जयपुर VIDEO: राजस्थान उपचुनावः चुनाव परिणाम को प्रभावित करेंगे ये तीन सियासी किरदार

VIDEO: राजस्थान उपचुनावः चुनाव परिणाम को प्रभावित करेंगे ये तीन सियासी किरदार

जयपुरः गुलाब चंद कटारिया, लादू लाल पितलिया और हनुमान बेनीवाल यह तीन व्यक्तित्व और कारण है, जो कि तीन उप चुनावों पर असर डालेंगे. कोई दल हारे या जीते तीन सियासी किरदारों का प्रभाव चुनावी परिणाम पर दिखेगा. देखते हैं खास रिपोर्ट...

तीन शख्सियतों ने राजसमंद, सहाडा और सुजानगढ़ के चुनाव को प्रभावित किया हैं. तीनों के ही भाषण और सियासी कृत्यों ने चुनाव प्रचार पर व्यापक असर डाला. आरएलपी पार्टी के अध्यक्ष हनुमान बेनीवाल तीनों ही उप चुनाव में अपने उम्मीदवार उतारे, लेकिन कहा यही जा रहा है कि सुजानगढ़ में उन्होंने दोनों दलों को हिला कर रख दिया, वहीं सहाडा का चुनाव भी उनकी पार्टी को मिले मतों से प्रभावित होना तय है. किस तरह से तीन किरदारों ने तीन उपचुनाव को प्रभावित किया है आइए आपको बताते कैसे. पहले बात करते हैं नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया की. चुनाव प्रचार जब मार्बल नगरी राजसमंद में उफान पर था तब गुलाब चंद कटारिया ने महाराणा प्रताप को लेकर विवादित बोल, बोल दिए, बीजेपी तो अंदर तक हिल ही गई और अंतिम समय तक डैमेज कंट्रोल के प्रयास में जुटना पड़ा.

-- गुलाब चंद कटारिया ,नेता प्रतिपक्ष.
- महाराणा प्रताप को लेकर गुलाबचंद कटारिया के बयान राजसमंद के चुनाव में चर्चा का केंद्र बन गए. 
- राजपूत समाज के बीच उनके बयानों ने उत्तेजना भर दी ,मेवाड़ नहीं पूरे राज्य भर में कटारिया के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों का दौर शुरू हो गया.
- मतदान से कुछ दिनों पहले दिए गए बयान ने राजसमंद में भारतीय जनता पार्टी के पूरे चुनाव प्रचार पर प्रतिकूल असर डाल दिया.
-गुलाबचंद कटारिया ने कई मर्तबा माफी भी मांगी लेकिन मतदान तक उनके बयान असर दिखाते रहे.
-शौर्य ,त्याग और अभिमान के प्रतीक महाराणा प्रताप को लेकर कटारिया के कई शब्द किसी को भी पसंद नहीं आए.
बीजेपी को राजसमंद में कटारिया के चित्रों को अपनेे पोस्टर से हटाना तक पड़ गया.
-वहीं कांग्रेस पार्टी को उनके बयानों से बड़ा मुद्दा मिल गया.
- जाहिर है दीप्ति माहेश्वरी की हार जीत टिकी है कटारिया के विवादित बयानों पर.
- परंपरागत राजपूत समाज का वोटर अगर बीजेपी से टूटा तो कटारिया के बयान जिम्मेदार माने जा सकते हैं.
- जबकि गुलाबचंद कटारिया को मेवाड़ी नहीं प्रदेश की राजनीति में कद्दावर और शुचिता की राजनीति करने वाला नेता माना जाता है.

सहाड़ा का लादू लाल पितलिया का मामला तीनों उपचुनाव में सर्वाधिक चर्चा का केंद्र बना. बीजेपी ने समस्त राजनीतिक दांव पेंच चलते हुए पितलिया को चुनाव नहीं लड़ने दिया. पीतलिया का ऑडियो ब्लास्ट और जोगेश्वर गर्ग का ऑडियो बंब सहाडा उपचुनाव में खूब चले. सहाड़ा के उपचुनाव की गूंज कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु तक सुनाई दी. पितलिया बिना चुनाव लड़े ही रातों-रात चुनावी स्टार हो गए, बीजेपी ने येन केन प्रकारेण लादू लाल पिता लिया का नामांकन वापस करा कर उन्हें चुनावी समर से हटा दिया. आइए बात करते हैं पीतलिया की.

-- लादू लाल पितलिया बीजेपी नेता
- उपचुनाव से कुछ दिन पहले ही लादू लाल पितलिया ने बीजेपी ज्वाइन कर ली थी.
- सहाड़ा के बीते चुनाव में पितलिया बागी होकर बीजेपी के खिलाफ चुनाव लड़े थे और तकरीबन 30 हजार मत भी प्राप्त किए.
- वैसे पितलिया संघ विचारधारा और भाजपाई माने जाते हैं, उनके द्वारा किए गए गौ सेवा और समाज सेवा के कार्य पूरे भीलवाड़ा में चर्चित रहे हैं.
- बीजेपी में फिर से टिकट के लिए शायद वह शामिल हुए थे लेकिन पार्टी ने टिकट दे दिया रतन लाल जाट को और पितलिया हो गए बागी.
- बीजेपी को लगा कि अगर पितलिया चुनावी समर में डटे रहे तो वह पार्टी के उम्मीदवार का अहित करेंगे.
- यही कारण है कि आनन-फानन में पितलिया को तलाशने का काम शुरू किया गया वे अचानक से गायब हो गए थे, बेंगलुरु तक उनके रिश्तेदारों के पास तलाश की गई.
- नाटकीय घटनाक्रम के तहत उनका नामांकन वापस कराया गया.
- कांग्रेस पार्टी ने इसे मुद्दा बना लिया,  पितलिया के घर के बाहर चिकित्सा विभाग का ऑर्डर भी चस्पा किया गया और सेल्फ क्वारंटाइन कर दिया गया और वे चुनाव से दूर हो गए.
- अब सवाल यह उठता है कि बीजेपी ने पितलिया को अगर बैठाया तो कितना लाभ उनके उम्मीदवार रतन लाल जाट को मिलेगा?
- सहाड़ा के चुनावी जानकार कहते हैं कि पितलिया अगर चुनावी समर में खड़े रहते तो कांग्रेस को नुकसान होता और बीजेपी को लाभ, पितलिया को बैठाकर बीजेपी ने रणनीतिक चूक की, सामान्य वर्ग यूं कहे बीजेपी के परंपरागत वोट बैंक के बीच गलत संदेश गया, संदेश गया कि बीजेपी ने जोर जबरदस्ती पितलिया को बैठा दिया.
- अब चुनाव परिणाम ही पितलिया एपिसोड को रेखांकित करते हुए नजर आएंगे.

सुजानगढ़ का चुनाव एक ऐसा चुनाव था जिसे लेकर कांग्रेस शुरू से आशान्वित थी. कांग्रेस यहां सहानुभूति के तौर पर उम्मीदवार सामने लेकर आई. लेकिन पूरे चुनाव को त्रिकोणीय बना दिया हनुमान बेनीवाल की पार्टी आरएलपी ने.

-- हनुमान बेनीवाल प्रमुख RLP
- सुजानगढ़ में जाट वोट बहुतायत में  और निर्णायक है .कांग्रेस और बीजेपी ने मेघवाल वर्ग से आने वाले उम्मीदवारों को चुनावी समर में उतारा, वही हनुमान बेनीवाल ने सूझबूझ दिखाते हुए नायक पर दांव खेल दिया.
- जैसे-जैसे चुनाव चुनाव चढ़ा वैसे वैसे सुजानगढ़ में हनुमान बेनीवाल ने अपनी ताकत लगा दी.
- बेनीवाल ने स्वजातीय वोट बैंक पर पूरा फोकस कर दिया.
-किसान वर्ग से आने वाले युवा उनके साथ हैं जुट गए.
- त्रिकोणीय संघर्ष के हालात आरएलपी ने सुजानगढ़ में पैदा कर दिए.
- चुनावी परिणाम हनुमान बेनीवाल फैक्टर से तय होंगे.
- बेनीवाल ने ना केवल सुजानगढ़ बल्कि सहाड़ा के चुनाव को भी प्रभावित किया है.
- यह भी तय है कि प्रदेश में rlp का वोट शेयर बढ़ेगा.

गुलाबचंद कटारिया, लादू लाल पितलिया और हनुमान बेनीवाल इन तीन सियासी किरदारों ने तीन उपचुनाव की पूरी कहानी लिखी है . इन तीनों का फैक्टर चुनाव परिणाम को प्रभावित करता हुआ नजर आएगा.
फर्स्ट इंडिया के लिए योगेश शर्मा की रिपोर्ट

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