किया जा सकता है।
— बीसीसीआई का प्रतिनिधि भी हो सकता है शामिल।

विकल्प नंबर तीन :
— पहले की तरह टीम राजस्थान बना दी जाए।
— राजस्थान हाईकोर्ट यह फैसला कर सकता है।
— लेकिन टीम राजस्थान रह चुकी विवादों में।
— मनमर्जी के फैसले लेती है टीम राजस्थान।
— कोर्ट द्वारा नियुक्त चयनकर्ता ही विवादों में।
— चहेतों का चयन किया जाता है चयनकर्ताओं द्वारा।

विकल्प नंबर चार :
— RCA में नियुक्त हो हाईकोर्ट का आब्जर्वर।
— खेल सचिव को बनाया जा सकता है आब्जर्वर।
— आरसीए कार्यकारिणी में रहे इनकी मौजूदगी।
— सभी फैसलों की रिपोर्ट आब्जर्वर की देखरेख में बने।

हाईकोर्ट में शुक्रवार को इस मामले पर सुनवाई होनी है। ऐसे में सभी की निगाहें कोर्ट पर ही है। कोर्ट ने पहले टीम राजस्थान बनाई थी, लेकिन अब खिलाड़ी ही इसका विरोध कर रहे हैं। दरअसल, तीन-चार लोग ही टीम राजस्थान के बहाने पूरी क्रिकेट पर कब्जा जमाए हुए थे। चयनकर्ता भी उनको ही बनाया गया, जो कई वर्षों से इस पद पर हैं। ये चयनकर्ता ही एकेडमी चलाते हैं, ये ही चयनकर्ता प्लेयर्स एसोसिएशन में पदाधिकारी है। बड़ी बात यह है कि इन चयनकर्ताओं की कोई मॉनटरिंग भी नहीं है। ये चाहे जिनको चयन कर लेते हैं, चाहे जब बाहर कर देते हैं। कोई पूछने वाला नहीं है। ऐसे में सिर्फ टीम राजस्थान बनाई जाती है, तो एक बार फिर क्रिकेटर्स के साथ अन्याय सा होगा, क्योंकि औपचारिकता के रूप में टीम तो टूर्नामेंट में खेल लेगी, लेकिन नए खिलाड़ियों का मौका नहीं मिल पाएगा।

वहीं दूसरी नजर रजिस्ट्रार ऑफिस पर टिकी है। सचिव व कोषाध्यक्ष ने आरसीए मामले की शिकायत की है। आधार इतना बन चुका है कि रजिस्ट्रार जब चाहे, तब एडहॉक कमेटी बना सकता है और नए सिरे से चुनाव हो सकते हैं। नए चुनाव होने से मौजूदा विवाद तो खत्म हो जाएगा, तो नया विवाद खड़ा नहीं होगा, इसका कोई गारंटी नहीं है। क्योंकि जब तक 33 लोगों तक आरसीए की सत्ता सीमित होगी, तब तक इस विवाद का स्थाई समाधान नहीं होगा। अलग—अलग ग्रुप के पदाधिकारी जीत कर आने पर 17 जिला संघ एक तरफ होते ही सत्ता बदलने की कोशिश की जाती है। ऐसे में अब कोर्ट व सरकार को सभी पहलुओं पर ध्यान देकर क्रिकेट हित में फैसला करना चाहिए। खेल कानून में  व्यापक बदलाव भी एक अच्छा फैसला हो सकता है।

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