सड़कों पर आई कांग्रेस की कलह, जयपुर में दो जगह मचा 'संग्राम'

Dinesh Kumar Dangi Published Date 2018/05/25 06:36

जयपुर। चुनावी साल में एक बार कांग्रेस की गुटबाजी औऱ कलह खुलकर सड़कों पर देखने को मिल रही है। टिकट के दावेदार और उनके समर्थक शक्ति प्रदर्शन करने के चक्कर में आपस में ही भिड़ रहे हैं। जयपुर जिले में आज कांग्रेस की गुटबाजी के दो रंग देखने को मिले। एक ओर जहां प्रभारी के सामने ही शाहपुरा की सियासी फूट उजागर हो गई, वहीं दूसरी ओर किशनपोल में पूर्व महापौर और पीसीसी सचिव में जमकर तकरार हुई। जाहिर है गुटबाजी का आलम यही रहेगा तो फिर कांग्रेस कैसे विधानसभा चुनाव का रण जीतेगी।

कहीं धक्कामुक्की हो रही है, प्रभारी अविनाश पांडेय के सामने जमकर विरोध हो रहा है तो कहीं सड़कों पर ही कांग्रेस नेता बहस कर रहे हैं। कांग्रेस कलह की ये दो तस्वीर सामने आई जयपुर जिले की। पहली तस्वीर शाहपुरा की है, जहां 'मेरा बूथ मेरा गौरव' सम्मेलन में बात हाथापाई तक पहुंच गई। शाहपुरा से टिकट दावेदार संदीप चौधरी के साथ दूसरे गुट के समर्थकों ने जमकर धक्कामुक्की की।

ताज्जुब की बात तो यह है कि सारा वाक्या प्रभारी अविनाश पांडेय के सामने घटित हुआ और बेबस पांडेय सारे माजरे को चुपचाप देखते रहे। बताया जा रहा है कि संदीप चौधरी के साथ यह बर्ताव करने वाले कार्यकर्ता आलोक बेनीवाल के समर्थक थे। मौके की नजाकत देखकर संदीप चौधरी ने वहां से निकलना ही मुनासिब समझा। इस दौरान सम्मेलन में हंगामा मच गया और कुछ लोगों ने कुर्सियां भी उछाल दी। बताया जा रहा है कि चौधरी की धक्कामुक्की में कपड़े भी फट गए।

दूसरी तस्वीर है जयपुर शहर के किशनपोल क्षेत्र की, जहां कांग्रेसी जुटे तो थे पेट्रोल डीजल की कीमतों को लेकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन के लिए, लेकिन आपस में ही उलझ गए। दरअसल, मामला तब गर्मा गया, जब किशनपोल से चुनाव लड़ चुके अमीन कागजी ने ज्योति खंडेलवाल के पहुंचने से पहले ही पुतला फूंक डाला। पुतले की राख को देखकर ज्योति गुस्से में ज्वालामुखी बन गई और जमकर सड़क पर ही कागजी की क्लास लगा डाली। ज्योति ने कहा कि तुम खुद को असुरक्षित महसूस क्यों कर रहे हो, आप जैसे नेता ही गुटबाजी को बढ़ावा देते हैं। ज्योति ने तमाम मसले की शिकायतें आला नेताओं से करने की बात कही है।

गौरतलब है कि अभी तो कांग्रेस ने पेट्रोल—डीजल और मेरा बूथ मेरा गौरव सम्मेलन को लेकर चुनावी आगाज किया ही था, लेकिन उसकी स्थित सिर मुंडाते ही ओले पड़ने जैसे हो गई है। जाहिर सी बात है कि विधानसभा चुनाव का रण जीतने के जतन में गुटबाजी अच्छे संकेत नहीं है। अगर आलम यही रहा तो फिर लड़ाई विपक्ष से नहीं अपनों में उलझ जाएगी।

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