घास के छप्पर के नीचे चलता है यह स्कूल, एक साथ होती हैं पांच कक्षाओं की पढ़ाई

FirstIndia Correspondent Published Date 2018/06/28 05:53

बाड़मेर (पीके बृजवाल)। शिक्षा पर केंद्र और राज्य सरकार भले ही करोड़ों रुपए का खर्च कर रही है, लेकिन बाड़मेर जिले में एक ऐसा स्कूल भी है, जो पिछले पांच साल से कभी पेड़ के नीचे तो कभी घास के बने छप्पर के नीचे संचालित हो रहा है। इतना ही नहीं, इस स्कूल में करीब 40 छात्र-छात्राओं का नामकरण है, लेकिन गांव के कुछ दबंग स्कूल भवन बनने नहीं दे रहे हैं। यही कारण है कि ग्रामीणों का आपसी विवाद इन बच्चों की शिक्षा के साथ खिलवाड़ कर रहा है।

बाड़मेर जिला मुख्यालय से करीब 15 किलोमीटर दूर स्थित सांगनसेरी गांव की राजकीय प्राथमिक स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को बिल्डिंग के अभाव में घास से बने छप्पर के नीचे मजबूरी में पढ़ना पड़ रहा है। दरअसल, इस सरकारी स्कूल के लिए जमीन भी स्वीकृत हो रखी है, लेकिन इस गांव के कुछ दबंग स्कूली की जमीन पर भी भवन नहीं बनाने दे रहे हैं। दबंगों का आंतक इतना है कि इस गांव में यहां पहले दो स्कूल स्वीकृत हुई, लेकिन दबंगों की हठधर्मिता के चलते स्वीकृत दो स्कूलों को भी यहां से स्थानांतरित करना पड़ा।

फिलहाल घास के छप्पर में चल रही स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को सर्दी, गर्मी या बारिश सहित हर परिस्थिति में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों की ओर से लगातार स्कूल बिल्डिंग के लिए प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन प्रशासनिक अधिकारियों की उदासीनता के चलते गांव के दबंग इस विद्यालय की बिल्डिंग को बनने नहीं दे रहे हैं। स्कूल में पढ़ाने वाले शिक्षक राजेश चौधरी और पवन शर्मा बताते हैं कि बिल्डिंग के अभाव में बहुत परेशानियां झेलनी पड़ती है। सुविधाओं के नाम पर स्कूल में कुछ नहीं है। हालांकि जमीन आवंटित है और बजट भी मंजूर हो रखा है, मगर ग्रामीणों के आपसी विवाद के चलते स्कूल की बिल्डिंग का कार्य नहीं हो पा रहा है।

गौरतलब है कि सरकार ने स्कूल के लिए 5 बीघा जमीन आवंटित कर रखी है। वर्ष 2015 में 15 लाख रुपए भी भवन निर्माण के लिए स्वीकृत किए थे, मगर विवाद के कारण आज तक भवन निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है। ऐसे में यह स्कूल कागजों से निकल कर धरातल पर नहीं आ सका है। मजे की बात तो यह है कि अध्यापक के बैग में ऑफिस बना हुआ है। क्योंकि बिल्डिंग के अभाव में ऑफिस का रिकॉर्ड अध्यापक को बैग में ही रखना पड़ता है।

अभी घास के एक छप्पर में 5 कक्षाएं एक साथ चलती है और इस स्कूल में दो अध्यापक कार्यरत हैं, जो सभी बच्चों को पढ़ाते हैं। बहरहाल, स्कूल के लिए आवंटित जमीन के पास क्रेशर का काम चल रहा है। प्रभावशाली दो पक्षों की ओर से अड़चनें पैदा करने के कारण बिल्डिंग का काम नहीं हो पा रहा है। सालों से यह विवाद चल रहा है, लेकिन किसी प्रशासनिक या विभागीय अधिकारी ने इसे सुलझाने की जहमत तक नहीं जुटाई है। जबकि कई बार ग्रामीणों ने जिम्मेदारों को इस संबंध में अवगत भी करवाया, मगर प्रशासनिक अधिकारियों की कुंभकर्णी नींद नही खुली।

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