सूत्रों के अनुसार, एसीएस पीके गोयल पहले से मंजूरशुदा इन फाइलों के निस्तारित करने के बजाय उन पर अलग-अलग टिप्पणी कर अपने कार्मिकों से कई तरह की जानकारियां मांग रहे हैं। किसी फाइल में नियम-कायदे पूछ रहे हैं, किसी में किसी दस्तावेज का तकाजा कर रहे हैं तो किसी फाइल में निस्तारण प्रक्रिया पर वाल उठा रहे हैं।

गोयल के इस रवैए से विभाग के कार्मिक भी हैरान है। क्योंकि ऐसे मामलों में नए आने वाले अधिकारी का इस तरह तरह का रवैया आमतौर पर नहीं होता है। लेकिन एसीएस पीके गोयल के इस अजब रवैए को लेकर कई सवाल सचिवालय के गलियारों में उठ रहे हैं?

ऐसे कई सवालों के चलते इन दिनों सरकार में नगरीय विकास विभाग एक हॉट टॉकिंग इश्यू बन गया है। एक तरफ तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के लिए मामलों के त्वरित निस्तारण पर जोर दे रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ इतने महत्वपूर्ण विभाग में ऐसे प्रकरणों को अटकाया जा रहा है, जिनमें पहले से ही विधिवत मंजूरी मिल चुकी है।

क्या उठ रहे हैं सवाल :
- क्या एसीएस पीके गोयल वाकई पूरी फाइल पढ़कर उस पर टिप्पणी कर रहे हैं?
- अगर पूरी फाइल पढ़ी है तो क्या वाकई कोई गड़बड़ रह गई है?
- क्या नियम-कायदों के खिलाफ जाकर प्रकरणों में फाइनल मंजूरी दी गई?
- अगर ऐसा नहीं है तो क्यों गोयल बेवजह फाइलें अटका रहे हैं?
- क्या गोयल विभाग में मंत्री से ऊपर अपना रूतबा जमाना चाहते हैं?
- क्या बेवजह फाइलें अटकाना गोयल का वाकई शौक है?

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...तो क्या खुद को मंत्री से भी ऊपर मानते हैं गोयल!

Published Date 2018/05/16 03:15, Written by- FirstIndia Correspondent

जयपुर (अभिषेक श्रीवास्तव)। क्या अतिरिक्त मुख्य सचिव पीके गोयल खुद को यूडीएच मंत्री श्रीचंद कृपलानी से ऊपर मानते हैं या जान—बूझकर वे बेवजह कृपलानी की ओर से पहले से मंजूर फाइलों में अड़ंगा लगा रहे हैं या फिर मंत्री और उनके बीच कोल्डवार चल रहा है? यूडीएच में हाल में पदस्थापित एसीएस पीके गोयल के रवैए से ऐसे कई सवाल उठ रहे हैं।

करीब पन्द्रह दिन पहले ही एसीएस पीके गोयल का नगरीय विकास विभाग में तबादला हुआ है। उससे पहले इस पद पर एसीएस मुकेश शर्मा थे, उनका तबादला वित्त विभाग में हो गया है। शर्मा जब नगरीय विकास विभाग में थे, तब कई प्रकरणों की फाइलें उन्होंने मंजूर की थी। इसके बाद इन फाइलों पर विभाग के मंत्री श्रीचंद कृपलानी ने मंजूरी दी। 

रूटीन प्रक्रिया के तहत फाइनल मंजूरी के बाद वापस इन फाइलों को मंत्री कार्यालय से अतिरिक्त मुख्य सचिव और वहां से संयुक्त सचिव तक आना था, ताकि अग्रिम कार्यवाही की जा सके। जब विभाग में एसीएस पीके गोयल आए, तब ऐसी कई फाइलें मंत्री कार्यालय से उनके पास पहुंची।

सूत्रों के अनुसार, एसीएस पीके गोयल पहले से मंजूरशुदा इन फाइलों के निस्तारित करने के बजाय उन पर अलग-अलग टिप्पणी कर अपने कार्मिकों से कई तरह की जानकारियां मांग रहे हैं। किसी फाइल में नियम-कायदे पूछ रहे हैं, किसी में किसी दस्तावेज का तकाजा कर रहे हैं तो किसी फाइल में निस्तारण प्रक्रिया पर वाल उठा रहे हैं।

गोयल के इस रवैए से विभाग के कार्मिक भी हैरान है। क्योंकि ऐसे मामलों में नए आने वाले अधिकारी का इस तरह तरह का रवैया आमतौर पर नहीं होता है। लेकिन एसीएस पीके गोयल के इस अजब रवैए को लेकर कई सवाल सचिवालय के गलियारों में उठ रहे हैं?

ऐसे कई सवालों के चलते इन दिनों सरकार में नगरीय विकास विभाग एक हॉट टॉकिंग इश्यू बन गया है। एक तरफ तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के लिए मामलों के त्वरित निस्तारण पर जोर दे रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ इतने महत्वपूर्ण विभाग में ऐसे प्रकरणों को अटकाया जा रहा है, जिनमें पहले से ही विधिवत मंजूरी मिल चुकी है।

क्या उठ रहे हैं सवाल :
- क्या एसीएस पीके गोयल वाकई पूरी फाइल पढ़कर उस पर टिप्पणी कर रहे हैं?
- अगर पूरी फाइल पढ़ी है तो क्या वाकई कोई गड़बड़ रह गई है?
- क्या नियम-कायदों के खिलाफ जाकर प्रकरणों में फाइनल मंजूरी दी गई?
- अगर ऐसा नहीं है तो क्यों गोयल बेवजह फाइलें अटका रहे हैं?
- क्या गोयल विभाग में मंत्री से ऊपर अपना रूतबा जमाना चाहते हैं?
- क्या बेवजह फाइलें अटकाना गोयल का वाकई शौक है?

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