पुलिस के साथ जब इस बात की खबर बाल कल्याण समिति को मिली, तो बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष बिजेंद्र परमार अस्पताल पहुंच गए। अस्पताल पहुंचे समिति के अध्यक्ष बिजेंद्र परमार ने बताया कि धौलपुर शहर में गत 2 वर्षों में अब तक 8 नवजात मिले हैं, जिनमें से दो नवजात बालिकाओं की मौत हो चुकी है। गुरुवार सुबह सड़क किनारे मिली नवजात को बाल कल्याण समिति ने अपनी सुपुर्दगी में लेते हुए इलाज के बाद जयपुर भेजने का निर्णय लिया है।

मदर्स डे के ठीक तीसरे दिन नवजात के मिलने के बाद जो लोग मां शब्द की तारीफ में सोशल मीडिया पर चार चांद लगाए हुए थे, वहीं धौलपुर में नवजात के मिलने के बाद वहीं लोग उस निर्दयी मां को कोसते हुए नजर आ रहे हैं, जिसने 2 दिन की मासूम को मरने के लिए सड़क किनारे छोड़ दिया। धौलपुर में नवजात मिलने के बाद पुलिस ने उस कुमाता की तलाश शुरू कर दी है, जिसकी वजह से मां शब्द को बदनामी का दंश झेलना पड़ रहा है।

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कभी घोड़ों की टापों दहला करता था ये इलाका, अब अक्सर सुनाई देती है नवजात कन्याओं की रुदाली

Published Date 2018/05/16 02:21,Updated 2018/05/16 02:46, Written by- FirstIndia Correspondent

धौलपुर। डकैतों के लिए मशहूर जिस शहर में कभी घोड़ों की टापों से लोगों के दिल दहला करते थे, आजकल उसी शहर में नवजात कन्याओं की रुदाली अक्सर मां को याद करते हुए सुनी जा सकती है। जी हां, हम बात कर रहे हैं धौलपुर शहर की, जहां गुरुवार सुबह एक बार फिर से एक मां ने अपने नवजात को मरने के लिए सड़क किनारे छोड़ दिया।

मां के दूध की दो बूंद के लिए अस्पताल के fbnc वार्ड में रोती-बिलखती एक मासूम को गुरुवार सुबह उसकी निर्दयी मां मरने के लिए उसे सड़क किनारे छोड़कर चली गईं। दरअसल, मामला यूं है कि रोज की तरह गुरुवार सुबह घूमने के लिए निकले अस्पताल के मेल नर्स को सड़क किनारे रोती हुई नवजात दिखाई दी। इस पर मेल नर्स ने मानवता निभाते हुए इस नवजात को अस्पताल में भर्ती करा दिया। नवजात का इलाज कर रहे चिकित्सकों के मुताबिक, 1 से 2 दिन की नवजात पूरी तरह से स्वस्थ है, जिसका चिकित्सकों की देखरेख में इलाज किया जा रहा है।

नवजात को अस्पताल लेकर पहुंचे मेल नर्स गजेंद्र यादव के मुताबिक, सुबह के पहर जैसे ही वह राजा खेड़ा बाईपास पर पहुंचा, तभी उसे नवजात के रोने की आवाज सुनाई दी। इस पर आसपास देखने पर मेल नर्स को सड़क किनारे नवजात रोती हुई मिली। नवजात के मिलने के बाद मेल नर्स ने आसपास उसकी मां को काफी तलाश किया, लेकिन नवजात की मां के ना मिलने के बाद उसने मानवता का धर्म निभाते हुए पुलिस को सूचना देकर नवजात को अस्पताल में भर्ती करा दिया।

पुलिस के साथ जब इस बात की खबर बाल कल्याण समिति को मिली, तो बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष बिजेंद्र परमार अस्पताल पहुंच गए। अस्पताल पहुंचे समिति के अध्यक्ष बिजेंद्र परमार ने बताया कि धौलपुर शहर में गत 2 वर्षों में अब तक 8 नवजात मिले हैं, जिनमें से दो नवजात बालिकाओं की मौत हो चुकी है। गुरुवार सुबह सड़क किनारे मिली नवजात को बाल कल्याण समिति ने अपनी सुपुर्दगी में लेते हुए इलाज के बाद जयपुर भेजने का निर्णय लिया है।

मदर्स डे के ठीक तीसरे दिन नवजात के मिलने के बाद जो लोग मां शब्द की तारीफ में सोशल मीडिया पर चार चांद लगाए हुए थे, वहीं धौलपुर में नवजात के मिलने के बाद वहीं लोग उस निर्दयी मां को कोसते हुए नजर आ रहे हैं, जिसने 2 दिन की मासूम को मरने के लिए सड़क किनारे छोड़ दिया। धौलपुर में नवजात मिलने के बाद पुलिस ने उस कुमाता की तलाश शुरू कर दी है, जिसकी वजह से मां शब्द को बदनामी का दंश झेलना पड़ रहा है।

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