राज्यसभा का 250वां सत्र, अपने अभिभाषण में PM मोदी ने कहा, राज्यसभा ने इतिहास बनाया भी और बनते देखा भी

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/11/18 14:11

नई दिल्ली आज से शुरू हुआ राज्यसभा का यह सत्र 250वां है भारत की संसद सोमवार को एक ऐतिहासिक मौके की गवाह बनी.इस मौके को विशेष बनाने की तैयारियां की गई हैं सोमवार को संसद के उच्च सदन राज्यसभा में 250वें सत्र की शुरुआत हुई. 67 सालों के इतिहास में राज्यसभा ने कई कीर्तिमान स्थापित किए हैं. इसी 250वें सत्र के पहले दिन राज्यसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपना संबोधन देते हुए कहा कि राज्यसभा ने इतिहास बनाया भी और बनते हुए भी देखा है.

मोदी ने कहा कि राज्य सभा के 250वें सत्र के दौरान मैं यहां उपस्थित सभी सांसदों को बधाई देता हूं 250 सत्रों की ये जो यात्रा चली है, उसमें जिन-जिन सांसदों ने योगदान दिया है वो सभी अभिनंदन के अधिकारी हैं. मैं उनका आदरपूर्वक स्मरण करता हूं. 250 सत्र ये अपने आप में समय व्यतीत हुआ ऐसा नहीं है एक विचार यात्रा रही. समय बदलता गया, परिस्थितियां बदलती गई और इस सदन ने बदली हुई परिस्थितियों को आत्मसात करते हुए अपने को ढालने का प्रयास किया। सदन के सभी सदस्य बधाई के पात्र हैं

प्रधानमंत्री ने कहा कि, राज्यसभा अनन्त और विविध है. भारत की विविधता हमें हमेशा इस सदन में प्रेरित करती है और यह राज्यसभा में साफ नजर आता है.अनुभव कहता है संविधान निर्माताओं ने जो व्यवस्था दी वो कितनी उपयुक्त रही है. कितना अच्छा योगदान इसने दिया है। जहां निचला सदन जमीन से जुड़ा है, तो उच्च सदन दूर तक देख सकता है

इस मौके पर राज्यसभा के सभापति वेंकैया नायडू ने लोकसभा के 67 सालों के सफर पर एक पुस्तक 'राज्यसभा: द जर्नी सिंस 1952' जारी की है. इसमें आंकड़ों के माध्यम से राज्यसभा की कामयाबियों को दर्शाया गया है. राज्यसभा का गठन 1952 में हुआ था, संसद के इस उच्च सदन में 245 सदस्य होते हैं.

आंकडों के आईने में राज्यसभा

राज्यसभा से जारी पुस्तक के मुताबिक 67 सालों में राज्यसभा ने 3817 बिल पास किए हैं. इस दौरान राज्यसभा की 5466 बैठकें हुई. राज्यसभा में 120 बिलों में संशोधन किया गया और इसने संसद के निम्न सदन लोकसभा द्वारा पास 5 बिलों को खारिज कर दिया.

अबतक 2282 सदस्य

1982 से राज्यसभा में अबतक 2,282 शख्सियतें राज्यसभा के सदस्य बन चुके हैं. इनमें 208 महिलाएं हैं और 137 मनोनीत सदस्य हैं. राज्यसभा में महिलाओं की संख्या दोगुनी होने में 62 साल लग गए. 1952 में राज्यसभा में महिलाओं की संख्या 15 थी जो कि 2014 में 31 हुई.

जब राज्यसभा सभापति ने वोट डाला

संसद के उच्च सदन में सिर्फ एक बार ऐसा हुआ जब राज्यसभा के सभापति ने किसी विधेयक पर अपना वोट डाला था. 1991 में जब आपराधिक प्रक्रिया संहिता (संशोधन) अध्यादेश पर वोटिंग के दौरान विपक्ष की ओर से 39 सांसदों ने वोट किए और सत्तापक्ष के सांसदों ने भी 39 वोट दिए. इस स्थिति में सभापति ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था.

राष्ट्रपति शासन को अनुमोदन

67 सालों के इतिहास में राज्यसभा ने सिर्फ दो बार राष्ट्रपति शासन का अनुमोदन किया है. 1977 में राज्यसभा ने तमिलनाडु और नगालैंड में राष्ट्रपति शासन को मंजूरी दी थी, जबकि 1991 में हरियाणा में राष्ट्रपति शासन की मंजूरी दी गई थी. इस दौरान लोकसभा विघटित अवस्था में थी.

First India News से जुड़े अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करे!
हर पल अपडेट रहने के लिए अभी डाउनलोड करें First India News Mobile Application
लेटेस्ट वीडियो के लिए हमारे YOUTUBE चैनल को विजिट करें

और पढ़ें

Most Related Stories

Stories You May be Interested in