अयोध्या केस: सुप्रीम कोर्ट में 8वें दिन की सुनवाई टली, लेकिन क्यों

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/08/19 11:50

नई दिल्ली :सुप्रीम कोर्ट में पीठ के एक जज की तबीयत खराब होने की वजह से अयोध्या विवाद पर आज सुनवाई नहीं हुई. 5 सदस्यीय संवैधानिक पीठ के एक जस्टिस एस. ए. बोबडे आज तबीयत खराब होने की वजह से कोर्ट नहीं आ पाए थे इस वजह से आज की सुनवाई को टाल दिया गया. बता दें कि सुनवाई का आज आठवां दिन था.अबतक हुई सात दिनों की सुनवाई में रामलला विराजमान ने अपना पक्ष रखा है.बता दें कि चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली 5 सदस्यीय संवैधानिक पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है. इस संवैधानिक पीठ में जस्टिस एस. ए. बोबडे, जस्टिस डी. वाई. चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एस. ए. नजीर भी शामिल हैं.पूरा विवाद 2.77 एकड़ की जमीन को लेकर है.आज जस्टिस बोबडे की तबीयत बिगड़ने की वजह से चीफ जस्टिस द्वारा सुने जाने वाले अन्य केसों में तीन जजों की बैंच बैठी.

7th डे कोर्ट हियरिंग
शुक्रवार को हुई सुनवाई में रामलला विराजमान के वकील सी. एस. वैद्यनाथन ने अपना पक्ष रखा था. उन्होंने कहा कि सिर्फ नमाज अदा करने से वह संपत्ति मुस्लिम पक्ष की नहीं हो जाती. फिर उन्होंने सड़का उदाहरण दिया और कहा कि नमाज सड़कों पर भी होती है इसका मतलब यह नहीं कि सड़क आपकी हो गई। इसपर सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील राजीव धवन ने आपत्ति जताई थी. उन्होंने कहा कि यह इस्लाम की सही व्याख्या नहीं है.

इसके बाद वैद्यनाथन ने कहा कि ASI की रिपोर्ट से साफ है की मस्जिद किसी खाली पड़ी ज़मीन या एग्रीकल्चर ज़मीन पर नही बनी, मस्जिद एक बहुत बड़े ढांचे के ऊपर बनी. फिर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि साबित करें कि वह बड़ा ढांचा मंदिर का धार्मिक इमारत ही है

चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच जजों की संविधान पीठ में रामलला विराजमान की तरफ से एक बार फिर पक्ष रखा जाएगा. पिछली सुनवाई में रामलला के वकील सीएस वैद्यनाथन ने कोर्ट को विवादित ज़मीन के नक्शे और फोटोग्राफ दिखाते हुए कहा था कि खुदाई के दौरान मिले खंभों में श्रीकृष्ण, शिव तांडव और श्रीराम की बालरूप की तस्वीरें नज़र आती हैं. वैद्यनाथन ने कहा था कि 1950 में वहां हुए निरीक्षण के दौरान भी तमाम ऐसी तस्वीर, ढांचे मिले थे, जिनके चलते उसे कभी भी एक वैध मस्ज़िद नहीं माना जा सकता. किसी भी मस्ज़िद में इस तरह के खंभे नहीं मिलेंगे.

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