सीएम राजे का वागड़ दौरा, क्षेत्र में जड़ें जमाने में जुटी बीजेपी

FirstIndia Correspondent Published Date 2018/05/29 08:42

जयपुर (योगेश शर्मा)। राजस्थान की राजनीति के मिजाज में मेवाड़-वागड़ की एक अलग ही पहचान है। यहां से जिस पार्टी की चुनावी आंधी चलती है, उसी को राजस्थान पर राज करने का अवसर मिलता है। सियासी दल यहां की तासीर को समझते हैं। लिहाजा, मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने वागड़ से दौरा शुरु कर दिया है। दौरा सरकारी है, लेकिन उनकी मौजूदगी बीजेपी को यहां मजबूती देकर जाएगी। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने पहले से ही मेवाड़ पर पैनी नजरें गड़ा रखी है। गांधी परिवार और कांग्रेस का फोकस भी यहीं है। राजस्थान की सियासत में मेवाड़ और वागड़ का खास स्थान हैं। ऐसे में पेश है ये खास सियासी रिपोर्ट...

गोविन्द गुरु की धरती और मामा बालेश्वर दयाल की कर्मस्थली वागड़ की अपनी अलग पहचान है। राजस्थान की इस दक्षिण पट्टी में न केवल राजस्थान, बल्कि गुजरात और एमपी से आने वाली सियासी हवा का असर होता है। बेणेश्वर के किनारे बैठे मावजी महाराज का मंदिर संपूर्ण देश के आदिवासियों का तीर्थस्थल है। राजनीतिक तौर पर इस इलाके में राजनीति बयार जब बहती है, तो एक साथ और एक ही दिशा में बहती है। 

परम्परागत तौर पर इलाके में कांग्रेस की जड़ें गहरी रही है। यहीं से निकले गुदड़ी के लाल  हरिदेव जोशी ने राजस्थान की मुख्यमंत्री की कुर्सी को संभाला था। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने मिशनरी प्रभाव को थामने के लिये आदिवासी अंचल में सालों पहले काम शुरु कर दिया था। आगे चलकर बीजेपी को स्थापित करने में अहम भूमिका निभाई सुंदर सिंह भंडारी ने। बाद में भैंरोसिंह शेखावत ने बीजेपी को मजबूत किया और वसुंधरा राजे ने परवान चढ़ाया।

राजे के प्रभाव का ही असर है कि परिवर्तन यात्रा और उसके बाद सुराज संकल्प यात्रा दोनों के वक्त वागड़ में बीजेपी ने कांग्रेस को बड़े झटके दिये। यही कारण है कि सत्ता का द्वार कहे जाने वाले वागड़ से वसुंधरा राजे ने चुनावी आगाज कर दिया। आदिवासियों के आस्था केन्द्र मानगढ़ धाम पहुंचकर वसुंंधरा राजे ने गोविन्द गुरु की प्रतिमा को नमन किया। राजे ने यहां से सियासी संदेेश भी दिया कि वागड़ की जनता उनके साथ है।

मेवाड़ और वागड़ में बढ़ते कांग्रेस के ग्राफ को बीजेपी ने आरएसएस की मदद से ध्वस्त किया। कमल को विराट रुप लेते देख कांग्रेस की चिंता लाजिमी थी। बीते लोकसभा चुनावों में सांसद भी बीजेपी का जीता। उदयपुर और बांसवाड़ा-डूंगरपुर लोकसभा जीत के साथ ही बीजेपी ने उदयपुर संभाग की सर्वाधिक विधानसभा सीट जीती। कांग्रेस की लाज बची बागीदौरा और झाडोल में। बागौदोरा में महेन्द्र जीत मालवीय और झाडोल में हीरालाल दरांगी ने कांग्रेस को पताका लहराई, लेकिन कांग्रेस को लग गया कि उनका मजबूत बेस हिल चुका है।

प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष सचिन पायलट ने नाजुक हालात समझते हुये यहां के दौरे बढ़ाये। यहां किसान-आदिवासी सम्मेलन आयोजित किये और फिर जनवेदना सम्मेलन हुआ। इसके बाद राहुल गांधी का मूवमेंट बढ़ा। इन्हीं सबके मद्देनजर बीजेपी ने तय किया कि विकास का मॉडल सामने रखकर पॉलिटिक्स को नई दिशा दी जाये। मानगढ़ के पैनोरमा के जरिये आदिवासियों से भावुक लगाव की कोशिश वसुंधरा राजे ने की है।

गौरतलब है कि मानगढ पर नरेन्द्र मोदी भी आ चुके हैं। जब गुजरात मुख्यमंत्री थे, तब आये थे। कभी बेणेश्वर के संगम से गांधी परिवार राजस्थान में चुनावी आगाज करता था और आंधी चलती थी कांग्रेस की। बीते कुछ सालों में वसुंधरा राजे ने वागड़ में कांग्रेस की आंधी को तो रोका ही, साथ ही काम किया फिजां बदलने का।

बीजेपी का मेवाड़—वागड़ में कैसा रहा सफर :
- कद्दावर नेता सुंदर सिंह भंडारी ने मेवाड़ में जनसंघ खड़ा किया।
- गुलाबचंद कटारिया जैसे संघ के स्वयंसेवकों को पार्टी में लाये।
- बीजेपी के लिये जमीन तैयार की।
- पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने 70के दशक में यहां प्रवास किये।
- भानुप्रकाश शास्त्री जैसे नेताओं ने बीेजेपी को खड़ा करने में पसीना बहाया।
- मेवाड़-वागड़ की धरती पर आरएसएस ने नेटवर्क तैयार किया।
- संघ प्रचारक सोहनसिंह ने आदिवासी धरती पर संघ नेटवर्क सशक्त बनाया।
- वनवासी कल्याण परिषद बनाकर मिशनरी प्रभाव को रोकने का काम किया।
- आदिवासी क्रांतिकारी गोविन्द गुरु के स्मारक के लिये कार्य किया।
- यह इलाका गुजरात से सटा है, लिहाजा नरेन्द्र मोदी का प्रभाव काम किया।
- बीते सालों में संघ प्रमुख मोहन राव भागवत के मेवाड़ की धरती पर प्रवास हुए। 
- मानगढ़ धाम और प्रताप गौरव स्मारक बनाकर संघ ने यहां अपने दखल को सशक्त किया।
- वसुंधरा राजे ने आदिवासी इलाके में कमल को मजबूती दी और नये आदिवासी नेतृत्व को भाजपा में लेकर आई।
- कुशलगढ़ जैसे सीटों पर आजादी के बाद पहली बार कमल खिलाया।
- कांग्रेस को मजबूत चुनौती देते हुए बीजेपी की उर्वर जमीन वसुंधरा राजे ने तैयार की।
- अभी भी राजे सरकार में मेवा़ड़-वागड़ कोटे को प्राथमिकता दे रखी है।
- गुलाबचंद कटारिया प्रदेश के गृह मंत्री, किरण माहेश्वरी उच्च शिक्षा मंत्री है। वहीं नंदलाल मीणा जनजाति विकास मंत्री है। धनसिंह रावत और सुशील कटारा को राज्य मंत्री बना रखा है। इसके साथ ही डूंगरपुर राजघराने के हर्षवर्धन सिंह को राज्यसभा में भेजा।
- वागड़ को सियासी नियुक्तियों में भी व्यापक प्रतिनिधित्व हासिल है।
- जनजाति आयोग की चैयरमैन प्रकृति खराडी यहीं से है।

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