मुफ्त जांच योजना की निकाली हवा, सोनोग्राफी को भटक रहे लोग

Published Date 2018/06/02 01:46, Written by- FirstIndia Correspondent

दौसा। जिला अस्पताल की अव्यवस्थाओं ने सरकार के निशुल्क जांच योजना की हवा निकाल कर रख दी। मुफ्त के इस फेर में मरीज इस तरह पिस रहे हैं कि वे भगवान से बिमार होने के बजाए सीधा मौत मांग रहे हैं। जांच की कडी में सबसे महत्वपूर्ण सोनोग्राफी जांच करवाने के लिए मरीजों को एक माह का वक्त दिया जा रहा हैं जब तक मरीज रोग से बचा रहे ये उस के तकदीर पर निर्भर हैं। 

कोट कचहरी और अस्पताल ये तीनों जगह बेशक इंसान के जीवन में महत्व रखती हो पर यहां आदमी जाता जब हैं जब उस के सारे हथियार भोंटे हो जाते हैं। जिस में अस्पताल जाना तो बडी मजबूरी हैं। न चाहते हुए भी जाना ही पडता हैं। सरकार ने आमजन को राहत के लिए निशुल्क दवा योजना के साथ निशुल्क जांच भी शुरू कर दी। पर लापरवाही के आलम ने इस योजना की हवा निकाल कर रख दी। खास कर दौसा जिला अस्पताल के सोनाग्राफी केन्द्र ने। यहां चाहे गंम्भीर बिमारी से पिडित मरीज हो या फिर गर्भवती महिलाए, सोनोग्राफी करवाने के लिए एक माह का वक्त दिया जाता हैं। तब तक मरीज बचा रहे ये उस की अपनी किस्मत हैं।

फर्स्ट इंडिया टीम ने जब जमीनी हकीकत जानने का प्रयास किया तो सच सामने आ गया। एक नहीं दो नहीं बल्कि यहां पहुंचे हर मरीज की ये ही शिकायत थी, कि उन्हें सोनाग्राफी जांच के लिए धक्कों के सिवाय कुछ नहीं मिलता। मरीजों के हाथ में थमी जांच की पर्ची खुद ये गवाह दे रही थी कि इस का नम्बर एक माह बाद आएगा। तब तक ये चाहे दर्द से कराहे या फिर उपर चला जाए जांच केन्द्र से इस का कोई सरोकार नहीं। इस केन्द्र की प्रभारी डा आभा जैन तो अलग ही तर्क दे रही हैं। इन का कहना हैं कि लोग फालतू की जांचें मुफ्त खोरी के चक्कर में लिखवा कर लाते हैं। वे प्रतिदिन 60 सोनोग्राफी कर रही हैं ,लेकिन अस्पताल रिकोर्ड में ऐसा कुछ नहीं हैं।

डा आभा जैन की माने तो अस्पताल में लगी मशीनें ही खराब हैं। ब़डी मुश्किल और मेहनत के बाद वे सोनाग्राफी करके मरीजों को राहत दे रही हैं। मशीनें भी सरकार ने उन की बिना रजामंदी के भिजवादी हैं ऐसे में वो क्या कर सकती हैं। सवाल मैन पावर का हैं तो वो हैं ही नहीं। जबकि जिला अस्पताल के पीएमओ डा बीके बजाज का अलग ही कहना हैं। वे डा आभा जैन के किसी तर्क का समर्थन नहीं करते।

अब सवाल ये हैं कि सरकार की इस मुफ्त जांच योजना से भला मरीजों को कितनी राहत मिल रही हैं। ये एक बड़ा सोचनीय सवाल हैं। लेकिन सोनोंग्राफी की रफ्तार को लगे इस ब्रेक के पीछे कारण वो सब नहीं हैं जो बताए जा रहे हैं। सूत्रों की माने तो इस के पीछे अस्पताल के बाहर लगें वो नीजी जांच केन्द्र हैं जो मोटा पैसा लगा कर खोले गये हैं और सरकार की इस योजना से बंद होने के कगार पर आने वाले थे। अब आप खुद समझ सकते होंगें की कारण क्या हो सकता हैं। 
 

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