ई-असेसमेंट से आएगी पारदर्शिता, विभाग और करदाता को मिलेगी राहत

Published Date 2018/06/27 08:36, Written by- FirstIndia Correspondent

जयपुर। केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड ने 10 लाख रुपए व इससे अधिक आय वर्ग वाले करदाताओं के लिए ई-असेसमेंट की अनिवार्यता कर दी है। इसके अलावा कुछ ऐसी और श्रेणियां है, जिनके करदाताओं का असेसमेंट ई-माध्यम से ही होगा। राज्य में ई-असेसमेंट को लेकर करदाता ज्यादा जागरुक नहीं है। यहीं कारण है कि पिछले साल देश के 7 मेट्रो शहरों में हुए ई-असेसमेंट के आंकड़ों में राजस्थान संभवत: सबसे पिछड़ा है।

राज्य में केवल 11 करदाताओं ने ही ई-असेसमेंट कराया, जबकि देश भर में यह आंकड़ा 27 हजार है। इस तरह की चर्चा बुधवार को राजस्थान चैम्बर व आयकर विभाग की ओर से ई-अससेमेंट पर आयोजित जागरुकता संगोष्ठी में हुई। संगोष्ठी की मुख्य वक्ता PCIT जयपुर -1 सुनीता बैंसला ने कहा कि ई-अससेमेंट से न केवल पारदर्शिता आएगी, बल्कि करदाताओं के कर निर्धारण में समय भी बचेगा। इससे जिन करदाताओं को रिफण्ड जारी होने हैं, उन्हें भी जल्द रिफण्ड मिल सकेंगे।

उन्होंने बताया कि करदाताओं के पास अब डाक से स्क्रूटनी नोटिस नहीं आएगा। ये नोटिस करदाता की ओर से ITR में भरे गए E-mail पते पर ही भेजा जाएगा। विशेष परिस्थितयों को छोड़ स्क्रूटनी मामलों का निपटारा केवल ई-अससेमेंट से ही होगा। संगोष्ठी को संबोधित करते हुए राजस्थान चैम्बर के महासचिव डॉ. केएल जैन ने कहा कि  राजस्थान में आयकर राजस्व और करदाताओं की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है।

ई-अससेमेंट की शुरुआत से करदाताओं को राहत मिलेगी, लेकिन इसमें आ रही व्यवहारिक कठिनाइयों को दूर करने के लिए विभाग और सरकार दोनों को पहल करनी चाहिए। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में उद्यमी, कारोबारी व आयकर अधिकारी भी मौजूद रहे और  ई-अससेमेंट को लेकर खूब सवाल-जवाब हुए।

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