सुप्रीम कोर्ट ने मंजूर की आरुषि तलवार हत्याकांड मे सीबीआई की अपील

Published Date 2018/08/10 01:15,Updated 2018/08/10 13:29, Written by- FirstIndia Correspondent

नई दिल्ली। देश के सबसे चर्चित हत्याकांड आरुषि तलवार के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा पेश की गई अपील को सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है। ऐसे में तलवार दंपति यानि राजेश और नूपुर तलवार की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। बता दें कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय आरुषि के माता-पिता राजेश और नूपुर तलवार को सबूतों के अभाव में रिहा कर चुका है। वहीं सीबीआई ने इस मामले में तलवार दंपति की रिहाई के खिलाफ अपील पेश की थी, जिसे आज सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल अक्तूबर में रिहा हुए तलवार दंपति को नोटिस भी भेजा है।

गौरतलब है कि पिछले साल 12 अक्टूबर को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तलवार दंपति को सबूतों के अभाव में रिहा करते हुए सीबीआई कोर्ट के उस फैसले को पलट दिया था, जिसमें इन दोनों को दोषी माना गया था। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तलवार दंपति को सबूतों के अभाव में रिहा कर दिया था। ऐसे में सीबीआई ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है। ऐसे में अब तलवार दंपति की मुश्किलें एक बार फिर से बढ़ सकती है।

आरुषि हत्याकांड की पूरी कहानी, तारीखों की जुबानी :
16 मई 2008 : आरुषि तलवार का खून से लथपथ शव नोएडा में उसके घर के बैडरूम में मिला। उसके गले पर गहरा जख्म था।
17 मई 2008 : 17 मई की सुबह घर के नौकर हेमराज का भी खून से लथपथ शव आरूषि के घर की छत पर पड़ा हुआ मिला। 
18 मई 2008 : 18 मई को पुलिस ने अपनी प्राथमिक जांच में कहा कि दोनो की हत्या सर्जरी के लिए प्रयुक्त उपकरण के जरिए की गई है। 
19 मई 2008 : राजेश तलवार के पूर्व नेपाली नौकर विष्णु शर्मा को संदिग्धों में शामिल किया गया। 
21 मई 2008 : दिल्ली पुलिस ने इस मामले में हत्या के एंगल से जांच शुरू की। 
22 मई 2008 : आरुषि हत्याकांड की ऑनर किलिंग के एंगल से जांच शुरू होने पर परिवार संदेह के घेरे में आ गया। मामले में पुलिस ने आरुषि के दोस्त से पूछताछ की, जिससे आरुषि ने हत्या के दिन से 45 दिन पहले तक कुल 688 बार फोन पर बात की थी।
23 मई 2008 : आरुषि के पिता राजेश तलवार को आरुषि-हेमराज हत्याकांड के मामले में गिरफ्तार कर लिया गया।
1 जून 2008 : सीबीआई को माले की जांच सौंपी गई जिसके बाद आरुषि-हत्याकांड की सीबीआई जांच शुरु हुई। 
13 जून 2008 : सीबीआई ने राजेश तलवार से पूछताछ के बाद नौकर कृष्णा को भी गिरफ्तार कर लिया। 
20 जून 2008 : दिल्ली के सीएफएसएल में राजेश तलवार को लाई डिटेक्शन टेस्ट किया गया।
25 जून 2008 : आरुषि की मां नुपुर तलवार का दूसरा लाई डिटेक्शन टेस्ट किया गया। नुपुर का पहला टेस्ट किसी निर्णय तक नहीं पहुंचा। 
26 जून 2008 : गाजियाबाद की अदालत ने राजेश तलवार को जमानत देने से मना कर दिया। 
3 जुलाई 2008 : आरोपियों के नॉर्को टेस्ट को चैलेंज करने वाली जनहित याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया।
12 जुलाई 2008 : राजेश तलवार को गाजियाबाद की डासना जेल ने जमानत दे दी।
5 जनवरी 2010 : सीबीआई ने आरोपियों का नार्को टेस्ट करने के लिए अदालत का रुख किया। 
29 दिसंबर 2010 : सीबीआई ने मामले में अपनी क्लोसर रिपोर्ट दाखिल की, जिसमें नौकरों को क्लीन चिट दे दी। जबकि रिपोर्ट में आरुषि के मां-बाप पर संदेह जताया गया। 
25 जनवरी 2011 : गाजियाबाद की अदालत के परिसर में राजेश तलवार पर हमला किया 
गया।
9 फरवरी 2011 : कोर्ट ने सीबीआई की उस रिपोर्ट का संज्ञान भी लिया जिसमें उसने कहा कि दंपति ने दोनों का मर्डर किया और सबूत मिटाए। 
21 फरवरी 2011 : आरोपी दंपति ने ट्रायल कोर्ट के समन को खारिज करने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया। 
18 मार्च 2011 : हाईकोर्ट ने समन को रद्द करने की उनकी याचिका को खारिज करते हुए उनके खिलाफ जांच के आदेश दे दिए।
19 मार्च 2011 : दंपति ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया जिसने उनके खिलाफ चल रही जांच पर स्टे लगा दिया। 
6 जनवरी 2012 : एपेक्स कोर्ट ने तलवार की याचिका को खारिज करते हुए ट्रायल जारी रखने की इजाजत दे दी। 
11 जून 2012 : स्पेशल जज एस लाल के सम्मुख मामले का ट्रायल शुरू हुआ। 
10 अक्टूबर 2013 : मामले में आखिरी जिरह शुरू हुई। 
25 नवंबर 2013 : गाजियाबाद की स्पेशल सीबीआई अदालत ने तलवार दंपति को दोषी पाया।
26 नवंबर 2013 : सीबीआई कोर्ट ने आरुषि-हेमराज की हत्या के मामले में दंपति को दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
21 जनवरी 2014 : राजेश और नुपुर तलवार ने सीबीआई अदालत के फैसले के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया।
19 मई 2014 : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस मामले में तलवार दंपति को जमानत देने से मना कर दिया।
11 जनवरी 2017 : आरुषि-हेमराज हत्याकांड के मामले में सीबीआई के उन्हें दोषी ठहराए जाने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित कर लिया। 
17 सितंबर 2017 : इलाहाबाद हाईकोर्ट  ने हेमराज-आरुषि हत्याकांड के मामले में अपना फैसला सुरक्षित कर लिया।
12 अक्टूबर 2017 : सबूतों के अभाव में संदेह का लाभ देते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तलवार दंपति को मामले में बरी कर दिया।
10 अगस्त 2018 : सीबीआई की ओर से इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ पेश की गई अपील को सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार कर लिया।

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