विपक्ष की एकजुटता के सामने इसलिए मात खाता भाजपा का 'मंत्र'

Published Date 2018/05/31 06:01,Updated 2018/05/31 06:41, Written by- Pawan Tailor

जयपुर पवन टेलरसाल 2013—14 में देशभर नरेन्द्र मोदी की हवा कुछ इस कदर चली थी कि देशभर में कांग्रेस का मानों सूपड़ा ही साफ हो गया था, लेकिन हालिया कई चुनाव—उपचुनावों में भाजपा के यह जादू बेअसर साबित होता दिखा है। 2013—14 में होने वाले विधानसभा एवं लोकसभा चुनावों में आलम कुछ ऐसा था कि भाजपा के टिकट पर जिस किसी ने भी चुनाव लड़ा, उसके सिर पर जीत का सेहरा बंद ही गया। पूरे देश में जहां भी कोई चुनाव हुए, वहां भाजपा का कमोबेश हरेक उम्मीदवार जीत हासिल कर सत्ता में आसीन होता चला गया। ये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का ही जलवा था कि भाजपा के कमोबेश हरेक उम्मीदवार के हिस्से में जीत ही आती चली गई, लेकिन शायद अब माजरा बदलता दिख रहा है। पेश है यह विशेष रिपोर्ट...

इन सबसे इतर, मौजूदा समय कुछ समय से भाजपा की जीत का सिलसिला कुछ हद तक थमता हुआ दिखाई भी दिया है। हाल के समय में होने वाले कई विधानसभा एवं लोकसभा चुनावों—उपचुनावों में भाजपा को जीत के लिए काफी मशक्कत भी करनी पड़ी। वहीं कई जगहों पर भाजपा के उम्मीदवारों के हिस्से में हार भी आई। खास बात ये है कि भाजपा के उम्मीदवारों के हिससे में जहां—जहां जीत आई, वहां विपक्ष की फूट होने की वजह से भाजपा को जीत हासिल हुई। इस​के विपरीत जहां पर भी विपक्षी दलों ने एकजुटता के साथ चुनाव लड़ा वहां पर भाजपा को मात और विपक्षी दल को जीत नसीब हुई है।

हाल के समय में कई राज्यों में होने वाले विधानसभा एवं लोकसभा चुनावों—उपचुनावों के परिणामों पर नजर डाली जाए तो चौकाने वाली बात सामने आती है। खासतौर से साल 2014 के बाद होने वाले चुनावों—उपचुनावों में भाजपा को भले ही कई जगहों पर जीत मिली हो, लेकिन जिन जगहों पर भाजपा को जीत मिली, वहां पर किसी न किसी रूप में विपक्ष की फूट ही उनकी हार का सबसे बड़ा कारण बनती दिखाई देती है। वहीं इसके विपरीत जिन जगहों पर विपक्षी दलों ने एकजुटता के साथ चुनाव लड़ा, वहां पर भाजपा का 'मंत्र' बेअसर सा साबित होता दिखाई देता है।

2014 के आम चुनाव में ऐतिहासिक जीत के बाद पिछले चार सालों में बीजेपी के प्रदर्शन में भारी गिरावट आई नजर आती है। आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो बीजेपी को 2014 से लेकर मार्च 2018 के बीच 23 लोकसभा उपचुनावों में से सिर्फ 4 सीटों पर जीत नसीब हो सकी है। 2014 से जिन 23 सीटों पर लोकसभा के उपचुनाव हुए हैं, इनमें से 10 सीटों पर पहले से ही बीजेपी का कब्जा था। इस दौरान बीजेपी को एक भी सीट पर जीत नहीं मिली। बीजेपी सिर्फ चार सीट बचाने में कामयाब रही है, जिनमें से दो सीटों पर बीजेपी को 2014 में जीत मिली थी, जब नरेंद्र मोदी को ऐतिहासिक जनादेश मिला था। इसके बाद बीजेपी को 2016 में 2 सीटों पर जीत मिली। साल 2015, 2017 और मार्च 2018 में बीजेपी को एक भी लोकसभा उपचुनाव में जीत नहीं मिली।

राजस्थान के अजमेर और अलवर की सीटों पर कांग्रेस ने शानदार जीत हासिल की। इस साल मार्च में उत्तर प्रदेश में हुए उपचुनाव में बीजेपी को बड़ा झटका लगा था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के क्षेत्र गोरखपुर और उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की इलाहाबाद में फुलपुर सीट पर बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा था। बीजेपी को बिहार के अररिया में लोकसभा के उपचुनाव में भी हार झेलनी पड़ी और राष्ट्रीय जनता दल ने जीत हासिल की। इसके अतिरिक्त देश के 11 राज्यों में 4 लोकसभा और 10 विधानसभा सीटों के लिए हुए उपचुनाव के बाद हुई रही वोटों की गिनती में उत्तरप्रदेश, बिहार और झारखंड में विपक्षी दलों के महागठबंधन ने भाजपा को करारी मात दी है।

उत्तर प्रदेश की कैराना लोकसभा सीट और नुरपूर विधानसभा सीट पर अखिलेश-मायावती-अजीत चौधरी की तिकड़ी मोदी और योगी पर हावी रही है। वहीं बिहार में राष्ट्रीय जनता दल और कांग्रेस ने जेडीयू-भाजपा गठबंधन से जोकीहाट विधानसभा सीट छीन ली। झारखंड में विपक्षी दलों की एकजुटता के आगे सत्तारूढ़ दल भाजपा की एक न चली और वह झारखंड मुक्ति मोर्चा से सिल्ली और गोमिया विधानसभा की सीटें छीनने में नाकाम रही। हालांकि महाराष्ट्र की पालघर लोकसभा सीट से भाजपा अपनी सीट बचाने मे जरूर कामयाब हो गई, जहा भाजपा को 29 हजार 572 वोटों से जीत ली है। वहीं उत्तराखंड की थराली विधानसभा सीट को बचाने में भी भाजपा कामयाब ​हो गई।

4 लोकसभा और 10 विधानसभा सीटों के नतीजों के बाद ये रहे आंकड़े :

लोकसभा सीटें

2014

अब

1. कैराना (यूपी)

भाजपा

लोकदल

2. पालघर (महाराष्ट्र)

भाजपा

भाजपा

3. गोंदिया (महाराष्ट्र)

भाजपा

एनसीपी

4. नगालैंड

एनडीपीपी

एनडीपीपी

 

विधानसभा सीटें

पहले

अब

1. नूरपुर (उप्र)

भाजपा

समाजवादी पार्टी

2. थराली (उत्तराखंड)

भाजपा

भाजपा

3. शाहकोट (पंजाब)

शिरोमणी अकाली दल

कांग्रेस

4. जोकीहाट (बिहार)

शिरोमणी अकाली दल

राष्ट्रीय जनता दल

5. गोमिया (झारखंड)

झारखडं मुक्ति मोर्चा

झारखंड मुक्ति मोर्चा

6. महेशतला (पं. बंगाल)

टीएमसी

टीएमसी

7. पलूस कडेगाव (महाराष्ट्र)

कांग्रेस

कांग्रेस

8. सिल्ली (झारखंड)

झारखंड मुक्ति मोर्चा

झारखंड मुक्ति मोर्चा

9. चेंगन्नूर (केरल)

सीपीआईएम

सीपीआईएम

10. अंपाती (मेघालय)

कांग्रेस

कांग्रेस

ये रहे 2014 के बाद के उपचुनाव के नतीजे :
2014 : 
— बीड़, (महाराष्ट्र) 2014 में BJP, उपचुनाव के बाद BJP
— कंधमाल, (ओडिशा) में 2014 में BJD, उपचुनाव के बाद BJD
— मेढ़क, (तेलंगाना) में 2014 में TRS, उपचुनाव के बाद TRS
— वडोदरा, (गुजरात) में 2014 में BJP, उपचुनाव के बाद BJP
— मैनपुरी, (उत्तर प्रदेश) में 2014 में SP, उपचुनाव के बाद SP
2015 :
— रतलाम, (मध्यप्रदेश) में 2014 में BJP, उपचुनाव के बाद INC
— वारंगल, (तेलंगाना) में 2014 में TRS, उपचुनाव के बाद TRS
— बनगांव, (पश्चिम बंगाल) में 2014 में AITC, उपचुनाव के बाद AITC
2016 :
— लखीमपुर, (असम) में 2014 में BJP, उपचुनाव के बाद BJP
— शहडोल, (मध्य प्रदेश) में 2014 में BJP, उपचुनाव के बाद BJP
— कुच बिहार, (पश्चिम बंगाल) में 2014 में AITC, उपचुनाव के बाद AITC
— तमलुक, (पश्चिम बंगाल) में 2014 में AITC, उपचुनाव के बाद AITC
— तुरा, (मेघालय) में 2014 में NPP, उपचुनाव के बाद NPP
2017 :
— अमृतसर, (पंजाब) में 2014 में INC, उपचुनाव के बाद INC
— गुरदासपुर, (पंजाब) में 2014 में BJP, उपचुनाव के बाद INC
— श्रीनगर, (जम्मू—कश्मीर) में 2014 में PDP, उपचुनाव के बाद NC
— मल्लापुरम, (केरल) में 2014 में IUML, उपचुनाव के बाद IUML
2018 :
— अलवर, (राजस्थान) में 2014 में BJP, उपचुनाव के बाद INC
— अजमेर, (राजस्थान) में 2014 में BJP, उपचुनाव के बाद INC
— उलुबेरिया, (पश्चिम बंगाल) में 2014 में AITC, उपचुनाव के बाद AITC
— गोलखपुर, (उत्तर प्रदेश) में 2014 में BJP, उपचुनाव के बाद SP
— फूलपुर, (उत्तर प्रदेश) में 2014 में BJP, उपचुनाव के बाद SP
— अररिया, (बिहार) में 2014 में RJD, उपचुनाव के बाद RJD

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