पाकिस्तान में आसिया बीबी पर बवाल, जानिए वजह

FirstIndia Correspondent Published Date 2018/11/02 05:51

नई दिल्ली। पिछले कई दिनों से ईशनिंदा कानून के तहत सज़ा काट रही ईसाई महिला आसिया बीबी को कोर्ट द्वारा बरी किए जाने पर पाकिस्तान के कई शहरों में विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं। लोग सुप्रीम कोर्ट से आसिया बीबी को मौत की सज़ा देने की मांग कर रहे हैं। जबकि पाकिस्तान की निचली और सुप्रीम कोर्ट दोनों ने कहा कि आसिया बीबी से ऐसा कोई अपराध नहीं किया है जो उन्हें मौत की सज़ा दी जाए। जानकारी के मुताबिक पाकिस्तान में जगह-जगह विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं। तो वहीं पंजाब प्रांत में धारा-144 लागू कर दी गई है।

पुलिस की गाड़ियों से ये ऐलान किया जा रहा है कि पांच से ज़्यादा लोग एक साथ खड़े दिखाई न दें। जबकि पाक प्रधानमंत्री इमरान खान ने भी बयान जारी किया है जिसमें उन्होंने जनता से गुमराह न होने की अपील की है और प्रदर्शनकारियों को कड़ी कार्रवाई की धमकी दी है।

गौरतलब है कि जून, 2009 में आसिया नूरीन अपने घर के पास फालसे के बाग में दूसरी महिलाओं के साथ काम कर रहीं थीं। वहीं उनका झगड़ा हुआ। आसिया ने अपनी किताब 'ब्लासफेमी' में इस घटना का बाकायदा जिक्र है। 14 जून की इस घटना के बारे में वे न्यूयॉर्क पोस्ट में छपे एक लेख में लिखती हैं, "मुझे आज भी 14 जून, 2009 की तारीख याद है।

इस तारीख से जुड़ी हर चीज याद है। मैं उस दिन फालसा बटोरने के लिए गई थी। उस दिन आसमान से आग बरस रही थी। दोपहर होते-होते गरमी इतनी तेज हो गई कि भट्टी में काम करने जैसा लग रहा था। मैं पसीने से तरबतर थी। गर्मी इतनी ज्यादा थी कि मेरे शरीर ने काम करना बंद कर दिया।" वे आगे लिखती हैं, "मैं झाड़ियों से निकलकर पास ही में बने हुए एक कुएं के पास पहुंची और कुएं में बाल्टी डालकर पानी निकाल लिया। इसके बाद मैंने कुएं पर रखे हुए एक गिलास को बाल्टी में डालकर पानी पिया। लेकिन जब मैंने एक महिला को देखा जिसकी हालत मेरी जैसी थी तो मैंने उसे भी पानी निकालकर दिया। तभी एक महिला ने चिल्लाकर कहा कि ये पानी मत पियो क्योंकि 'ये हराम है' क्योंकि एक ईसाई महिला ने इसे अशुद्ध कर दिया है।

आसिया लिखती हैं, "मैंने इसके जवाब में कहा कि मुझे लगता है कि ईसा मसीह इस काम को पैग़ंबर मोहम्मद से अलग नज़र से देखेंगे। इसके बाद उन्होंने कहा कि तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई, पैग़ंबर मोहम्मद के बारे में कुछ बोलने की। मुझे ये भी कहा गया कि अगर तुम इस पाप से मुक्ति चाहती हो तो तुम्हें इस्लाम स्वीकार करना होगा।"

"मुझे ये सुनकर बहुत बुरा लगा क्योंकि मुझे अपने धर्म पर विश्वास है। इसके बाद मैंने कहा - मैं धर्म परिवर्तन नहीं करूंगी क्योंकि मुझे ईसाई धर्म पर भरोसा है। ईसा मसीह ने मानवता के लिए सलीब पर अपनी जान दी। आपके पैग़ंबर मोहम्मद ने मानवता के लिए क्या किया है?" इसी लेख में आसिया ने लिखा था कि मुझे प्यास लगने के चलते मौत की सजा दी गई है। 

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