लू कांग ने कहा कि हम भारतीय पक्ष से अपील करते हैं कि वह दोनों नेताओं की ओर से बनी आमराय के बाद के कदमों पर काम करें, ताकि सीमाई इलाकों में शांति एवं स्थिरता बनाए रखने के उपाय किए जा सकें और ऐसी चीजों से परहेज किया जाए, जिससे हालात जटिल होते हों। जरूरी मामलों को रचनात्मक तरीके से संभाला जाए और द्विपक्षीय संबंधों के निरंतर विकास को बढ़ावा दिया जाए। इससे समूचे क्षेत्र एवं भारतीय पक्ष के साझा हित सधेंगे।

उल्लेखनीय है कि दो दिन पहले ही आर्मी दिवस के मौके पर जनरल बिपिन रावत ने कहा था कि भारत को पाकिस्तान के साथ लगती सीमा के साथ-साथ पूर्वी सीमा पर भी ध्यान देने की जरूरत है। जनरल ने कहा था कि चीन अगर मजबूत है तो भारत भी अब कमजोर नहीं है। भारत अपनी सीमा पर किसी भी देश को अतिक्रमण नहीं करने देगा। अब हालात 1962 जैसे नहीं है, हर क्षेत्र में भारतीय सेना की ताकत बढ़ी है।

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आर्मी चीफ ने दिखाई दुश्मन को आंख, तो बयानों से बौखलाया चीन

Published Date 2018/01/15 05:56,Updated 2018/01/15 06:01, Written by- FirstIndia Correspondent

बीजिंग। भारतीय सेना प्रमुख बिपिन रावत के हालिया बयानों से बौखलाए चीन ने आलोचना करते हुए कहा कि वे रचनात्मक नहीं हैं। चीन ने कहा कि उनके बयान दोनों देशों के नेताओं की ओर से रिश्तों को फिर से पटरी पर लाने एवं सीमा पर शांति बनाए रखने के लिए बनी आम राय के खिलाफ हैं। चीन का कहना है कि जनरल का बयान दोनों देशों के बीच तनाव को और बढ़ाएगा। चीन ने आरोप लगाया कि ऐसे बयानों से सीमा पर हालात और तनावपूर्ण होंगे।

चीन के विदेश मंत्रालय प्रवक्ता लू कांग ने कहा कि पिछले साल भारत-चीन के रिश्तों ने बहुत से उतार-चढ़ाव देखे हैं, लेकिन पिछले साल सितंबर में ब्रिक्स सम्मेलन के इतर चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुलाकात में रिश्तों को फिर से पटरी पर लाने के लिए उनमें आमराय बनी थी। लू कांग ने कहा कि विचार-विमर्श पर संवाद बढ़ाने के लिए दोनों देशों की ओर से किए गए प्रयासों ने सुधार एवं विकास की ठोस गति दिखाई है।

लू कांग ने कहा कि ऐसी कोशिशों के बीच भारत के वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से ऐसी टिप्पणी रचनात्मक नहीं है। यह बातचीत की प्रक्रिया को पटरी से उतार सकती है। ऐसी बयानबाजी दोनों देशों के संबंधों को बेहतर करने के प्रयासों पर विपरीत असर डालेगी। वहीं उन्होंने कहा कि इससे सीमा पर शांति बनाए रखने की प्रक्रिया पर भी असर पड़ सकता है। लू ने कहा कि चीन और भारत अहम पड़ोसी हैं। वे राष्ट्रीय विकास एवं उत्थान के निर्णायक चरण में हैं। दोनों देशों को सामरिक संवाद बढ़ाना चाहिए, सामरिक संदेह दूर करना चाहिए और सामरिक सहयोग संचालित करना चाहिए।

लू कांग ने कहा कि हम भारतीय पक्ष से अपील करते हैं कि वह दोनों नेताओं की ओर से बनी आमराय के बाद के कदमों पर काम करें, ताकि सीमाई इलाकों में शांति एवं स्थिरता बनाए रखने के उपाय किए जा सकें और ऐसी चीजों से परहेज किया जाए, जिससे हालात जटिल होते हों। जरूरी मामलों को रचनात्मक तरीके से संभाला जाए और द्विपक्षीय संबंधों के निरंतर विकास को बढ़ावा दिया जाए। इससे समूचे क्षेत्र एवं भारतीय पक्ष के साझा हित सधेंगे।

उल्लेखनीय है कि दो दिन पहले ही आर्मी दिवस के मौके पर जनरल बिपिन रावत ने कहा था कि भारत को पाकिस्तान के साथ लगती सीमा के साथ-साथ पूर्वी सीमा पर भी ध्यान देने की जरूरत है। जनरल ने कहा था कि चीन अगर मजबूत है तो भारत भी अब कमजोर नहीं है। भारत अपनी सीमा पर किसी भी देश को अतिक्रमण नहीं करने देगा। अब हालात 1962 जैसे नहीं है, हर क्षेत्र में भारतीय सेना की ताकत बढ़ी है।

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