दुनिया की परवाह किए बिना अंतर्राष्ट्रीय मंच पर भारत की दोस्ती निभाता रहा रूस

Published Date 2017/06/01 12:25, Written by- FirstIndia Correspondent

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में रूस ने 22 जून 1962 को अपने 100वें वीटो का इस्तेमाल कश्मीर मुद्दे पर भारत के समर्थन में किया था। दरअसल, सुरक्षा परिषद में आयरलैंड ने कश्मीर मसले को लेकर भारत के खिलाफ एक प्रस्ताव पेश किया था, जिसका अमरीका, फ्रांस, ब्रिटेन, चीन (सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य) के अलावा आयरलैंड, चिली और वेनेजुएला ने समर्थन किया था। इस प्रस्ताव के पीछे भारत के खिलाफ पश्चिमी देशों की बड़ी साजिश थी। इसका मकसद कश्मीर को भारत से छीनकर पाकिस्तान को देने की योजना थी, लेकिन रूस ने उस वक्त भारत की दोस्ती निभाई और इस साजिश को नाकाम कर दिया।

 

रूस ने सुरक्षा परिषद में भारत का खुलकर समर्थन किया और आयरिश प्रस्ताव के खिलाफ वीटो लगा दिया। रूस की मदद ने भारत के खिलाफ प्रस्ताव को पास नहीं होने दिया। इससे पहले साल 1961 में भी रूस ने 99वें वीटो का इस्तेमाल भी भारत के लिए किया था। इस बार रूस का वीटो गोवा मसले पर भारत के पक्ष में था। इसके अलावा पहले भी रूस पाकिस्तान के खिलाफ और भारत के पक्ष में अपने वीटो का इस्तेमाल करता रहा था।


रूस ने परमाणु और अंतरिक्ष कार्यक्रम से लेकर विकास के कार्यों में भारत का अक्सर साथ देता रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूसी अखबार रूसियस्काया गजेटा में लिखे एक लेख में भारत-रूस की दोस्ती की जमकर तारीफ की है। भारत और रूस के बीच सिर्फ राजनयिक ही नहीं, बल्कि आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक संबंध रहे हैं। मुश्किल परिस्थितियों में भी रूस-भारत ने दोस्ती की परीक्षा पास की।


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