त्रिनेत्र गणेश मंदिर रणथम्भौर : आधुनिकता पर आज भी भारी आस्था

Published Date 2018/06/26 12:57,Updated 2018/06/26 01:09, Written by- FirstIndia Correspondent
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सवाईमाधोपुर। रणथम्भौर दुर्ग स्थित त्रिनेत्र गणेश मंदिर क्षेत्र के लोगों के लिये आस्था का केन्द्र है, जिसके चलते सालभर यहां भक्तों का तांता लगा रहता है। लाखों की संख्या में लोग हर साल यहां त्रिनेत्र गणेश के दर्शन करने आते हैं। ईश्वर को लेकर लोग में तरह-तरह की आस्था है, मगर रणथम्भौर दुर्ग स्थित त्रिनेत्र गणेश को लेकर क्षेत्र के किसानों में एक विशेस आस्था है और इस आस्था को पूरा किये बिना क्षेत्र के किसान अपने खेतों हल नहीं चलाते हैं। बारिश शुरु होने के साथ ही खेतों में बुवाई करने से पहले क्षेत्र का हर किसान इस गणेश मंदिर में जरुर आता है और मंदिर के सामने खेत बनाकर अपने हाथों से उसमें हल निकाल कर बीज बोता है। साथ ही भगवान गणेश से अच्छी फसल की कामना करता है।

क्षेत्र के किसानों में रणथम्भौर त्रिनैत्र भगवान गणेश को लेकर एक अलग तरह की विशेष आस्था है, जिसके चलते हिन्दी महिनों में आसाढ माह में खेतों की बुवाई करने से पहले क्षेत्र का हर किसान रणथम्भौर आना नहीं भूलता है। वैसे तो सालभर ही इस मंदिर में भक्तों का तांता लगा रहता है और सालभर में लाखों की संख्या में यहां भक्त गणेश दर्शन के लिये आते हैं, मगर जून—जुलाई महीने में क्षेत्र के किसानों का यहां भारी जमावड़ा रहता है। क्योंकि अपने खेत में फसल बौने से पहले किसान भगवान गणेश का आशीर्वाद लेने जरुर आते हैं। यहां आने पर किसान भगवान गणेश के दर्शन करने के बाद मंदिर के सामने खेत बनाकर अपने हाथों की अंगुलियों से उसमें हल निकालता है और अपने साथ लाया हुआ बीज उसमें बोते हैं। साथ ही भगवान गणेश से अच्छी फसल होने की कामना करता है। वहीं अपने साथ लाए हुए अनाज को भगवान गणेश के चढ़ाने के बाद कुछ अनाज को वापस साथ ले जाता है और उसे खेत में बोने वाले बीज में मिला देते हैं, ताकी फसल अच्छी हो।

इतना ही नहीं, यहां आने वाले किसान यहां से पांच कंकर भी अपने साथ ले जाते हैं और उसे साल भर संभालकर रखते हैं। साल बाद दोबारा इस समय पर उन पांचों कंकरों को वापस त्रिनेत्र गणेश मंदिर में लाते हैं और छोड़ देते हैं। एक बार फिर उसी क्रम में यह सब करते हैं। यह सिलसिला सालों से चला आ रहा है, जो किसानों की इस अनोखी आस्था का प्रतीक है।

इस बारे में किसानों का कहना है कि वो हर साल आसाढ़ माह में बीज तैयार करने के समय ही त्रिनेत्र गणेश के दर्शन करने आते हैं। किसानों का मानना है कि ऐसा करने से भगवान गणेश प्रसन्न रहते हैं और फसल अच्छी पैदा होती है। साथ ही जो पांच कंकर ये लोग अपने साथ अपने घर ले जाते हैं, उसे गणेशजी का रुप माना जाता है। उन कंकरों के घर में रखे रहने से घर में सुख शांति और बरकत रहती है। सालभर बाद ही किसान उन पांचों कंकरों को विदा करने ये लोग इस मंदिर में आते हैं। यह सिलसिला हमेशा जारी रहता है। हर साल किसान यहां आते हैं और अपनी आस्था के अनुसार ये सब करते हैं। बहरहाल, आधुनिकता के इस दौर में भी किसानों की भगवान गणेश पर भारी आस्था है। यही वजह है कि त्रिनेत्र गणेश के दरबार में आने वाले श्रद्धालुओं की सख्या में हर साल वृद्धी हो रही है, जिसे देखकर लगता है कि आज भी आधुनिकता पर आस्था भारी है।

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