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Andhra Bank Recruitment 2019: बैंक में नौकरी के लिए अच्छा मौका

Andhra Bank Recruitment 2019: बैंक में नौकरी के लिए अच्छा मौका

नई दिल्ली: बैंक में नौकरी की ख्वाहिश रखने वाले युवाओं के लिए बेहतरीन खबर है आंध्रा बैंक ने सब स्टाफ पद के लिए आवेदन मांगे हैं ऐसे में इच्छुक और योग्य उम्मीदवार निर्धारित पारूप के तहत अप्लाई कर सकते हैं आवेदन करने के लिए आपको अपना आवेदन बैंक के रीजनल ब्रांच के पते पर भेजना होगा। आवेदन करने की आखिरी तारीख 31 अगस्त, 2019 है

जॉब से जुड़ी जानकारी इस प्रकार है

आवेदन करने की आखिरी तारीख- 31 अगस्त, 2019

वैकेंसी डिटेल

सब स्टाफ- 30 पद

योग्यता

राष्ट्रीयता: भारतीय

किसी भी मान्यता प्राप्त बोर्ड या संस्थान से 10 वीं पास होना चाहिए।

आयु सीमा

इस पद पर अप्लाई करने के लिए आयु सीमा 18 से 25 वर्ष के बीच होना चाहिए.

आयु में छूट: ओबीसी उम्मीदवारों के लिए 3 वर्ष, अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति के उम्मीदवारों के लिए 5 वर्ष और पीडब्ल्यूडी उम्मीदवारों के लिए 10 वर्ष

नौकरी स्थान: श्रीकाकुलम (आंध्र प्रदेश)

चयन प्रक्रिया: चयन टेस्ट / साक्षात्कार पर आधारित होगा

ऐसे करें आवेदन

अप्लाई के आपको ऑफलाइन सुविधा का इस्तेमाल करना होगा आवेदन के लिए आपको अपना आवदेन आंचलिक प्रबंधक, आंध्रा बैंक, मानव संसाधन विभाग, आंचलिक कार्यालय श्रीकाकुलम वेंकटपुरम जंक्शन, सिमहाद्वरम के पास, श्रीकाकुलम - 532005 के पते पर भेजना होगा.

बता दें कि इससे पहले भी बैंकों में लगातार वैकेंसी निकल रही हैं. हाल ही बैंक पीओ के लिए आवेदन मांगे गए हैं. पीओ की परीक्षा जल्द कराई जाने वाली है. वहीं, 10वीं पास के लिए पोस्ट विभाग और गुजरात परिवहन विभाग में भी बंपर भर्ती हो रही है

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जयपुर: सिविल सेवा परीक्षा का मंगलवार को अंतिम परिणाम जारी किया गया. परिणाम में राजधानी जयपुर के शिशिर गुप्ता ने 50वीं रैंक हासिल कर ना सिर्फ जयपुर का साथ ही अपने माता-पिता और गुरुजनों का भी मान बढाया. बचपन से ही आईएएस बनने के सपना देखने वाले शिशिर गुप्ता का ये चौथा प्रयास था और दूसरे प्रयास में साक्षात्कार तक पहुंचे शिशिर को सफलता नहीं मिली थी,लेकिन शिशिर ने हिम्मत नहीं हारी.

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ट्विटर ने दिया पढ़ाई में बहुत सहयोग:
चौथे प्रयास में शिशिर गुप्ता ने 50वीं रैंक हासिल की.सफलता के बाद शिशिर गुप्ता ने बताया की बचपन से ही आईएएस बनने का सपना देखा. तीन बार असफल होने के बाद भी हार नहीं मानी थी. जिसका परिणाम है कि आज सफलता प्राप्त हुई है.सफलता में माता-पिता और गुरुजन के साथ ही मेरे दोस्तों का भी बड़ा सहयोग रहा है. जब तैयारी कर रहा था तब फेसबुक को तो डिलीट कर दिया था, लेकिन ट्विटर ने पढ़ाई में बहुत सहयोग दिया.

आईएएस बनना गर्व की बात:
इसके साथ ही प्रतिदिन न्यूज देखने और पढ़ने का भी काफी लाभ मिला.बेटे की सफलता के बाद फूले नहीं समा रहे शिशिर के माता-पिता जो पेशे से शिक्षक हैं का कहना है कि शिशिर पढ़ाई में बचपन से ही होशियार था. साथ ही पढ़ाई को लेकर कभी कोई समझौता नहीं किया.इसके साथ ही हमारे पूरे परिवार में कोई आईएएस बना है जो गर्व की बात है

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नई दिल्ली: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने सिविल सेवा परीक्षा 2019 के नतीजे घोषित कर दिया. इन नतीजों में प्रदीप सिंह ने टॉप किया है. यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन ने UPSC 2019 की परीक्षा में प्रदीप सिंह ने टॉप किया है वहीं दूसरे स्थान पर जतिन किशोर रहे हैं. 

तीसरे नंबर पर जमाया प्रतिभा वर्मा ने कब्जा:
UPSC ने मंगलवार को 2019 की सिविल सेवा परीक्षा का जो फाइनल रिजल्ट जारी किया उसमें तीसरे नंबर पर प्रतिभा वर्मा ने कब्जा जमाया है और वो महिलाओं के नाम के मामले में प्रथम स्थान पर आई हैं.

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UPSC की वेबसाइट चेक करे परिणाम: 
UPSC 2019 का रिजल्ट आधिकारिक वेबसाइट www.upsc.gov.in पर चेक किया जा सकता है. कैंडीडेट्स अपने अंक रिजल्ट जारी होने के 15 दिन बाद वेबसाइट पर चेक कर सकेंगे. आपको बता दें कि वर्ष 2019 के लिए यूपीएससी परीक्षा के लिए 2,304 उम्मीदवार सफल हुए थे. इन छात्रों के लिए इंटरव्यू की परीक्षा 17 फरवरी 2020 से शुरू हुई थी लेकिन कोरोना की वजह से मार्च में इंटरव्यू रोकना पड़ा था. जिसके बाद 20-30 जुलाई के बीच इंटरव्यू रखे गए.

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जयपुर: मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने गुर्जरों सहित अति पिछड़ा वर्ग के अभ्यर्थियों को राजस्थान न्यायिक सेवा में आरक्षण के लिए बड़ा फैसला किया है. एमबीसी को एक प्रतिशत के स्थान पर 5 प्रतिशत आरक्षण देने के लिए राजस्थान न्यायिक सेवा नियम, 2010 में संशोधन को राज्य कैबिनेट के माध्यम से मंजूरी मिल गई है. 

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अति पिछड़ा वर्ग के अभ्यर्थियों को इस संशोधन के जरिए राजस्थान न्यायिक सेवा में एक प्रतिशत के स्थान पर 5 प्रतिशत आरक्षण दिया जाना प्रस्तावित है. गौरतलब है कि अति पिछड़ा वर्ग के अभ्यर्थी लम्बे समय से न्यायिक सेवा नियमों में संशोधन की मांग कर रहे थे, ताकि उन्हें राज्य न्यायिक सेवा में एक प्रतिशत के स्थान पर 5 प्रतिशत आरक्षण मिल सकें.

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मुख्यमंत्री की इस पहल से गुर्जर, रायका-रैबारी, गाडिया-लुहार, बंजारा, गडरिया आदि अति पिछड़ा वर्ग के अभ्यर्थियों को राजस्थान न्यायिक सेवा में नियुक्ति के अधिक अवसर मिलना संभव होगा. 

नई शिक्षा नीति को लेकर बयानबाजी का दौर हुआ शुरू, मंत्री सुभाष गर्ग और मंत्री डोटासरा ने केंद्र सरकार पर साधा निशाना

जयपुर: नई शिक्षा नीति को लेकर राज्य के शिक्षा मंत्रियों ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है. प्रदेश के शिक्षा मंत्रियों ने नई नीति में कई कमियां गिनाई है, तो यह भी स्वीकार किया कि नई नीति में प्रदेश सरकार के अच्छे सुझावों को भी लागू किया है. मोदी केबिनेट द्वारा कल नई शिक्षा नीति को मंजूरी मिल गई.जिसमे कई बदलाव सामने आए है. इन बदलावों को लेकर प्रदेश के शिक्षा मंत्रियों ने मिलीजुली प्रतिक्रिया दी है.

भ्रटाचार और भाई भतीजावाद पनपेगा:
प्रदेश की स्कूली शिक्षा का जिम्मा संभाल रहे पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा ने नई शिक्षा नीति पर एक और राज्य के सुझाव को माने जाने पर आभार जताया तो दूसरी तरफ उन्होंने शिक्षक भर्तियों में साक्षात्कार को शामिल करने पर नाराजगी भी जाहिर की.डोटासरा का कहना है कि इंटरव्यू से भ्रटाचार और भाई भतीजावाद पनपेगा यह आपत्ति बड़ी आपत्ति है. हालांकि उन्होंने शिक्षको की गैर शैक्षणिक कार्यों में ड्यूटी नहीं लगाने जैसे सुझाव मानने पर आभार जताया. जबकि आंगनबाडियों को प्री प्राइमरी के तौर पर शामिल करने जैसे बिंदुओ को भी राज्य द्वारा दिए गए सुझाव बताए. जबकि कहा की क्वालिटी एजुकेशन के लिए कुछ खास नजर नहीं आया. एक्स्ट्रा बजट की कोई बात नहीं की गई है. डोटासरा ने कहा कि नई नीति में राज्यों को सपोर्ट करने की बात नहीं की गई. राजीव गांधी के समय की 1986 की नीति जैसा ही है. कोई ज्यादा बदलाव नहीं है.

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5+3+3+4 का फॉर्मूला ग्रामीण क्षेत्रों में संभव नहीं: 
दूसरी तरफ, नई  एजुकेशन पॉलिसी पर तकनीकी और संस्कृत शिक्षा मंत्री सुभाष गर्ग बिल्कुल सहमत नजर नहीं आए. उन्होंने केंद्र सरकार पर निशाना साधाते हुए कहा नई पॉलिसी एक आईडियोलॉजी को लागू करने के लिए नजर आती है. सेंट्रल एंट्रेंस टेस्ट के जरिए ग्रामीण और गरीब स्टूडेंट्स कैसे प्रवेश लेे सकेंगे. उन्होंने कहा कि यह ऑटोनोमस और रेजिडेंशियल पॉलिसी व्यवहारिक नहीं है. एफिलिएट कॉलेजों में सम्भव नहीं है. स्टेट को सुविधा दें केंद्र सरकार, तब तो कुछ हो सकता है ,व्यावहारिक नहीं है, 5+3+3+4 के फॉर्मूला पर कहा ग्रामीण क्षेत्रों में यह सम्भव नहीं है. बीजेपी सरकार हिडन एजेंडा को लागू करने पर काम कर रही है. प्राइवेटाइजेशन नहीं होना चाहिए केंद्र की किसी कमेटी ने राज्यों के उच्च शिक्षा संस्थान के प्रतिनिधियों को बुलाया नहीं केंद्रीकृत के बजाय सत्ता का विकेंद्रीकृत होना चाहिए. पहले से सियासी संग्राम में उलझे केंद्र और राज्य के बीच अब नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति भी आ गई है. जिससे इस मसले पर भी विवाद होना तय है. लिहाजा, नई नीति के बाद अब बयानों के घमासान शुरू हो गई है. 

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निजी स्कूलों की निशुल्क सीटों पर प्रवेश लॉटरी, शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा ने निकाली लॉटरी

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जयपुर: शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा ने गुरुवार को शिक्षा संकुल स्थित सभागार में निशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा के अधिकार नियम के तहत ऑनलाइन लॉटरी निकाली. शिक्षा मंत्री ने 36 हजार 281 पात्र गैर सरकाीर विद्यालयों में शैक्षणिक सत्र 2020-21 में निशुल्क सीटों पर प्रवेश हेतु वरीयता क्रम निर्धारण के लिए यह ऑनलाइन लॉटरी निकाली.सत्र 2020-21 के लिए 36 हजार 281 स्कूलों में से 31 हजार 480 स्कूलों के लिए विद्यार्थियों के आवेदन आए.इस साल कुल 1 लाख 91 हजार 158 बालक-बालिकाओं ने 8 लाख 60 हजार 512 ऑनलाइन आवेदन किए.लाॅटरी के लिए 1 लाख 91 हजार 158 आवेदकों में 1 लाख 2 हजार 847 बालकों ने और 88 हजार 300 बालिकाओ के आवेदन सम्मिलित हैं.लाॅटरी में 11 थर्ड जेण्डर आवेदक रहे हैं.

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निजी स्कूलों में निशुल्क सीटों पर प्रवेश के लिए निकाली लॉटरी
-सामान्य वर्ग के 34007 आवेदकों ने 204062 आवेदन
-ओबीसी के 89790 आवेदकों ने 399843 आवेदन
-एसबीसी के 6088 आवेदकों ने 13421, अनाथ वर्ग में 482 ने 2142
-एससी के 36636 ने 146743,एसटी के 9892 ने 29404
-कैंसर और एचआईवी प्रभावित 263 आवेदकों ने 1297 आवेदन
-649 युद्ध विधवाओं के 3170,निःशक्त जन के 327 आवेदकों के 1343
-तथा बीपीएल के 13024 आवेदको के 59087 ने किए ऑनलाइ आवेदन

31 अगस्त तक पूरी करनी होगी प्रवेश प्रक्रिया:
लॉटरी निकालने के बाद शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि पिछली बीजेपी सरकार ने प्रवेश मे पारिवारिक आय को एक लाख किया था,लेकिन कांग्रेस ने सत्ता में आने के साथ ही प्रवेश में पारिवारिक आय को एक लाख से बढ़ाकर ढाई लाख किया.क्योंकि सरकार की मंशा है की हर वर्ग के बच्चों को क्वालिटी एज्युकेशन मिल सके.गरीब का बच्चा भी सरकार के खर्चे पर बेहतर शिक्षा प्राप्त कर सके.सरकारी खर्चे पर सरकारी स्कूलों के बेहतर शिक्षा हर वर्ग के बच्चों को मिल सके सरकार की ये प्राथमिकता है.इस दिशा में जल्दी प्रक्रिया शुरू की और सभी निजी स्कूलों को ऑनलाइन किया हुआ है.बच्चों में भी ये अच्छी भावना होती है कि उनको जिस स्कूल में अच्छी शिक्षा मिल रही है वो बेहतर हो.आरटीई के तहत होने वाले प्रवेश की लॉटरी आज निकाली जा चुकी है और विद्यार्थियों को वार्ड में वरियता के अनुसार प्रवेश दिया जाएगा. साथ ही अभिभावकों को 7 अगस्त तक स्कूल में रिपोर्ट करना होगा.31 अगस्त तक प्रवेश प्रक्रिया पूरी करनी होगी.

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नई शिक्षा नीति को मोदी कैबिनेट की मंजूरी, HRD मिनिस्ट्री का बदला नाम

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नई दिल्ली: आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में हुई कैबिनेट की बैठक में बड़ा फैसला लिया गया है. मानव संसाधान विकास मंत्रालय का नाम शिक्षा मंत्रालय कर दिया गया है. इस बैठक के दौरान मोदी सरकार ने नई शिक्षा नीति को भी मंजूरी दे दी है. बताया जा रहा है कि इस बारे में विस्तृत जानकारी सरकार की ओर से शाम 4 बजे होने वाली कैबिनेट ब्रीफिंग में दी जाएगी. 

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बता दें कि मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने प्रस्ताव दिया था कि मंत्रालय का मौजूदा नाम बदल कर शिक्षा मंत्रालय कर दिया जाए. वहीं, शिक्षा नीति को मंजूरी मिल जाने के बाद अब पूरे उच्च शिक्षा क्षेत्र के लिए एक ही रेगुलेटरी बॉडी होगी, ताकि शिक्षा क्षेत्र में अव्यवस्था को खत्म किया जा सके.

शिक्षक और छात्रों का अनुपात 1:30 होगा:
नई शिक्षा नीति के अनुसार आने वाले समय में शिक्षक और छात्रों का अनुपात 1:30 होगा. नई शिक्षा नीति में कहानी, रंगमंच, सामूहिक पठन पाठन, चित्रों का डिस्प्ले, लेखन कौशलता, भाषा और गणित पर भी जोर होगा. वित्त मंत्री सीतारमण ने इस साल बजट में नई शिक्षा नीति का ऐलान किया था. ऐसे में अब इस नई शिक्षा नीति के लागू होने के बाद देश में शिक्षा के मायने को बदला जाएगा. इससे युवाओं को शिक्षा के अवसर मिलने के साथ-साथ रोजगार प्राप्ति में भी आसानी होगी. 

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तीन दशक बाद भी कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ: 
गौरतलब है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति का निर्माण 1986 में किया गया था और 1992 में इसमें कुछ बदलाव किए गए थे. तीन दशक बाद भी कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है. केंद्र सरकार का मानना है कि शिक्षा के क्षेत्र में बड़े स्तर पर बदलाव की जरूरत है ताकि भारत दुनिया में ज्ञान का सुपरपावर बन सके. 


 

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जयपुर: राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (RBSE) 10वीं कक्षा का परीक्षा परिणाम घोषित किया गया. राज्य के शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा ने परिणाम जारी किया. इस वर्ष भी 10 वीं कक्षा की परीक्षा में छात्राओं ने बाजी मारी है. 10 वीं की परीक्षा में कुल 11 लाख 52201 स्टूडेंट्स ने परीक्षा दी. जिनमें से 9 लाख 29045 स्टूडेंट्स पास हुए. इस वर्ष 10वीं का परीक्षा परिणाम 80.63 फीसदी रहा. छात्रों का परीक्षा परिणाम 78.99 फीसदी रहा. जबकि छात्राओं का परीक्षा परिणाम 81.41 फीसदी रहा. आप 10 वीं कक्षा का परीक्षा परिणाम बोर्ड की वेबसाइट rajeduboard.rajasthan.gov.in और  rajresults.nic.in पर देख सकते हैं.

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जून अंत में हुए 10वीं के दो पेपर:
कोरोना संकट की वजह से राजस्थान बोर्ड 10वीं की शेष परीक्षाएं जून के अंत में आयोजित की हुई थीं. 10वीं के समाजिक विज्ञान और गाणित दो पेपर्स की परीक्षाएं स्थगित हो गई थीं. RBSE ने इन्हें दोबारा कराने का फैसला लिया था. हिंदी, इंग्लिश, थर्ड लैंग्वेज और विज्ञान की परीक्षाएं पहले ही हो चुकी थीं. 

साइंस, कॉमर्स और आर्ट्स के जारी हो चुके है परिणाम:
RBSE अब तक 2 चरणों के नतीजे का ऐलान कर चुका है और अब तीसरे चरण में 10वीं कक्षा के परिणाम जारी किए गए है. आपको बता दें कि कोरोना महामारी  में छात्रों के कुछ पेपर स्थगित होने के बाद जून में कराए गए इसके बावजूद भी इस बार तीनों वर्गों का रिजल्ट बेहतर रहा. 

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जैसलमेर: आमतौर पर शिक्षा में पिछड़ा माने जाने वाले जैसलमेर के होनहार अब पुरानी सभी भ्रांतियों को तोड़ रहे हैं, लेकिन यहां अभी भी शिक्षा के क्षेत्र में उतना विकास नहीं हुआ है जितना होना चाहिए. उदाहरण के तौर पर सीबीएसई पैटर्न की पढ़ाई की बात की जाए तो दसवीं कक्षा के बाद विद्यार्थियों के पास स्कूल का ऑप्शन ही नहीं है. जैसलमेर में सीबीएसई पैटर्न के मात्र 4 विद्यालय ही है इसमें भी सभी संकाय नहीं है. इसके साथ ही हर संकाय के लिए 40 सीट ही फिक्स है. ऐसे में जैसलमेर में हजारों की संख्या में दसवीं पास करने वाले चंद सैकड़ों विद्यार्थी ही सीबीएसई पैटर्न में अपनी पढ़ाई  आगे जारी रख पाते हैं. इसके बाद उन्हें अन्य जिले या आरबीएससी के पैटर्न से पढ़ाई करनी पड़ती है इससे विद्यार्थियों को परेशानी उठानी पड़ रही है. 

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अभिभावक अपने बच्चों को बाहर भेजने में भी संकोच कर रहे:
देश व प्रदेश में इन दिनों कोरोना का प्रकोप चल रहा है ऐसे समय में अभिभावक अपने बच्चों को बाहर भेजने में भी संकोच कर रहे हैं. जहां अन्य जिलों में कोरोना पॉजिटिव के रोज नए आंकड़े सामने आ रहे हैं. वहीं इस महामारी से हर कोई पीड़ित है. ऐसे में अभिभावक अपने बच्चों को बाहर भी नहीं भेज पा रहे हैं. इन चार स्कूल में संख्या प्रवेश नहीं होने की स्थिति में बच्चों के सामने असमंजस की स्थिति पैदा हो रही है जबकि अन्य जिलों में सीबीएसई पैटर्न की कई स्कूले हैं. वही जैसलमेर में मात्र 4 स्कूलों के कारण अभिभावकों व विद्यार्थियों के पास ऑप्शन नहीं होने से पढ़ाई छोड़ने या आरबीएसई पैटर्न से पढ़ाई करने की परेशानी हो रही है ऐसे में यह बच्चे मांग कर रहे हैं या तो स्कूलों में संकाय बढ़ाई जाए या स्कूलों में सीट बढ़ाई जाए ताकि यह बच्चे अपना भविष्य बेहतर बना सके. 

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